सहरसा जिले के सौर बाजार थानान्तर्गत सहुरिया पश्चिमी गाँव के राम टोला में दबंगों का ऐसा कहर बरपाया, जिसे देखकर यमराज की रूह भी थर्रा उठे. बीते रविवार के दिन के करीब नौ बजे उसी गाँव के संपन्न और रसूखदारों ने एक साथ करीब सौ की संख्या में इस महादलित टोले पर हमला बोल दिया और एक तरफ से डेढ़ दर्जन से ज्यादा महादलितों के घरों को तोड़फोड़ कर जमींदोज कर दिया. करीब ढाई से तीन घंटे तक इन खूंखार इंसानी भेड़ियों का कहर यहाँ बेदर्दी से बरपता रहा, जो जिधर मिला उसकी उधर ही जमकर धुनाई की गई. महिलाओं और बच्चियों के साथ छेड़छाड़ करते हुए इन बहशी दरिंदों ने इन गरीबों के घर जमकर लूटपाट भी मचाया.
आप खुद ही देखिये यहाँ गरीबों के मामूली से घर किस तरह ज़मींदोज होकर सत्तासीनों को मुंह चिढ़ा रहे हैं. विकास से कोसों दूर इस टोले में आज इन महादलितों का सबकुछ छिन चुका है. तस्वीर खुद-ब-खुद यहाँ मचे कोहराम की कहानी बयाँ कर रही हैं. बात मामूली सी थी कि नवरात्र में घर-घर जाकर ढोल बजाने के बदले में महादलित पुराने साल के वनिस्पत इस वर्ष कुछ ज्यादा रकम की मांग कर बैठे. दबंगों ने इन्हें पुराने तौर तरीके से ही ढोल बजाने के लिए विवश किया, जिसका इन महादलितों ने ना केवल प्रतिकार किया बल्कि वे ढोल बजाने नहीं गए. बस इसी वजह से आज यह ग़दर मचाया गया, जिसकी इन महादलितों ने ऐसी कीमत चुकाई है, जिसे ये आने वाली कई पीढ़ी तक नहीं भूल पायेंगे.
एक तरफ जहाँ सूबे के मुखिया महादलितों की सुरक्षा और विकास के तमाम दावे करते हैं, वहीं क्या ये घटना उनके दावे को नाकाफी साबित करने के लिए काफी नहीं है? आख़िर कब तक इन दलितों के खून से वोट की राजनीति होती रहेगी. आख़िर क्यों ये ख़बर तमाम मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पाई. महुआ न्यूज़ के अलावा इस ख़बर को सभी चैनल ने क्यों नहीं उठाया. क्यों चुप हो जाते हैं फेसबुक पर वो तमाम चेहरे जो दलितों के शुभ चिन्तक दिल्ली में बैठे-बैठे उनके हितों के बारे में सोचते हैं. सवाल तो कई हैं महज हमें तो सिर्फ यही सुनने को मिलता है कि जाँच कमिटी बैठाई जा रही है. उसके बाद करवाई होगी.
चंदन सिंह की रिपोर्ट.


