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एनआरएचएम घोटाले में फंस सकती है देवरिया के तीन पूर्व सीएमओ की गर्दन

देवरिया। विधान सभा के चुनाव की गहमा-गहमी के बीच एनआरएचएम घोटाले में लिप्त जिले में तैनात रहे तीन पूर्व सीएमओ का गला सीबीआई फांस सकती है। सीबीआई की जांच में इनके कार्यकाल के दौरान की गई अनियमितता और मनमाने तरीके से किए गए भुगतान का मामला पकड़ में आया है। एनआरएचएम में की गई धांधली व धन के बंदरबांट का मामला धीरे-धीरे उजागर होने लगा है। अपनी गर्दन फंसते देख कई डिप्टी सीएमओ एवं बाबुओं ने सीबीआई के सामने सरकारी गवाह बनने की पेशकश कर रखी है। जानकारी के अनुसारर सीबीआई की जांच और उसकी ओर से कई बार प्रोफार्मा पर मांगी गई सूचनाओं के आंकलन तथा बिल वाउचर की पड़ताल से घोटाले सामने आते जा रहे हैं। इसमें किस सीएमओ के कार्यकाल के दौरान किन-किन योजनाओं में मनमाने तरीके से भुगतान किये गए हैं यह भी पकड़ में आ रहा है।

देवरिया। विधान सभा के चुनाव की गहमा-गहमी के बीच एनआरएचएम घोटाले में लिप्त जिले में तैनात रहे तीन पूर्व सीएमओ का गला सीबीआई फांस सकती है। सीबीआई की जांच में इनके कार्यकाल के दौरान की गई अनियमितता और मनमाने तरीके से किए गए भुगतान का मामला पकड़ में आया है। एनआरएचएम में की गई धांधली व धन के बंदरबांट का मामला धीरे-धीरे उजागर होने लगा है। अपनी गर्दन फंसते देख कई डिप्टी सीएमओ एवं बाबुओं ने सीबीआई के सामने सरकारी गवाह बनने की पेशकश कर रखी है। जानकारी के अनुसारर सीबीआई की जांच और उसकी ओर से कई बार प्रोफार्मा पर मांगी गई सूचनाओं के आंकलन तथा बिल वाउचर की पड़ताल से घोटाले सामने आते जा रहे हैं। इसमें किस सीएमओ के कार्यकाल के दौरान किन-किन योजनाओं में मनमाने तरीके से भुगतान किये गए हैं यह भी पकड़ में आ रहा है।

बताया जाता है कि बीते पांच वर्षों में तीन ऐसे सीएमओ का नाम सामने आया है जिनके द्वारा नियमों को ताक पर रखकर एनआरएचएम के धन की लूट की गई। सूत्रों के अनुसार वाहन चलाने से लेकर नियमित टीकाकरण के भुगतान में जमकर मनमानी की गई है। कई ब्लाकों में आशाओं, एएनएम और मोबेलाइजर को भुगतान ही नहीं किया गया है। संविदा पर तैनाती और भुगतान करने में भी कमियां पकड़ में आई हैं। सीबीआई घोटाले में शामिल रहे अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सबूत जुटाने में लगी है। वह बार-बार पांच वर्षों में मिले धन और खर्च का ब्यौरा मांग रही है। कहा जाता है कि कई बाबू और डिप्टी सीएमओ भी अपनी गर्दन नपती देख सरकारी गवाह बनने की पेशकश सीबीआई के सामने कर चुके हैं।

एडी कार्यालय में बनाया अस्थायी ठिकाना : सीबीआई ने जांच में तेजी लाने के लिए गोरखपुर के एक होटल में अपना डेरा डाल दिया है। टीम ने एडी कार्यालय में अस्थायी कार्यालय बना लिया है। जहां जिलों से सूचनाएं मंगाकर उनका अध्ययन कर रही है।

देवरिया से ओपी श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.

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