गुजरात में राज्य सरकार द्वारा जिस तरह से बहादुर आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को सच का साथ देने के अपराध में दण्डित किया गया है, उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के लिए मेरठ में कलक्ट्रेट चौराहे पर इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड डोक्यूमेन्टेशन इन सोशल साइंसेज (आईआरडीएस) की तरफ से एक विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमे जिलाधिकारी, मेरठ के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा गया.
प्रदर्शन में शामिल संस्था की सचिव डॉ. नूतन ठाकुर ने कहा कि संजीव भट्ट जिस तरह से अपने आईपीएस के लिखित कर्तव्यों से काफी आगे बढ़ कर अपनी आत्मा की आवाज़ सुन कर सामने आये और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट में स्वयं गुजरात के मुख्यमंत्री के विरुद्ध लिखित एफिडेविट दिये वह दूसरे सभी आईपीस अधिकारियों के लिए एक सबक होना चाहिए. उन्होंने इस सम्बन्ध में संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट से हुई अपनी बातचीत का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह गुजरात के वरिष्ठ अधिकारी मुख्यमंत्री के इशारों पर यह सब कर रहे हैं.
संस्था के समन्वयक अभिमन्यु त्यागी ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे कि जो कुछ भी संजीव भट्ट कह रहे हैं वह पूर्णतया सत्य है. हम यह भी नहीं कह
रहे कि गुजरात दंगों के लिए मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही दोषी हैं. हम मात्र यह कह रहे हैं कि एक आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें दंगे में सहभागिता से ले कर पूर्व मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के आरोपियों को बचाना शामिल है. सामाजिक कार्यकर्ता तंसिर अहमद ने आरोप लगाया कि जिस तरह से लगातार संजीव भट्ट के ऊपर नरेन्द्र मोदी के खिलाफ एफिडेविट देने के बाद कार्रवाईयां हुई हैं, उन्हें और उनके परिवार को सुरक्षा नहीं दी गयी, उन्हें पहले सस्पेंड और फिर गिरफ्तार किया गया, अब उनके परिवार को उनसे नहीं मिलने दिया जा रहा है, ये सारी बातें इस ओर इशारा करती हैं कि यह पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित हैं और मुख्यमंत्री के आदेशों पर राज्य सत्ता की ताकत से हो रही हैं. मुनीश बेदी का कहना था कि हम संजीव भट्ट की नौकरी में उनके द्वारा पूर्व में किये गए कृत्यों-अकृत्यों पर भी कोई अंतिम राय नहीं व्यक्ति कर रहे. हम उनको किसी प्रकार का क्लीन चिट देने अथवा नरेन्द्र मोदी को दोषी ठहराने का काम नहीं कर रहे क्योंकि हम जानते हैं कि यह कार्य सिर्फ न्यायालय का होता है.
उज्जवल अरोरा ने मुख्यमंत्री तथा गुजरात शासन के इस कृत्य की निंदा की जबकि अंकित गुप्ता ने कहा कि हमारा यह विरोध प्रदर्शन राज्य शक्ति के गलत इस्तेमाल के विरोध में है. मुकेश यादव ने कहा कि हम इस कार्य को जनतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन तथा तानाशाही प्रवृत्ति का अधिरोपण मानते हैं. रोहित गुर्जर ने कहा कि यदि संजीव भट्ट मात्र अपनी सेवा नियमावली का बहाना ले कर चुप रह जाते तो भले ही वह अपनी सेवा का सीमित कर्तव्य निभा रहे होते पर देश और समाज के लिए अपने बड़े दायित्व से वंचित हो जाते. अन्य तमाम लोगों ने भी गुजरात सरकार के द्वारा संजीव भट्ट को मुख्यमंत्री के विरुद्ध खड़े होने के कारण उन्हें सताए जाने तथा उनके खिलाफ किये जा रहे दमनात्मक कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया.


