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सहारा इंडिया ने टीम इंडिया के प्रायोजन से नाता तोड़ा

मुंबई। विश्‍व की सबसे अमीर क्रिकेट संस्‍था बीबीसीआई को झटका लगा है। सहारा इंडिया ने भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन और आईपीएल में पुणे वारियर्स टीम से अपना नाता तोड़ लिया है। शनिवार को आईपीएल-5 के लिए नीलामी से ठीक पहले सहारा इंडिया ने बीसीसीआई को यह करारा झटका दिया। कहा जा रहा है कि सहारा इंडिया बीबीसीआई के रवैये से नाराज था। हैरान कर देने वाले फैसले के तहत भारतीय क्रिकेट टीम के लंबे समय से चले आ रहे प्रायोजक सहारा इंडिया ने शनिवार को बीसीसीआई के साथ वित्तीय संबंध तोड़ लिए तथा आईपीएल में खिलाड़ियों की नीलामी से चंद घंटे पहले पुणे वारियर्स टीम का मालिकाना हक भी छोड़ दिया।

मुंबई। विश्‍व की सबसे अमीर क्रिकेट संस्‍था बीबीसीआई को झटका लगा है। सहारा इंडिया ने भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजन और आईपीएल में पुणे वारियर्स टीम से अपना नाता तोड़ लिया है। शनिवार को आईपीएल-5 के लिए नीलामी से ठीक पहले सहारा इंडिया ने बीसीसीआई को यह करारा झटका दिया। कहा जा रहा है कि सहारा इंडिया बीबीसीआई के रवैये से नाराज था। हैरान कर देने वाले फैसले के तहत भारतीय क्रिकेट टीम के लंबे समय से चले आ रहे प्रायोजक सहारा इंडिया ने शनिवार को बीसीसीआई के साथ वित्तीय संबंध तोड़ लिए तथा आईपीएल में खिलाड़ियों की नीलामी से चंद घंटे पहले पुणे वारियर्स टीम का मालिकाना हक भी छोड़ दिया।

सहारा ने अपने बयान में कहा कि हम बीसीसीआई के अधीन आने वाले सभी तरह के क्रिकेट से हट रहे हैं। सहारा ने बीसीसीआई से आग्रह किया कि वह पुणे वारियर्स टीम को तुरंत किसी अन्य इच्छुक पक्ष को सौंप दे। बीसीसीआई के साथ सहारा इंडिया का करार वर्ष 2013 तक के लिए था। पिछले ग्यारह सालों से सहारा इंडिया भारतीय टीम के प्रायोजक के तौर पर जुड़ी हुई थी। सहारा इंडिया जुलाई 2010 में बीसीसीआई के साथ तीन साल का नया करार किया था, जो 31 दिसम्‍बर 2013 को पूरा होना था। नई शर्तों के अनुसार बीसीसीआई को प्रत्येक टेस्ट, वनडे और 20- 20 अंतरराष्ट्रीय के लिए तीन करोड़ 34 लाख रुपये का भुगतान कर रहा था।

सहारा इंडिया ने एक जारी बयान में कहा कि प्रायोजक के रूप में 11 बरस की यात्रा के बाद हम निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि क्रिकेट काफी अमीर बन गया है और कई अमीर लोग मजबूत इच्छा के साथ क्रिकेट का समर्थन करने के लिए मौजूद हैं। इसलिए हम पूरी मानसिक शांति के साथ बीसीसीआई के अधीन आने वाले क्रिकेट से हट रहे हैं और ऐसा हम भारी मन के साथ कर रहे हैं। इस प्रायोजन को शुरू करना हमारा भावनात्‍मक फैसला था लेकिन हमारी भावनाओं को सराहना नहीं मिली और कई मौकों पर हमारे आग्रह पर विचार करने की बजाय नजरअंदाज किया गया। उसके कई निवेदनों को बीबीसीआई ने स्‍वीकार नहीं किए।

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