अनुसंधानकर्ताओं का कहा है कि गूगल वालेट को हैक किया जा सकता है। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि नेट और फोन पर दी जाने वाली सेवाओं की सुरक्षा के बारे में कंपनियां चाहे कितने की दावे करें लेकिन इन्हें सौ फीसदी सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। उपभोक्ताओं को इनका इस्तेमाल करते समय हमेशा सतर्कता बरतने की जरूरत है। यह बात सही है कि दुनिया में नेट और फोन ने लोगों के निजी जीवन में इस हद तक पहुंच बना ली है कि लोग ज्यादा से ज्यादा काम नेट और फोन से करना चाहते हैं। अब उपभोक्ता अपने बिलों का भुगतान करने के लिए फोन पर उपलब्ध एप्लीकेशंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं कि फोन से भुगतान जैसी सुविधा पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है।
हाल ही में हुए एक शोध से पता चला है कि गूगल इंक मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म, गूगल वालेट पर उपलब्ध पेमेंट की सुविधा पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है और इसमें छेड़छाड़ की जा सकती है। गूगल को यह एप्लीकेशन स्प्रिंट नेक्सटेल कॉर्प ने बेची थी। ज्वेलो कंपनी में सीनियर इंजीनियर जोसहुआ रुबिन ने एक शोधके जरिए बताया है कि गूगल वालेट में सेंध लगाई जा सकती है। गूगल की यह सेवा जापान और दूसरे कुछ देशों में काफी इस्तेमाल की जाती है।हालांकि कुछ दूसरी कंपनियां भी इस तरह की सेवाएं देने की बात कर रही हैं लेकिन इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है। अमेरिका में वेरिजोन वायरलेस, एटी एंड टी इंक और टी- मोबाइल ने अपने सयुंक्त उपक्रम आइसिस के जरिएइस तरह की सेवा देने की बात कही है लेकिन इन कंपनियों ने अभी तक इस सेवा की लांचिंग तारीख तक घोषित नहीं की है। बरहाल रुबिन ने एक ऐसी एप्लीकेशन विकसित की है जो गूगल की इस सेवा के लिए जरूरी चार अंकों के पिन नंबर को हैक कर सकती है।
उन्होंने अपने ब्लॉग पर एक वीडियो भी डाला है जिसमें यह बताया गया है कि उनके द्वारा विकसित एप्लीकेशन किस तरह के काम करती है? जोसहुआ रुबिन ने कहा है कि उन्होंने अपने शोध के बारे में गूगल को सूचित कर दिया है और गूगल का कहना है कि वह गूगल वालेट की इस कमी को दूर करने के लिए काम कर रहा है और जल्दी ही इसे दूर कर लिया जाएगा। उधर गूगल के प्रवक्ता जय नेनक्रोव ने एक ई-मेल के जरिए जारी बयान में कहा है कि हम इस समस्या को खत्म करने के लिए काम कर रहे हैं और हम इस मुद्दे के बारे में अध्ययन के साथ ही इन आरोपों की की भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ज्वेलो ने भी अपने फोन में कुछ इसी तरह की समस्या के लिए अध्ययन किया था लेकिन वे उसे दूर करने में सफल नहीं पाए। जहां तक गूगल की बात है तो वह अपनी डिवाइस की रूटिंग सेवा को सुरक्षा प्रदान करेगा।उन्होंने लोगों से रुटिड पर इस सेवा को डाउनलोड न करने की भी सलाह दी। नेनक्रोव ने कहा कि लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा के लिए अपने फोन में स्क्रीन लॉक सेटअप करना चाहिए। इससे उन्हें ज्यादा सुरक्षा मिलेगी।
इस मामले पर प्रतिक्रिया देने के लिए स्प्रिंट का कोई प्रतिनिधि उपलब्ध नहीं हो सका। गूगल की इस सेवा में सिटीग्रुप इंक और पेमेंट नेटवर्क मास्टरकार्ड भी साझीदार हैं। उधर सिटीग्रुप इंक की प्रवक्ता एमिली कोलिंस ने अपने बयान में कहा है कि किसी भी सिटी कार्ड होल्डर की कोई सूचना गूगल वालेट में स्टोर नहीं की जाती है। कार्डहोल्डरों द्वारा अनधिकृत लेन-देन के लिए गूगल वालेट उत्तरदायी नहीं है। एक सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर स्पेशलिस्ट जिम्मी शाह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को देखा है और इस सेवा में सेंध लगाना इतना आसान नहीं है हालांकि तकनीकी रूप से ऐसा करना संभव है लेकिन वह तब ही हो सकता है कि जब हैकर किसी उपभोक्ता का फोन चुराने में सफल हो जाए। अगर इस काम को करने में सक्षम हैकर गूगल वालेट सेवा का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता का फोन चुराने में सफल हो जाता है तो वह इस काम को अंजाम दे सकता है। शाह ने कहा कि इस काम को करना आसान तो नहीं है साथ ही इसमें समय भी लगता है।
अगर हैकर किसी उपभोक्ता का फोन चुराने में सफल भी हो जाता है तो पहले इस सेवा को क्रेक करने वाली एप्लीकेशन डाउनलोड करनी होगी उसके बाद कुछ दूसरी एप्लीकेशन डाउनलोड करनी होती तभी वह फोन के सिक्योरिटी सिस्टम को देखने में सफल होगा और सिक्योरिटी सिस्टम में घुसपैठ करने के बाद ही हैकर चार अंकों के पिन नंबर को जान पाएगा। इस नंबर को जानने के बाद हैकर इसका इस्तेमाल कर सकता है। शाह का कहना है कि सिद्धांत रूप में यह संभव तो है लेकिन इतना आसान नहीं है कि इसे कोई भी अंजाम दे सके। हालांकि विशेषज्ञ इस बात को कह रहे हैं कि गूगल वालेट को हैक करना इतना आसान नहीं है लेकिन यह बात भी सच है कि वे इस बात को भी नहीं नकार रहे हैं कि इसे हैक नहीं किया जा सकता है।
गूगल ने कहा है कि वह इस दिशा में काम कर रहा है और जल्दी ही इस कमी को दूर कर लिया जाएगा लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि जब तक गूगल लोगों को गूगल वाले की सुरक्षा के मामले में पूरी तरह से आश्वस्त नहीं करता है तब तक इस सेवा का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं के मन में संशय बना रहेगा। इस मामले से यह बात भी पुष्ट होती है कि नेट और फोन पर दी जाने वाली सेवाओं की सुरक्षा के बारे में कंपनियां चाहे कितने की दावे करे लेकिन इन्हें सौ फीसदी सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। (एजेंसी)


