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स्वामी रामदेव और अखिलेश यादव की ये मुलाकात क्या रंग लाएगी?

शुक्रवार 30 सितम्बर 2011 की रात योग गुरु स्वामी रामदेव अपनी भारत स्वाभिमान यात्रा के दौरान हरदोई में अपने एक शिष्य के घर पर रुके थे. अगली सुबह उन्हें योग शिविर में हिस्सा लेना था. अचानक हूटर बजती लग्ज़री गाड़ियों का काफिला घर के गेट से अन्दर दाखिल होता है और उसमें से अपने कुछ स्थानीय समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव उतरते हैं. अन्दर आते ही वो योग गुरु स्वामी रामदेव के साथ मिलने की इच्छा व्यक्त करते हैं.

शुक्रवार 30 सितम्बर 2011 की रात योग गुरु स्वामी रामदेव अपनी भारत स्वाभिमान यात्रा के दौरान हरदोई में अपने एक शिष्य के घर पर रुके थे. अगली सुबह उन्हें योग शिविर में हिस्सा लेना था. अचानक हूटर बजती लग्ज़री गाड़ियों का काफिला घर के गेट से अन्दर दाखिल होता है और उसमें से अपने कुछ स्थानीय समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव उतरते हैं. अन्दर आते ही वो योग गुरु स्वामी रामदेव के साथ मिलने की इच्छा व्यक्त करते हैं.

खबर मिलने पर स्वामी रामदेव अपने कमरे से बाहर आते हैं और अखिलेश यादव को लेकर अपने कमरे में चले जाते हैं. करीब पंद्रह मिनट तक दोनों में अन्दर क्या बातचीत हुयी. बाहर वालों को कुछ नहीं मालूम. स्वामी रामदेव इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव को उनकी गाड़ी तक छोड़ने भी आते हैं. वहाँ जब मैंने अखिलेश यादव और बाबा रामदेव दोनों से इस गुपचुप मुलाकात का मकसद जानना चाहा तो उन्‍होंने कोई जवाब देने से इनकार कर दिया. आखिर इस गुपचुप मुलाक़ात के पीछे क्या राज़ था किसी को नहीं पता. इस मुलाक़ात के लिए अखिलेश यादव अपनी क्रांति रथ यात्रा बीच में ही अधूरी छोड़कर शाहजहाँपुर से हरदोई आए थे और स्वामी रामदेव से बन्द कमरे में गोपनीय भेंट करने के बाद लखनऊ के लिए रवाना हो गए. क्या ये मुलाकात किसी सियासी मकसद के लिए थी या सिर्फ शिष्टाचार भेंट थी, किसी को कुछ नहीं पता. अब देखना ये है कि ये मुलाकात भविष्य में क्या रंग दिखाती है.

लेखक आमिर किरमानी हरदाई में पत्रकार हैं.

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