जगदलपुर। एक तरफ प्राणदायिनी इन्द्रावती नदी के दम तोडऩे का दुख हर बस्तरवासी के चेहरों पर झलक रहा है वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर शासन प्रशासन चित्रकोट महोत्सव की तैयारियों में व्यस्त है। मंत्री से लेकर चपरासी और सेनापति से लेकर सिपाही तक को इस महोत्सव में अपनी-अपनी जिम्ममेदारियों का निर्वहन करना है। कई दिनों तक खूब रौनक रहेगी चित्रकोट में। इन्द्रावती में जैसे-जैसे पानी कम होता जायेगा वैसे-वैसे चित्रकोट महोत्सव की रंगत बढ़ती जायेगी। गाने बजाने के कई कार्यक्रमों में बड़े-बड़े फनकार शिरकत करेंगे, लेकिन यह जश्न बिल्कुल उसी तरह अमर्यादित और अशिष्ट लगेगा जैसे बगल के मकान में कोई मातम हो और खुद के मकान में किसी उत्सव की धूम मची हो।
लेकिन यह उत्सव नहीं महोत्सव है, जैसे यह महोत्सव चित्रकोट के खूबसूरत नज़ारे की खत्म होती खूबसूरती का जश्न हो। जो हाल सूख चुकी इन्द्रावती नदी का हो चुका है उसे देख कर यही लगता है कि कुछ सालों बाद ना यह खूबसूरत जलप्रपात होगा और ना ही इसके इर्दगिर्द नाचते गाते महोत्सव मनाते लोग होंगे। फिर उस वक्त एक सूखी और पथरीली खाई के अलावा कुछ और बाकी नहीं होगा। एक वीराने में बने पर्यटन मंडल के विश्रामगृहों को देखकर सवाल किये जायेंगे कि ऐसी नीरस जगह पर इतने आलीशान विश्राम गृह बनाने की बेवकूफी किसने की।

भले ही यह सब अतिश्योकित लगे, लेकिन उड़ीसा के कालाहांडी से निकलकर जोरा नाला में दम तोड़ चुकी इन्द्रावती का चित्रकोट की खूबसूरती से गहरा ताल्लुक है। बदकिस्मिती यह कि जोरा नाला में हुए इन्द्रावती के अपहरण की सुध लेने वाला कोई नहीं है। शहर के मुठ्ठी भर लोग इन्द्रावती को बचाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं पर इनकी हालत भी इन्द्रावती से ज्यादा अच्छी नहीं है। कोई नहीं जो इनकी बात सुने इनका दुख दर्द दूर करे। पूरा शहर बीमार इन्द्रावती नदी की तरह अशुद्ध पेयजल से होने वाली बीमारियां झेल रहा है। इन्द्रावती में आये अवरोध की वजह से शहर का जलस्तर बड़ी तेजी से गिरता जा रहा है। इन्द्रावती नदी के दोनों तरफ कई नेताओं के विधान सभा क्षेत्र हैं, लेकिन नेताओं की सक्रियता चुनाव के पहले नज़र आने वाली नहीं है।
जितनी मशक्कत और जितना खर्च इस महोत्सव पर हर वर्ष किया जा रहा है उतने में इन्द्रावती को एक नया जीवनदान जरूर मिल सकता है। राजनीतिक स्वार्थों के लिये या फिर व्यक्तिगत लाभों के लिये नेता सीमा के बाहर जाकर भी दु:स्साहस करने से नहीं चूकते, लेकिन इस गैरराजनीतिक मसले को प्रदेश की सीमा के अन्दर ही सुलझा लेने के सुझावों पर गौर करने किसी के पास ना ही समय है और ना ही रूचि। चुनावों के नजदीक आते ही विधान सभा के कई उम्मीदवार फोटो सेशन के लिये जोरा नाला के इर्द-गिर्द नज़र आने लगेंगे, लेकिन फिलहाल ठहरे हुए और दूषित जल को पीकर बीमार होते लोगों की फिक्र किसी को नहीं है। सब कहते है कि यह महोत्सव मिनरल वाटर पीने वालों का महोत्सव है क्योंकि इन्द्रावती के जिंदा रहने या ना रहने का इनकी सेहत पर कोई असर नहीं होगा। बहरहाल इन्द्रावती के दोनों तरफ रहने वाले हजारों लोग दम तोड़ती इस नदी के दुखों को साथ लिये इस जश्न में शरीक होंगे या नहीं यह एक संजीदा सवाल है, लेकिन इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है।
लेखक देवशरण तिवारी बस्तर में देशबंधु अखबार के ब्यूरोचीफ हैं.


