यमुनानगर। चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में विश्व प्रसिद्ध भारतीय फिल्मकार मणि कौल को श्रद्धांजलि दी गई। ओम थानवी के सौजन्य से उनकी सुप्रसिद्ध फिल्म नौकर की कमीज का प्रदर्शन किया गया। फेस्टीवल के निदेशक अजित राय ने कहा कि मणि कौल के बिना हम सिनेमा की बात नहीं कर सकते। दुनिया भर में उनकी फिल्मों को गंभीरता से लिया जाता है। मणि कौल की फिल्म उसकी रोटी, दुविधा और नौकर की कमीज एक अलग सिनेमाई संसार रचती है। उनकी खासियत है कि उनके सिनेमा में जो दिखता है, उससे अधिक जो नहीं दिखता है, उसकी बात होती है।
फेस्टीवल की आयोजक डा. सुषमा आर्य ने कहा कि ६० के दशक के अंत में भारत में प्रयोगधर्मी सिनेमा की शुरुआत करने वाले फिल्मकार स्वर्गीय मणि कौल की फिल्म नौकर की कमीज हिंदी की चुनी हुई बेहतर फिल्मों में से एक है। चर्चित हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित नौकर की कमीज की परिकथा में विनोद कुमार शुक्ल का भी सहयोग है। यदि विनोद कुमार शुक्ल को कवियों का कवि कहा जा सकता है, तो मणि कौल को भी फिल्मकारों का फिल्मकार कहा जा सकता है। उन्होंने मणि कौल को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि दी।
सुप्रसिद्ध फिल्म समीक्षक विनोद भारद्वाज, फिल्म एप्रीशिएशन कोर्स के निदेशक संजय सहाय, वरिष्ठ रंगकर्मी रंजीत कपूर तथा मुंबई विश्वविद्यालय एकेडमी ऑफ थियेटर आर्ट के निर्देशक एवं रंगकर्मी वामन केंद्रे सहित कई विद्वानों ने इस अवसर पर अपने विचार रखें। वक्ताओं ने कहा कि सतह से उठता आदमी, माटी मानस आदि मणि कौल की फिल्में हिंदी सिनेमा की अलग तरह की उपलब्धि मानी जाती है। कैंसर से लंबे संघर्ष के बाद मणि कौल का पिछले दिनों दिल्ली में देहांत हुआ था। नौकर की कमीज का प्रदर्शन जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के सहयोग से डीएवी गल्र्स कालेज में चल रहे चौथे हरियाणा अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में हुआ। यह प्रदर्शन निश्चय ही इस समारोह की उपलब्धि माना जाता है।
नौकर की कमीज में मध्य प्रदेश के एक नि न मध्य वर्गीय परिवेश का बहुत अलग ढंग से चित्रण किया गया है। विनोद कुमार शुक्ल यर्थाथ को कभी-कभी जादुई यथार्थवाद में बदल देते हैं, तो कभी उसके अति यथार्थवादी रुप को सामने लाते हैं। निर्देशक ने अपनी फिल्म में भी यथार्थ और अतियथार्थवाद की इस आवाजाही को संवेदनशीलता के साथ बनाए रखा है। मणि कौल, विनोद कुमार शुक्ल के एक अन्य उपान्यास पर फिल्म बनाना चाहते थे, लेकिन बना नहीं पाए। महान हिंदी कवि और लेखक गजानंद माधव मुक्तिबोध के जीवन और लेखन से प्रेरित फिल्म सतह से उठता आदमी कान फिल्म समारोह के प्रतिष्ठित ए सर्टन रिगार्ड खंड में दिखाई गई थी। मणि कौल की दिलचस्पी शास्त्रीय संगीत में भी थी। उनकी फिल्म सिद्धेश्वरी एक अलग तरह की डाक्यूमेंट्री फिल्म है। स्वयं मणि कौल द्रुपद के गायक और विशेषज्ञ थे। उनक अंतिम दिनों में उनके विदेशी छात्रों ने आकर गुरु के प्रति श्रद्धाभाव से सेवा की। नौकर की कमीज फिल्म का प्रदर्शन के बाद उपरोक्त वक्ताओं ने श्रोताओं द्वारा पूछे गए सवालों का बड़ी सहजता से उत्तर दिया।


