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बगैर बजट वाले समारोहों पर लगेगी लगाम, सूचना आयुक्‍त ने 25 हजार का जुर्माना ठोंका

देहरादून। आर.टी.आई. मिशन उत्तराखण्ड द्वारा दाखिल सूचना-अधिकार के तहत एक अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा द्वारा की गई प्रभावी कार्रवाई से वर्षों से चले आ रहे एक ऐसे गोरखधन्धे पर लगाम लग सकती है जो मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में घटित होता है। वर्षों से निर्माण कार्यों, विकास कार्यों में शिलान्यास व लोकार्पण/उद्घाटन समारोह की एक अनिवार्य परम्परा चली आ रही है, जिसमें जनप्रतिनिधियों को खुश करने की खातिर विभाग व कार्यदायी संस्थाओं द्वारा शिलान्यास व लोकार्पण के भव्य समारोह आयोजित किये जाते हैं। विकास कार्यों से जुड़े जिम्मेदार सूत्र बताते हैं कि किसी भी भवन का इस्टीमेट बनाते समय उसमें शिलान्यास एवं लोकार्पण के लिये पृथक से कोई बजट आवंटित नहीं किया जाता है परन्तु जनप्रतिनिधियों, सत्तासीन राजनेताओं को इच्छा यही रहती है कि ऐसे अवसर पर भव्य समारोह हो, जिसमें वे अपनी उपलब्धियों का बखान कर सकें। राजनेताओं की इसी इच्छा को हरेक विभाग एवं कार्यदायी संस्था बगैर कोई आनाकानी किये पूरा करते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि यदि भव्य समारोह आयोजित नहीं किया गया तो जनप्रतिनिधि महोदय नाराज हो जायेंगे। जाहिर है कि विभाग से लेकर कार्यदायी संस्थाओं में इतनी हिम्मत नहीं होती है कि वे जनप्रतिनिधियों को नाराज करने का जोखिम उठा सकें।

देहरादून। आर.टी.आई. मिशन उत्तराखण्ड द्वारा दाखिल सूचना-अधिकार के तहत एक अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा द्वारा की गई प्रभावी कार्रवाई से वर्षों से चले आ रहे एक ऐसे गोरखधन्धे पर लगाम लग सकती है जो मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में घटित होता है। वर्षों से निर्माण कार्यों, विकास कार्यों में शिलान्यास व लोकार्पण/उद्घाटन समारोह की एक अनिवार्य परम्परा चली आ रही है, जिसमें जनप्रतिनिधियों को खुश करने की खातिर विभाग व कार्यदायी संस्थाओं द्वारा शिलान्यास व लोकार्पण के भव्य समारोह आयोजित किये जाते हैं। विकास कार्यों से जुड़े जिम्मेदार सूत्र बताते हैं कि किसी भी भवन का इस्टीमेट बनाते समय उसमें शिलान्यास एवं लोकार्पण के लिये पृथक से कोई बजट आवंटित नहीं किया जाता है परन्तु जनप्रतिनिधियों, सत्तासीन राजनेताओं को इच्छा यही रहती है कि ऐसे अवसर पर भव्य समारोह हो, जिसमें वे अपनी उपलब्धियों का बखान कर सकें। राजनेताओं की इसी इच्छा को हरेक विभाग एवं कार्यदायी संस्था बगैर कोई आनाकानी किये पूरा करते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि यदि भव्य समारोह आयोजित नहीं किया गया तो जनप्रतिनिधि महोदय नाराज हो जायेंगे। जाहिर है कि विभाग से लेकर कार्यदायी संस्थाओं में इतनी हिम्मत नहीं होती है कि वे जनप्रतिनिधियों को नाराज करने का जोखिम उठा सकें।

ऐसा ही एक मामला आर.टी.आई. मिशन उत्तराखण्ड द्वारा सूचना-अधिकार के एक आवेदन से उजागर हुआ। 20 करोड़ से अधिक लागत से सहस्त्रधारा मार्ग पर ग्राम डांडा लखौड़ में स्वास्थ्य महानिदेशालय का विशाल नया भवन बनाया गया है, जिसका कार्य उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम, देहरादून द्वारा किया गया है। ज्ञातव्य है कि मई 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा महानिदेशालय के नवीन भवन का भव्य समारोह में लोकार्पण किया गया था, जिसको भव्यतम बनाने में आयोजकों ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। परन्तु सूचना-अधिकार के आवेदन में स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस लोकार्पण समारोह में विभाग द्वारा कोई भी खर्च नहीं किया गया। प्रथम विभागीय अपील में भी जब कोई सूचना नहीं मिली तो मामला उत्तराखण्ड सूचना आयोग में पहुंचा।

आयोग में यह मामला अपील संख्या ए(डी)-6477/2011 पर पंजीकृत हुआ। आयोग में सुनवाई की पहली तिथि पर इस मामले को राज्य सूचना आयुक्त अनिल शर्मा ने बेहद गंभीर प्रकृति का माना। आयोग में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेश अधिशासी अभियन्ता ए.के. नेगी ने बताया कि कार्यदायी संस्था उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम ने लिखित रूप से बताया है कि उनके द्वारा केवल तीन पत्थरों पर 25 हजार रूपया खर्च किया गया। परन्तु पण्डाल, माइक, फूलमाला, वीडियोग्राफी से लेकर स्वल्पाहार तक में हुए लाखों रुपयों का व्यय किसके द्वारा किया गया इस बात की कोई जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिशासी अभियन्ता नहीं दे सके। इस पर आयोग ने महानिदेशक स्वास्थ्य को आयोग में तलब कर स्वास्थ्य विभाग को 25 हजार जुर्माना का नोटिस जारी किया। सुनवाई की नियत तिथि 14 फरवरी 2011 को महानिदेशक डा. जे.पी. भट्ट आयोग के समक्ष पेश हुए। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पूरी व्यवस्था उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम द्वारा की गई थी। इस पर आयुक्त श्री अनिल शर्मा ने राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबन्धक को पक्षकार बनाते हुए 25 हजार जुर्माना व प्रतिकूल प्रविष्टि देने का नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश जारी किया।

सूचना आयुक्त श्री अनिल शर्मा ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह व्यापक जनहित का विषय है। लोकार्पण/उद्घाटन समारोह में व्यय का भार किसके द्वारा उठाया गया। व्यय किस मद से किया गया इसका खुलासा होकर बेहद आवश्यक है। आयोग ने पूरे मामले में विस्त्रत जांच के लिये महानिदेशक डा. जे.पी.भट्ट को जांच अधिकारी बनाते हुए निर्देशित किया कि सुनवाई की अगली तिथि 10 अप्रैल 2012 को आयोग के सामने विस्त्रत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आयोग ने उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम के अलावा उद्घाटन समारोह के दौरान महानिदेशक पद पर आसीन डा. आशा माथुर को भी पक्षकार बनाते हुए आयोग में तलब किया है। इस मामले पर आयोग की सख्ती से इस गोरखधन्धे पर लगाम लगने की उम्मीद की जा रही है क्योंकि अभी तक जारी परम्परा के अनुसार विभाग व कार्यदायी संस्थायें जनप्रतिनिधियों को खुश करने की खातिर बगैर बजट के भी अपने स्तर पर भव्य शिलान्यास व लोकार्पण समारोही आयोजित करते रहे हैं।

लेखक सुरेन्द्र अग्रवाल आरटीआई कार्यकर्ता तथा उत्‍तराखंड में आरटीआई मिशन के प्रदेश अध्‍यक्ष हैं.

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