Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

ये दुनिया

लालू ने फंसाया, नीतीश ने फांसी तक पहुंचाया : आनंद मोहन

राबिन हुड, दबंग, अपराधी, शूटर, डान और अंत में गरीबों व मुजलिमों का मसीहा कहे जाने वाले बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया हत्या कांड मामले में सहरसा जेल में उम्र कैद की सजा काट करे हैं। उम्र कैद की ये सजा पटना हाई कोर्ट ने दे रखी है। इससे पहले निचली अदालत ने आनंद मोहन को इसी मामले में फांसी की सजा दी थी। 74 आंदोलन की उपज आनंद मोहन अपनी हरकतों के लिए हमेशा चर्चा में रहे हैं। बिहार विधान सभा से लेकर संसद तक उनकी हरकतों के गवाह रहे हैं। लालू प्रसाद को चुनौती देकर उन्होंने बिहार पीपुल्स पार्टी की स्थापना की और ढेरों सुर्खियां बटोरी थी, लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी धराशायी हो गई। फिर जदयू से जुड़े और सांसद भी बने। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के साथ राजनीति कर चुके आनंद मोहन की पहचान भले ही एक राबिन हुड की रही हो, लेकिन उनकी बेबाक राजनीतिक सोच के कायल आज भी बहुत सारे नेता हैं।

राबिन हुड, दबंग, अपराधी, शूटर, डान और अंत में गरीबों व मुजलिमों का मसीहा कहे जाने वाले बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया हत्या कांड मामले में सहरसा जेल में उम्र कैद की सजा काट करे हैं। उम्र कैद की ये सजा पटना हाई कोर्ट ने दे रखी है। इससे पहले निचली अदालत ने आनंद मोहन को इसी मामले में फांसी की सजा दी थी। 74 आंदोलन की उपज आनंद मोहन अपनी हरकतों के लिए हमेशा चर्चा में रहे हैं। बिहार विधान सभा से लेकर संसद तक उनकी हरकतों के गवाह रहे हैं। लालू प्रसाद को चुनौती देकर उन्होंने बिहार पीपुल्स पार्टी की स्थापना की और ढेरों सुर्खियां बटोरी थी, लेकिन चुनाव में उनकी पार्टी धराशायी हो गई। फिर जदयू से जुड़े और सांसद भी बने। लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के साथ राजनीति कर चुके आनंद मोहन की पहचान भले ही एक राबिन हुड की रही हो, लेकिन उनकी बेबाक राजनीतिक सोच के कायल आज भी बहुत सारे नेता हैं।

सहरसा जेल में रहकर आनंद मोहन आज भी न सिर्फ गरीब मजलुम कैदियों की कानूनी लड़ाई लड़कर उन्हें रिहा कराने में लगे हुए हैं बल्कि गांधी और बौद्ध दर्शन का व्‍यापक अध्ययन कर चार खंडों में अपनी जेल डायरी को सहेजने में भी लगे हुए हैं। दो खंडों में तैयार उनका काव्‍य संग्रह कैद में आजाद कलम और दो खंडों में तैयार काल कोठरी से उनकी जेल डायरी भारतीय समाज, राजनीति और दर्शन पर काफी कुछ कह रहा है। पिछले 29 सितंबर 2011 को एक मुकदमें में हाजिर होने सीतामढ़ी अदालत से लौटते वक्त आनंद मोहन से मुजफ्फरपुर ढोली के अशोक विहार होटल में तमाम राजनीतिक, सामाजिक मसलों पर बातचीत की। पेश है बातचीत के संपादित अंश…….

-राबिनहुड आनंद मोहन का समय जेल में कैसा कट रहा है?

— मैं जेल में क्या कर रहा हूं, इस पर चर्चा तो बाद में करेंगे पहले राबिन हुड पर मुझे आपत्ति है। ये राबिन हुड का नाम आप मीडिया वालों ने दे रखा है। मैंन कभी भी अपने को राबिन हुड कहलाने की बात नहीं की है। हालाकि मैं इसे स्वीकार भी करता हूं। देखिए कमजोरों, मुजलिमों, गरीबों और महिलाओं पर हो रहे जुल्म के खिलाफ आवाज उठाना और बंदूक उठाना गलत है तो मैं राबिन हुड हूं। तब तो अर्जुन, श्रीकृष्ण और हनुमानजी भी राबिन हुड हैं। मुझे विधायक रहते हुए बंदूक उठानी पड़ी थी। जब औरतों की इज्जत लूटी जा रही हो और पिछड़ों के साथ अन्याय किया जा रहा हो ता क्या उनकी रक्षा नहीं की जानी चाहिए?

-हां तो आपकी जेल यात्रा कैसी चल रही है?

–जेल तो जेल है। इस चाहरदीवारी के भीतर जो हम कर सकते हैं बखूबी कर रहे हैं। सुबह चार बजे हमें कमरे से बाहर किया जाता है। दैनिक क्रिया से निवृत होकर हम पढ़ाई में जुट जाते हैं। अखबार से लेकर कई महान लोगों की किताबों का अध्ययन हम कर रहे हैं और अपने अनुभव को भी लिख रहे हैं। फिर साढे़ आठ से साढे़ दस बजे तक हमारा जनता दरबार लगता है। बिहार सरकार तो कभी कभार जनता दरबार लगाती है, हमारा दरबार रोज चलता है। जेल के भीतर बंद गरीब और लाचार कैदियों की कहानी सुनते हैं और फिर अपने वकीलों के जरिए इनकी केस की पैरवी करते हैं। आपको बता दें कि अब तक हम सैकड़ों कैदियों को इन जेलों से कानून के जरिए बाहर निकालने में सफल हुए हैं। साधारण साधारण दफा में ये कैदी सालों से जेल में बंद हैं।

-अभी आप कह रहे थे कि जेल में आप महान लोगों की किताबे पढ़ रहे हैं और कुछ लिख भी रहे हैं?

–कुछ किताबें तो हाई लेवल की पढ़ रहा हूं। आचार्य नरेंद्रदेव का बौद्ध दर्शन 700 पन्नें की किताब है। इसके अलावा उनकी ही संस्कृति के चार अध्याय का गहन अध्ययन कर चुका हूं। अभी इस जेल की लाइब्रेरी में ही संपूर्ण क्रांति वांग्मय की सौ खंडों वाली किताब को पढ़ रहा हूं। इन किताबों के पढ़ने के बाद मैंने गांधी शीर्षक से एक रचना की है, जो मेरी जेल डायरी का एक हिस्सा है।

-आपने अभी तक कितनी रचनाएं की है?

–‘काल कोठरी से’ नाम से दो खंडों में मेरी जेल डायरी तैयार है। इसके अलावा दो खंडों में मेरा काव्‍य संग्रह तैयार है। इस संग्रह का नाम ‘कैद में आजाद कलम’ है। इसी काव्‍य  संग्रह का एक शीर्षक है धैर्य, जिसकी एक पंक्ति है- ‘हर क्षमाशील व्यक्ति में धैर्य छुपा है, जंग रूका जबतक कि धैर्य रूका है’। कई तरह के अनुभवों को अपने काव्‍य संग्रह में दर्ज करने की कोशिश की है। इसी तरह एक कविता है गुमनाम नहीं मरूंगा।

-आप पर हत्या करने का दोष है। आप अपने को दोषी मानते हैं या नहीं?

–हमें हत्या करने के मामले में जेल में बंद किया गया है। पहले फांसी की सजा दी गई फिर बाद में उम्र कैद की। मुकदमा अभी सुप्रीम कोर्ट में है। जनवरी में केस खुलना है। देश की न्यायिक व्‍यवस्था पर हमें भरोसा है और ईश्वर में आस्था। ईश्वर कहीं वाकई में हैं तो हमें न्याय मिलेगा। न्याय को अपना दामन बचाना है। ईश्वर की परीक्षा होनी है। हमारा कुछ नहीं होगा।

-फिर डीएम कृष्णैया की हत्या किसने की?

–यह हम नहीं जानते। जिस आदमी को हमने देखा तक नहीं उस आदमी की हत्या के आरोप में हम जेल में बंद हैं। डीएम के बाडी गार्ड और ड्राइवर ने अपने बयान में कहा है कि गोली नहीं चली थी। ईंट, पत्थर और रोड़ा से डीएम को मारा गया था। पटना हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन झा ने कहा है कि अगर सीएम भी इस मामले में गवाही देंगे तो यह नहीं माना जा सकता कि आनंदमोहन घटना स्थल पर थे और उन्होंने गोली चलवाई। फिर नीतीश कुमार ने भी धरना पर बैठ कर कहा था कि आनंदमोहन को फंसाया गया है। लेकिन हम जेल में हैं।

-लेकिन आपकी राजनीति तो अपराध से ही शुरू हुई थी?

–ये गलत सोच है। आप हमारे बैग्राउंड को देखें। मेरे दादा जी को इलाके में गांधी कहते थे लोग। हमारे घर पर महात्मा गांधी और राजेंद्र प्रसाद आते थे। दादा जी का अंतिम क्षण पांडिचेरी के अरबिंदों आश्रम में बीता था। 74 के आंदोलन के समय हम क्रांतिदूत अखबार के संपादक थे। कोसी इलाके का यह चर्चित अखबार था। बिहार का तीसरा जलियावाला बाग कांड के नाम से हमारी एक स्टोरी काफी चर्चित हुई थी। हां राजनीति में आने के बाद गरीबों की लड़ाई हमने लड़ी और बंदूक भी उठाए। लेकिन यह सब न्याय पाने के लिए था।

-थोड़ी बात राजनीति पर हो जाए। आप लालू और नीतीश दोनों के साथ काम कर चुके हैं। दोनों में क्या अंतर पाते हैं?

-हां हमने दोनों के साथ काम किया है। दोनों को जानते भी हैं और समझते भी हैं। सच कहूं तो एक ने हमें फंसाया और दूसरे ने जेल तक पहुंचाया है।

-लेकिन नीतीश जी तो सुशासन और न्याय की बात करते हैं?

–बिहार में सुशासन कैसा है यह बिहारवासी ही जानते हैं। जबतक जनता इस सरकार से आजिज नहीं हो जाती तबतक इनकी सरकार चल रही है और तभी तक इनका सुशासन का ढोंग चलेगा। लालू के राज से भी ज्यादा यहां भ्रष्टाचार और लूट है। अफसरशाही चरम पर है और अपराध भी। फिर नीतीश जी ने विकास का कौन सा काम किए है बताएं। नीतीश जी विकास नहीं रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं। कितनी नई सड़कें उन्होंने बनायी? कितनी फैक्‍टरियां बिहार में लगीं? कितने लोगों को रोजगार मिला है? देखिए जिन लोगों ने उन्हें चुना है वही जाने।

-लेकिन नीतीश जी अपराध की राजनीति को बंद करने का दावा भी कर रहे हैं?

–सभी दलों के इतिहास को पहले आप देख लें और यह भी देखें कि किस दल में कितने अपराध के आरोपी लोग सांसद, विधायक हैं। पहले इसे छापें। जिस दल में सबसे ज्यादा अपराधी हैं वह पवित्र बना हुआ है। जिसने कहा कि परिवारवाद नहीं चलने देंगे उसी ने सबसे ज्यादा परिवारवाद को पोसा है। वृष्ण पटेल, जगदीश शर्मा, मुन्ना शुक्ला के परिजनों को किसने टिकट दिया था।

-और भ्रष्टाचार के मामले में नीतीश जी को कहां पाते हैं?

–जिसके सरकार में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार है वह आदमी अन्ना के समर्थन में बयान दे रहा है । इससे ज्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता। चारा घेटाला में इनके उपर भी आरोप लगे हैं। इनके उपर भी 164 के तहत बयान है। मैनेज करके निकल गए।

-अन्ना के भ्रष्‍टाचार विरोधी और जनलोकपाल के लिए आंदोलन को आप किस रूप में देख रहे हैं?

–अन्ना पर कुछ कहूंगा। एक कविता है मेरी जिसकी पंक्ति है- ‘है सत्ता जब जब भी संत से टकराई। है तब तब सच जीता, सत्ता मुंह की खाई’। अन्ना इमानदार है और उनकी पहल को मैं नमन करता हूं। लेकिन उनकी टीम ईमानदार नहीं है। हालाकि अन्ना को पहले अनशन नहीं करना चाहिए। अनशन तो गांधीवाद का अंतिम अहिंसात्मक प्रयास है। इससे पहले अन्ना को और कुछ करना चाहिए था। लेकिन उनको मैं सलाम करता हूं। मेरी पहल पर सहरसा जेल में भी अन्ना के समर्थन में जेल के सारे स्टाफ अनशन पर बैठे थे। इसमें जेकर से लेकर कैदी तक और चपरासी से लेकर सिपाही तक शामिल थे।

-और रामदेव का आंदोलन?

–वह तो ढोंगी है। 11 साल पहले वह साइकिल पर चलता था अब 11 हजार करोड़ का मालिक है। उसके पास अपना प्लेन है, विदेश में एक आयलैंड है। फिर वह नैतिकता की बात कैसे करता है। वह भी अनशन करने दिल्ली पहुंच गया था। अनैतिक आदमी को गांधीवादी हथियार अनशन नहीं अपनाना चाहिए।

-नीतीश और नरेंद्र मोदी को आप पीएम का उम्मीदवार मानते हैं?

–यह सब आप लोगों का परसेपशन है। नीतीश तब प्रधानमंत्री बन सकते हैं जब उनकी पार्टी राष्‍ट्रीय हो जाएगी। वे तो बिहार में भी पूरा नहीं है। आधा बीजेपी है। वे झारखंड, यूपी में भी नहीं है। बिहार के बाहर कहीं नहीं है। फिर नीतीश खुद कहते हैं कि वे पीएम के रेस में नहीं है। और नरेंद्र मोदी को पीएम कौन बनायगा। उसका मुकाबला नीतीश से नहीं है आडवाणी से है। नागपुर को फैसला लेना है। गडकरी कुछ नहीं कर सकते हैं।

-आप वर्तमान में किस आदमी से प्रभावित हैं?

–कलाम और मनमोहन सिंह से। मनमोहन सिंह निजी तौर पर बेहद ईमानदार आदमी हैं और देश की सेवा भी कर रहे हैं। लेकिन उनकी टीम ठीक नहीं है। टीम अन्ना और टीम मनमोहन दोनों पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

-भविष्य की रणनीति?

–अभी तो अपनी किताबों को सजोने में लगे हैं। आगे क्या होगा अभी नहीं कहा जा सकता।

अखिलेश अखिल

वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश अखिल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के निवासी हैं. पटना-दिल्ली समेत कई जगहों पर कई मीडिया हाउसों के साथ कार्यरत रहे. इन दिनों हमवतन से जुड़े हुए हैं. उनका यह लेख हमवतन में प्रकाशित हो चुका है. मिशनरी पत्रकारिता के पक्षधर अखिलेश अखिल से संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...