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अब बिहार में छिड़ेगा गंगा और और गंगा पार की लड़ाई

उत्तर बिहार-19 जिले-21 सांसद और 140 विधायकों वाला बिहार का यह मैदानी भाग आजादी के 64 साल बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। छह माह बाढ़ में बिलबिलाना और बाकी के छह माह बाढ़ में बर्बाद हो चुके अपने घर-द्वार को ठीक करने को पंजाब से लेकर दिल्ली और देश के अन्य इलाकों में भटकना, यही इस इलाके के लोगों की तकदीर है। आजादी के 64 सालों में लगभग 40 साल कांग्रेस की सरकार बिहार में रही, लेकिन उत्तर बिहार बाढ़ और बेकारी के श्राप से नहीं निकल सका। 15 साल लालू जी बिहार को अपनी ‘स्टाइल’ में हांकते रहे और अब 7 साल से नीतीश जी बिहार की अलग पहचान बनाने में तो जुटे हैं, लेकिन उत्तर बिहार पर उनकी नजर भी नहीं है।

उत्तर बिहार-19 जिले-21 सांसद और 140 विधायकों वाला बिहार का यह मैदानी भाग आजादी के 64 साल बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। छह माह बाढ़ में बिलबिलाना और बाकी के छह माह बाढ़ में बर्बाद हो चुके अपने घर-द्वार को ठीक करने को पंजाब से लेकर दिल्ली और देश के अन्य इलाकों में भटकना, यही इस इलाके के लोगों की तकदीर है। आजादी के 64 सालों में लगभग 40 साल कांग्रेस की सरकार बिहार में रही, लेकिन उत्तर बिहार बाढ़ और बेकारी के श्राप से नहीं निकल सका। 15 साल लालू जी बिहार को अपनी ‘स्टाइल’ में हांकते रहे और अब 7 साल से नीतीश जी बिहार की अलग पहचान बनाने में तो जुटे हैं, लेकिन उत्तर बिहार पर उनकी नजर भी नहीं है।

कृषि आधारित उत्तर बिहार की अर्थव्यवस्था बाढ़ से तो चौपट है ही, उद्योग और रोजगार के अन्य साधनों के बंद हो जाने की वजह से उत्तर बिहार की दशा सोमालिया से कम नहीं है। हर पांच साल पर चुनाव होते हैं, लोग चुने जाते हैं और सरकार बनती है, लेकिन उत्तर बिहार नहीं बन सका है। हालांकि अब इस इलाके के लोगों में राजनीतिक चेतना जाग रही है। संभव है आने वाले समय में यह मुद्दा नीतीश सरकार के लिए समस्या न बन जाए। बीमारू प्रदेश की सूची में दर्ज बिहार को विकसित करने में जुटे बिहार के मुखिया नीतीश कुमार के विकासजनित क्रिया-कलापों की चर्चा बिहार से ज्यादा देश के दूसरे भागों में हो रही है। कई राज्यों के लोग नीतीश के बिहार की ग्रोथ दर देखकर अचंभित हैं। दूसरे प्रदेश के लोग, नेता और सामाजिक राजनीतिक चिंतक भी कहते फिर रहे हैं कि नीतीश कुमार ने लालू द्वारा शापित बिहार को जिस तरह से पटरी पर लाने का काम किया है, वह अद्भुत है। इसमें सच्चाई भी है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि नीतीश आधुनिक राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी भी हैं। जात जमात, अगड़े-पिछड़े और दलित मुसलमानों को कैसे अपने फांस में रखना है, नीतीश जी को इसका खूब ज्ञान है।

अभी उत्तर प्रदेश में हो रहे चुनाव में भी नीतीश एक रोल मॉडल के रूप में उभरते नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में जदयू भी चुनाव मैदान है और उनके पार्टी के लोग कहते फिर रहे हैं कि अगर जदयू की जीत हुई, तो उत्तर प्रदेश को बिहार जैसा बना दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश चुनाव में जदयू क्या कुछ करेगा, कहना उचित नहीं है, लेकिन इतना तय है कि नीतीश जी के विकास के विरोध में ही अब विरोध के सुर उभरने लगे हैं। विरोध के यह सुर किसी विपक्ष की तरफ से नहीं हैं, बल्कि उन्हीं की पार्टी के लोग और नेता कहने लगे हैं कि नीतीश के सात साल के शासन में बिहार को सड़कें तो मिलीं, इसके अलावा कोई भी ऐसा काम नहीं हुआ है, जिसे ताल ठोंककर बताया जा सके। इसके अलावा विकास के पैमाने पर उत्तर बिहार में विकास का पहिया नहीं घूमने की वजह से बिहार के नेता, सांसद नीतीश सरकार के खिलाफ लामबंद होने की तैयारी में हैं। उत्तर बिहार के विकास को लेकर बिहार सरकार में शामिल जदयू और भाजपा के नेताओं के मूड को देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि बिहार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और संभव है कि उत्तर बिहार को लेकर बनने जा रहा उत्तर बिहार मोर्चा सरकार के गले की हड्डी न बन जाए। मोर्चा को अमलीजामा पहना रहे जैविक खेती अभियान के संयोजक क्रांति प्रकाश कहते हैं, ‘हम भले ही थिंक ग्लोबली कर रहे हों, लेकिन हमें एक्ट तो लोकली ही करना है। हम हालांकि समग्र बिहार के विकास की बात कर रहे हैं, लेकिन बिहार में सबसे ज्यादा खराब हालात उत्तर बिहार के हैं।

उत्तर बिहार में 19 जिले आते हैं और यहीं से 140 विधायक और करीब 21 सांसद चुने जाते हैं, लेकिन लालू यादव के समय से लेकर आज तक इस इलाके को कुछ नहीं मिला। लगभग एक करोड़ की आबादी वाला यह इलाका आजादी तक धनी इलाकों में शामिल था, लेकिन उसके बाद यहां के तमाम उद्योग धंधे, कारोबार, खेती बारी और रोजगार के तमाम साधन समाप्त कर दिए गए।

इधर, तीन दशकों में गांव वीरान हो गए हैं। रोजगार के लिए लोगों का पलायन जारी है, हर साल बाढ़ की वजह से हम अपनी बची-खुची संपत्ति भी खोते जा रहे हैं। इन सालों में न तो यहां कोई नए स्कूल कॉलेज और विश्वविद्यालय खोले गए, न ही मेडिकल कॉलेज खुले और न ही इंजीनियरिंग कॉलेज। आप किसी भी गांव में चले जाएं, वहां 50 युवक भी देखने को नहीं मिलेंगे। छठ, दिवाली और ईद के मौके पर ही कुछ लोग इकट्ठे होते हैं। दिल्ली के एम्स में सबसे ज्यादा भीड़ उत्तर बिहार के लोगों की ही होती है। ऐसे में उत्तर बिहार के लिए सोचने की जरूरत है। यह मोर्चा राजनीति करने के लिए नहीं, सामाजिक और आर्थिक विकास करने के लिए होगा।’

मुजफ्फरपुर के सांसद कैप्टन जय नारायण निषाद उत्तर बिहार को लेकर ज्यादा परेशान हैं। कहते हैं, ‘जब बिजली ही नहीं हैं, तो विकास की सारी बातें बेमानी हो जाती हैं। मुजफ्फरपुर के सारे उद्योग बंद हो गए हैं। सरकार को पहले इन्हें चालू कराना चाहिए। इससे रोजगार तो बढ़ेगा ही, उत्पादन भी बढे़गा। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। बात करने से विकास नहीं होगा। किसानों की हालत अभी भी खराब है। सिंचाई की सुविधा है नहीं। बाढ़ से उत्तर बिहार तबाह रहता है, उसका कोई निदान हुआ नहीं। आखिर हम करना क्या चाह रहे हैं?’

सारे विकास गंगा पार : उत्तर बिहार की दुर्दशा पर सीवान के निर्दलीय सांसद ओमप्रकाश यादव भी काफी गंभीर हैं। शहाबुद्दीन को हराकर संसद में पहुंचे ओमप्रकाश यादव कहते हैं, ‘नीतीश जी ने कुछ बेहतर काम तो किया है कि राज्य में सड़कें दिखाई पड़ने लगी हैं, लेकिन सबसे बड़ी बात तो खेती, उद्योग और शिक्षा को बढ़ावा देने की है। यह काम अभी तक नहीं हो पाया है। सात साल की सरकार हो गई, लेकिन उत्तर बिहार में कोई कल-कारखाना नहीं आया है। जो सालों से बंद थे, वे भी अभी तक नहीं खुल सके हैं। नीतीश जी की मार्केटिंग टीम अच्छी है कि बिना बिजली ही सूबे में विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। कांग्रेस के शासन में सीवान में सूत फैक्ट्री लगी, अब बंदी के कगार पर है। अभी तक जो भी विकास के काम हुए हैं, जो प्रोजेक्ट लगे हैं, वह गंगा पार ही हुए हैं।

उ. बिहार का नंबर भी आएगा : मुख्यमंत्री केवल अपने इलाके का विकास कर रहे हैं, इसके अलावा बाकी नेताओं की आवाज भी वे सुनना पसंद नहीं करते। यह बात और है कि गोपालगंज के सांसद पूर्णमासी राम नीतीश जी के साथ खड़े हैं। राम साहब का गोपालगंज भले ही तमाम परेशानियों से जूझ रहा है, लेकिन राम साहब नीतीश के विकास की प्रशंसा करते नहीं थकते। नेता जी कहते हैं कि आजादी के बाद उत्तर बिहार का विकास कम हुआ है, लेकिन अब होगा। कई चीनी मिलें खुलेंगी और नए कॉलेज, अस्पताल भी खुलेंगे। लेकिन कब खुलेंगे, कहना मुश्किल है। नीतीश जी विकास में लगे हुए हैं।

सच यहां आकर देखिए : बिहार में महाराजगंज के सांसद हैं उमाशंकर सिंह। लालू प्रसाद के चार सांसदों में से एक हैं। इलाके में लोकप्रिय हैं और दबंग भी। नेता जी नीतीश के विकास की बात को मीडिया प्रबंधन से ज्यादा कुछ मानने को तैयार नहीं हैं। उनकी नजर में विकास की कोरी बातें मीडिया कर रही है। वह भी पैसे लेकर। नेता जी गुस्से में कहने लगे कि प्रदेश में 34 शूगर मिलें बंद हैं और एक भी चिमनी से धुआं नहीं निकल रहा है, लेकिन मीडिया कह रही है कि बिहार में विकास हो रहा है। दिल्ली में बैठे लोगों को सब कुछ हरा-हरा दिखाई पड़ रहा है। जब उद्योग धंधे हैं ही नहीं, तो विकास कैसे हो रहा है? इस सरकार ने तो उत्तर बिहार और दक्षिण बिहार सब को पीछे कर दिया है। मुखिया जी शिक्षक बहाल कर रहे हैं। अब आप ही बताओ कि गुरुजी कैसे होंगे? प्रदेश में 500 से ज्यादा कॉलेज वित्त रहित हैं। फिर शिक्षा में सुधार कैसे होगा? इस सरकार में रिजल्ट पहले ही निकल जाता है और परीक्षा बाद में हो रही है। अफसर लोग बेलगाम हैं।

सड़कों के सिवा कुछ नहीं बना : झंझारपुर के सांसद मंगनी लाल मंडल सरकार की नीति से बेहद खफा हैं। मंडल जदयू से सांसद चुने गए हैं। बाद में पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से मंडल साहब को पार्टी से चलता कर दिया गया है। मंडल साहब प्रदेश के वरिष्ठ नेता हैं और लालू राज में भी मंत्री की कुर्सी संभालते रहे हैं। मंगनी लाल मंडल कहते हैं, ‘जबसे नीतीश सरकार है, तब से सड़कें तो खूब बनी हैं, लेकिन विकास के लिए जो और बातें होती हैं, अभी तक दिखाई नहीं पड़तीं। उत्तर बिहार में शिक्षा के कोई भी नए संस्थान नहीं खुले हैं। जो संस्थान पहले से हैं, उनकी हालत अब काफी खराब हो चुकी है।

लेखक अखिलेश अखिल वरिष्‍ठ पत्रकार हैं तथा राष्‍ट्रीय साप्‍ताहिक हमवतन से जुड़े हुए हैं. उनका यह लेख हमवतन से साभार लेकर यहां प्रकाशित किया जा रहा है.

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