‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले/ वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशाँ होगा’, लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही हो रहा है। यह प्रश्न उठना लाजिमी है क्योंकि गाजीपुर जिले के सैदपुर नगर पंचायत में गाँधी जी की याद में लगा लगभग 82-83 साल पुराना शिलापट्ट आज गंदी और बदबूदार नालियों की शोभा बढ़ा रहा है। इस ऐतिहासिक शिलापट्ट को गाँधी की दांडी-यात्रा [30- मार्च 1930] के बाद सैदपुर नगर के मुख्य बाजार में लगाया गया था। सन 1934-35 में स्थापित गाँधी रोड लिखे इस शिलापट्ट को आजाद भारत की कृतघ्न सरकार ने गंदी नाली की शोभा बना दिया। यह बात खटकी ‘विशाल जन-सेवा शिक्षा समिति’ के युवाओं को और उन्होंने नाली, गन्दगी और कूड़े के बीच दबे इस शिलापट्ट को न सिर्फ खोज निकाला बल्कि इसे इसके पूर्व स्थापित स्थल पर पुनः स्थापित कर दिया। इस दौरान नगर प्रशासन की भूमिका काफी गैरजिम्मेदाराना रही।
ब्रिटिश सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंकते हुए गाँधी जी ने सन 1930 में नमक-आन्दोलन किया और इस निमित्त दांडी-यात्रा की। इस दांडी यात्रा की सफलता को लेकर चिढ़ी अंग्रेज सरकार ने जब इसमें शामिल होने वाले लोगों पर बर्बर अत्याचार करना शुरू किया तो इसके प्रतिकार में गाँधी जी ने भारत भ्रमण किया था और इसी दौरान वे सैदपुर नगर भी आये और नाव द्वारा गंगा पार कर बिहार के सीमान्त गांवों के दौरे पर गए। गाँधी जी की इस स्मृति को चिर-काल तक सहेजकर रखने के लिए नगर के मुख्य मार्ग का नाम ‘गाँधी रोड’ रखा गया और मार्ग के दोनों मुहानों पर शिलापट्ट लगाया गया। नगर प्रशासन द्वारा सड़क निर्माण के दौरान इस पत्थर को तोड़ दिया गया और तभी से गायब इस ऐतिहासिक शिलापट्ट को ‘विशाल जन-सेवा शिक्षा समिति’ ने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से ढूंढ निकाला। मिट्टी और काई से सने इस शिलापट्ट को गंगाजल से धोकर इसे अपने पूर्व स्थान पर स्थापित किया।
नगर के पूर्व चेयरमैन श्री काशीनाथ पाण्डेय अपने बचपन की यादों में खो जाते हैं और बताते हैं कि 1936 में जब वे मिडिल में पढ़ते थे तो इस शिलापट्ट को देखकर गौरवान्वित होते थे। श्री पाण्डेय ने गाँधी-स्मृति की इस उपेक्षा को राष्ट्रद्रोह की संज्ञा दी है। नगर के वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार रामजी सिंह ने विशाल जन-सेवा शिक्षा समिति को धन्यवाद देते हुए हर्ष व्यक्त किया कि आज के युवा अपनी संस्कृति और गौरवशाली अतीत के प्रति जागरूक हैं। विशाल जन-सेवा शिक्षा समिति के सदस्यों ने शिलापट्ट स्थापना अवसर पर संकल्प लिया कि भविष्य में कहीं भी, किसी के द्वारा भी, शहीदों की स्मृतियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी। संस्था के सदस्यों में प्रमुख रूप से यशवीर सिंह, ब्रिजेश सिंह, अवनीश चौबे [एडवोकेट ], ईश्वर दत्त पाण्डेय, रातदरश यादव, अनूप सिंह बाबू, मंसूर अली और बब्बन गोड़ इस पुनीत कार्य में शामिल रहे।


