निज़ामाबाद। जनचेतना की यात्रा पर निकले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि मैं आशा करता हूँ कि सन 2012 की पहली जनवरी तेलंगानावासियों के लिए उनके सपने को हकीकत में बदलने वाली होगी. इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि यह तभी संभव है जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी सख्ती से निर्णय लेते हुए संसद के शीतकालीन सत्र में तेलंगाना सम्बन्धी आवश्यक विधेयक पेश करें.
श्री अडवाणी कल शाम ही अपनी यात्रा के दौरान निज़ामाबाद पहुंचे थे. बुधवार की सुबह वह पत्रकारों के साथ बात करते हुए श्री अडवाणी ने यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपने वायदों से पीछे हटती जा रही है, साथ ही क्षेत्र को समस्यों में धकेल रही है. उनका कहना था कि तेलंगाना राज्य के निर्माण के लिए राज्य विधानसभा में किसी प्रस्ताव की जरूरत नहीं है. संसद चाहे तो शीतकालीन सत्र में ही पृथक तेलंगाना राज्य का निर्माण कर सकती है. उन्होंने कहा कि मैं सुन रहा हूं कि इसके लिये पहले विधानसभा में प्रस्ताव रखने की जरुरत है. मैं आप लोगों के माध्यम से इस बात को साफ करना चाहता हूं कि भारतीय संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. श्री अडवाणी ने यह भी कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार दूसरी बार सत्ता में आने के बाद भी गत दो सालों से इस मुद्दे पर अनिर्णय की स्थिति में है. यही कारण है कि उनकी इस अनिर्णय की स्थिति से यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है.
श्री अडवाणी ने यह भी कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार के तत्कालीन गृहमंत्री ने पृथक राज्य की घोषणा भी कर दी थी, लेकिन पंद्रह दिनों के बाद ही अपने वायदे से पीछे भी हट गयी. यही कारण है कि आन्ध्र के इस हिस्से की स्थिति ऐसी है, जिस तरह का गत साठ साल में देखने को नहीं मिला है. एक प्रश्न के उत्तर में आडवाणी ने कहा कि कितने दुःख की बात है कि सरकार की ओर से निर्णय न लिए जाने के कारण युवक आत्म हत्या कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि झारखण्ड, उत्तराखंड एवं छत्तीसगढ़ के गठन के समय तो दो अविभाजित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक स्तर उनका विरोध किया था. उन्होंने आगे कहा कि तब हम ने निर्णय लिया कि केंद्र की राजग सरकार इन राज्यों का निर्माण करेगी. क्यों कि अनुच्छेद तीन के तहत पृथक राज्यों का निर्माण केंद्र सरकार संसद की जिम्मेदारी है. इस लिए मैं कहता हूं कि अलग राज्य के निर्माण के लिए विधान सभा में कोई प्रस्ताव पास करना जरुरी नहीं है. सरकार अपनी इच्छाशक्ति से संसद में मुख्य विपक्षी दलों विशेष कर भारतीय जनता पार्टी की मदद से शीतकालीन सत्र में पृथक तेलंगाना राज्य के निर्माण का विधेयक पारित करवा सकती है.
इस प्रश्न पर कि बीजेपी गैर तेलंगाना क्षेत्रों की जनता की भावनाओं की अनदेखी क्यों कर रही है. इस पर आडवाणी का कहना था कि वे सयुंक्त आन्ध्र प्रदेश के पक्षधर लोगों की भावनाओं का भी सम्मान करते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से छोटे राज्यों की समर्थक है.
उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ तक मेरे दल का सवाल है तो हम मानते हैं कि पृथक तेलंगाना राज्य की मांग उचित है. लेकिन उन्होंने जोर देते हुए यह भी कहा कि दोनों क्षेत्रों के बीच बैर नहीं होना चाहिए. मैं गृहमंत्री था तब मुझे तीनों राज्यों के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ करनी पड़ी थी, तब तीनों राज्यों का निर्माण बिना किसी शोर-शराबे के ही हो गया था. श्री आडवाणी ने कल लखनऊ में अरविन्द केजरीवाल पर चप्पल फेंकने की घटना की निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है. जब श्री आडवाणी से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह यात्रा आडवाणी या भाजपा से जुडी नहीं है यह देश की स्थिति को लेकर है. इस लिए मैं कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता.
लेखक प्रदीप श्रीवास्तव निजामाबाद से प्रकाशित हिन्दी दैनिक स्वतंत्र वार्ता के स्थानीय संपादक हैं.


