: कुशवाहा को पार्टी में शामिल करने के कारण बागी हुए योगी, संघ ने भाजपा को पिलाई घुट्टी : नई दिल्ली : एनआरएचएम घोटाले के आरोपी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल करने के बाद बीजेपी की फजीहत का सिलसिला थमता नज़र नहीं आ रहा है। जहां इससे एक तरफ पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम की हवा निकलती दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के कई नेताओं के अलावा सहयोगी भी नाराज हो गए हैं। संघ (आरएसएस) ने भी इस मामले में भाजपा को घुट्टी पिलाई है।
मुखपत्र ‘पांचजन्य’ के संपादकीय में संघ ने कहा है कि सभी राजनीतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और वरिष्ठ नेता भैयाजी जोशी ने इस सिलसिले में नितिन गडकरी से भी बात की। मुखपत्र पांचजन्य के एक लेख में लोगों से अपील की गई है कि वो भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को न चुने। लेख में कहा गया है कि देश की राजनीति में आज साफ छवि के नेताओं की भारी कमी है और इसे दूर करने के लिए लोगों को काफी सोच समझ कर अपना वोट देना होगा। यह भी लिखा गया है कि जिस तरह से बीजेपी सांसदों ने अपने पास काला पैसा ना होने का हलफ़नामा दिया है वैसा ही हलफ़नामा विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी भरें।
बिहार के मुख्यमंत्री और जेडी(यू) नेता नीतीश कुमार ने भी कुशवाहा को बीजेपी में शामिल किए जाने पर अपनी सहयोगी पार्टी पर निशाना साधा है। नीतीश ने कहा कि बाबू सिंह को बीजेपी में लिया जाना उनकी समझ से परे है। नीतीश ने इस बाबत कहा, ‘बीजेपी ने एक गलत परंपरा की शुरुआत की है। लगता है कि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर असंतोष है।’ नीतीश ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के साथ चुनावी तालमेल न होने पर कहा कि हर राज्य में बीजेपी के साथ गठबंधन की जरूरी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार करेंगे।
कुशवाहा के मामले में पार्टी में असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के नेता अब मुखर होकर कुशवाहा का विरोध कर रहे हैं। कुशवाहा को लेकर बीजेपी के भीतर केंद्रीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक असंतोष बढ़ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी रथयात्रा निकालने वाले पार्टी के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस मुद्दे पर अंदरखाने नाराजगी जाहिर की है। गोरखपुर से पार्टी के सांसद योगी आदित्यनाथ ने कुशवाहा को बीजेपी में शामिल किए जाने पर कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि पार्टी में अपराधियों, बलात्कारियों और भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कुशवाहा को पार्टी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए था।
उत्तर प्रदेश में भी कई नेता इस फैसले से नाखुश हैं। लेकिन ऐसे नेताओं को अपनी नाखुशी जाहिर करना भारी पड़ रहा है। बीजेपी की उत्तर प्रदेश ईकाई की कार्यकारिणी के सदस्य आईपी सिंह ने भी आडवाणी की तर्ज पर कुशवाहा का विरोध किया। आईपी सिंह ने बुधवार को बाबू सिंह कुशवाहा को हटाए जाने और शाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही को यह नागवार गुजरा। उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। पार्टी के महासचिव नरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने आईपी सिंह को नोटिस देकर 15 दिनों में जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि नितिन गडकरी ने ही कुशवाहा को पार्टी में शामिल किया है। गौरतलब है कि इस फैसले पर बीजेपी में दो खेमे बन गए हैं। एक खेमा कुशवाहा और बादशाह सिंह को लाने को ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के तहत सही फैसला मान रहा है, वहीं दूसरा खेमा इसे पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम की धार कुंद करने वाला मान रहा है।


