: विकलांग युवक के दोनों हाथ कटे, परिवार भुखमरी के कगार पर : अलीगढ़। थाना गांधीपार्क क्षेत्रांतर्गत पला रेलवे फाटक पर लाइन पार करते समय एक विकलांग युवक के ट्रेन की चपेट में आकर दोनों हाथ कट गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को संदिग्ध बताते हुए गंभीरावस्था में युवक को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज भर्ती कराया। जहां 15 दिन के उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे घर भेज दिया। अब वह अपने बूढ़े माता-पिता के साथ रोजी-रोटी के लिए तरस रहा है, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने मां-बाप के बुढ़ापे का फायदा उठाकर बुरी तरह से उनको लूट लिया। उपचार में अंधाधुंध पैसा खर्च कराया जिसके कारण अब उसके रहने वाले घर की बिक्री भी होने जा रही है। अब पीड़ित परिवार की राजनैतिक दलों व जिले के आलाधिकारियों से आर्थिक सहायता के लिए गुहार है कि उनकी मदद के लिए आगे आएं।
जानकारी के अनुसार नौरंगाबाद क्षेत्र के माली वाली गली निकट जाहरवीर मंदिर डोरी नगर निवासी शिव सिंह पुत्र स्व. फूल सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके पुत्र का नाम सोनू उर्फ कमल सिंह उम्र 20 वर्ष जो अविवाहित है। वर्तमान में बुढ़ापे की लाठी बनकर शिव सिंह के काम आ रहा था। 22 सितंबर की शाम ड्यूटी करने अपने घर से पला साहिबाबाद गया था। लेकिन उस दिन वह खाना जल्दी-जल्दी में भूल गया, तो वह रात्रि में डिनर के समय 11.30 बजे लाइन क्रॉस कर अपने घर खाना खाने आया था। अचानक किसी अज्ञात व्यक्ति ने कमल को पीछे से धक्का दे दिया। जो कि आगे हाथ करके ट्रेन की पटरी पर गिया गया। जहां तीव्र गति से आ रही ट्रेन ने उसके दोनों हाथ काट दिए, जबकि पहले से ही कमल एक पैर से विकलांग है। बेबस सोनू उर्फ कमल वहीं पड़ा रहा। करीब 3 घंटे बाद पुलिस ने सोनू के परिजनों को घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही परिजन जे.एन. मेडिकल जा पहुंचे। जहां तिरस्कार की भावना से डॉक्टरों ने उसका उपचार करने से इनकार कर दिया। पीड़ित परिजनों की शिकायत पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर डॉक्टर उसका उपचार करने के लिए तैयार हुए और गरीब परिवार को बर्बादी की कगार पर पहुंचा दिया। सोनू के पिता का कहना है कि एक दिन के उपचार का खर्चा 800 से लेकर 2000 रूपए तक आया है। उनका कहना है कि सोनू की बेबस जिंदगी को सहारा देने के लिए उन्होंने अपने मकान को गिरवी रखकर उसका उपचार कराया है। अब मकान बेचने की बारी है। ऐसी मुसीबत में कोई भी राजनीतिक दल एवं सत्ताधारी जनप्रतिनिधि उनके काम नहीं आया है। ना ही उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता उपलब्ध कराई गई है। न तो जिला समाज कल्याण विभाग और ना ही रेलवे विभाग व मंडी समिति की ओर से कोई सहायता की है। अब किसके सहारे अपनी जिंदगी बिताएगा विकलांग। जिसके हाथ और पैर बेकार हो चुके हैं।
वृद्ध माता-पिता कब तक उसके पेट को पालेंगे। समाज सेवी संस्थाएं सो रही हैं और अंधा कानून जाग रहा है। किसी को इस गरीब परिवार की चिंता नहीं है। जो कि दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। वृद्ध सोनू के माता पिता अपने आप को देखकर आंसू बहा रहे हैं। कोई जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उनके परिवार को ढांढस बंधाने तक नहीं आया। क्या ऐसा है देश का संविधान? गरीब परिवार आज गरीब व इस कृत्य के होने पर भुखमरी व मकानविहीन होने की कगार पर पहुंच गया है। इस दुनिया में कोई नहीं है यह सोचकर सोनू के माता पिता रोते हैं। वृद्ध माता-पिता सोनू की हालत को देखकर किस तरह जीवित हैं यह तो शायद ऊपरवाला ही जानता है। सोनू के पिता का कहना है कि अगर उनके परिवार को कोई सरकारी सुविधा व आर्थिक मदद नहीं दिलाई गई तो उनका परिवार आत्महत्या करने के लिए विवश हो जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि विकलांग सोनू के लिए मकान व उसके जीविकोपार्जन के लिए दस लाख रुपए शासन से दिलाए जाएं और उसके लिए रोजी रोटी कमाने के साधन की व्यवस्था की जाए, जिससे कि बिना हाथ व पैर के एक विकलांग अपना जीवन यापन कर सके।
अलीगढ़ से राघव केसरी की रिपोर्ट.


