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…और तोता खामोश हो गया

: तीन दिन चले रवीन्द्र रचना महोत्सव का समापन : रवीन्द्र रचना महोत्सव में तोता और पत्नी का पत्र कहानी का मंचन : जयपुर : राजा तब भी अफसरों के चश्मे से देखते थे, अब भी देखते हैं। भांजे तब भी माल बनाते थे अब भी बनाते हैं। और तोता तब भी खामोश हो जाता था, अब भी हो जाता है। यह व्यवस्था ही ऐसी है, यह राजतंत्र या लोकतंत्र नहीं देखती। यहां ऐसा ही होता आया है। रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी तोता के वाचन के बाद बुद्धिजीवियों के बीच हुए संवाद में कुछ इसी तरह की बातें निकल कर आई। पीएमटी की ओर से जवाहर कला केन्द्र के कृष्णायन सभागार में हुए टैगोर कथा पाठ में पहले तोता और फिर पत्नी का पत्र कहानी का वाचन हुआ। सुनील शर्मा ने प्रभावी ढंग से तोता का वाचन किया। डॉ. ऊर्वशी और सुषमा राजीव ने पत्नी का पत्र कहानी का भावपूर्ण वाचन किया। सुनने वालों को लग ही नहीं रहा था कि कहानी सुन रहे हैं, बल्कि ऐसा लग रहा था मंझली बहू और बिंदू के पात्र उनके सामने रवीन्द्रथान टैगोर के माध्यम से साकार हो अपना दर्द बयां कर रहे हों। कथा सत्र के संयोजक मोहन क्षोत्रीय ने दोनों कहानियों के साथ आज की समसामयिकता को बयां किया। उन्होंने कहा कि स्त्री ही स्त्री की शत्रु है, यह जुमला भी पुरुष समाज का गढ़ा गया है, ताकि अपना बचाव हो सके। समारोह की अध्यक्षता कर रही लेखिका मृदुला बिहारी हजारों सालों से स्त्री आदर्श लेकर जन्मती है, हां बस उसकी बुद्धि को समाज स्वीकार नहीं करना चाहता। यह टैगोर जैसी शख्सियत ही थी जिन्होंने स्त्री के इस विद्रोह को समाज के सामने लाकर रखा।

: तीन दिन चले रवीन्द्र रचना महोत्सव का समापन : रवीन्द्र रचना महोत्सव में तोता और पत्नी का पत्र कहानी का मंचन : जयपुर : राजा तब भी अफसरों के चश्मे से देखते थे, अब भी देखते हैं। भांजे तब भी माल बनाते थे अब भी बनाते हैं। और तोता तब भी खामोश हो जाता था, अब भी हो जाता है। यह व्यवस्था ही ऐसी है, यह राजतंत्र या लोकतंत्र नहीं देखती। यहां ऐसा ही होता आया है। रवीन्द्र नाथ टैगोर की कहानी तोता के वाचन के बाद बुद्धिजीवियों के बीच हुए संवाद में कुछ इसी तरह की बातें निकल कर आई। पीएमटी की ओर से जवाहर कला केन्द्र के कृष्णायन सभागार में हुए टैगोर कथा पाठ में पहले तोता और फिर पत्नी का पत्र कहानी का वाचन हुआ। सुनील शर्मा ने प्रभावी ढंग से तोता का वाचन किया। डॉ. ऊर्वशी और सुषमा राजीव ने पत्नी का पत्र कहानी का भावपूर्ण वाचन किया। सुनने वालों को लग ही नहीं रहा था कि कहानी सुन रहे हैं, बल्कि ऐसा लग रहा था मंझली बहू और बिंदू के पात्र उनके सामने रवीन्द्रथान टैगोर के माध्यम से साकार हो अपना दर्द बयां कर रहे हों। कथा सत्र के संयोजक मोहन क्षोत्रीय ने दोनों कहानियों के साथ आज की समसामयिकता को बयां किया। उन्होंने कहा कि स्त्री ही स्त्री की शत्रु है, यह जुमला भी पुरुष समाज का गढ़ा गया है, ताकि अपना बचाव हो सके। समारोह की अध्यक्षता कर रही लेखिका मृदुला बिहारी हजारों सालों से स्त्री आदर्श लेकर जन्मती है, हां बस उसकी बुद्धि को समाज स्वीकार नहीं करना चाहता। यह टैगोर जैसी शख्सियत ही थी जिन्होंने स्त्री के इस विद्रोह को समाज के सामने लाकर रखा।

रवीन्द्र रचना महोत्सव का समापन रवीन्द्र नाथ टैगोर के दो काव्य नाटकों के मंचन के साथ हुआ। प्रख्यात नाट्य निर्देशक अशोक राही के निर्र्देशन में कच देवयानी और गांधारीर आवेदन का जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में मंचन हुआ। कच देवयानी में पौराणिक कहानी पर टैगोर की परिकल्पना साकार हुई। दैत्य गुरु शुक्राचार्य की बेटी देवयानी को प्यार हो जाता है बृहस्पति के पुत्र कच से। वो शुक्राचार्य से एक ऐसी अनूठी विद्या सीखने आया है जिससे मरे हुए को जीवित कर दिया जाता है। कच से ईष्या करने वाले दानव बार-बार उसका वध कर देते और देवयानी पिता की विद्या से उसे जीवित करा देती है। मृत संजीवनी विद्या सीख कच जाने लगता है लेकिन देवयानी उसे रोकती है। न रुकने पर वो कच को श्राप दे देती है कि यह विद्या तुम भूल जाओगे। श्राप पाकर भी कच अपने प्यार का अनादर नहीं करता। वो जाता-जाता देवयानी को वरदान देता है कि तुम मुझे भूल जाओगी और जीवन भर सुखी रहोगी….नाटक में विनीता नायर ने देवयानी और सूफीयान खान ने कच की भूमिका अदा की।

गांधारीर आवेदन महाभारत काल की कहानी है। इसमें टैगोर ने दुर्योधन धृतराष्ट्र व गांधारी का संवाद दिखाया है। पिता और माता पांडवों को छल से जुए में हराने से आहत हैं। दुर्योधन के अपने तर्क हैं। वो अभिमान में चूर है। जब गांधारी पापी पुत्र को दंड देने की बात करती है तो धृतराष्ट्र कहते हैं कि जिसने धर्म का उल्लंघन किया है उसको तो दंडित भी धर्म ही करेगा, मैं तो सिर्फ एक बाप हूं। नाटक का समापन गांधारी के युद्धिष्टर को दिए आशीर्वाद से होता है जिसमें वो उसे फिर से राज सत्ता पाने का वरदान देती है। पीएमटी के सचिव सुनील शर्मा ने जानकारी दी कि तीन दिन के शब्द, राग और रंग वाले रवीन्द्र रचना महोत्सव में देशभर से सौ से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। चारुलता नृत्य नाटिका, टैगोर की कविताओं का वाचन, कहानी वाचन और टैगोर के काव्य नाटकों का मंचन गुलाबी नगर के नाट्य प्रेमियों के बीच किया गया।

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