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मौत की आधी-अधूरी और गलत खबर छाप दी

रायगढ़। रायगढ़ जिले में इन दिनों कुछ पेशेवर पत्रकारों द्वारा छोटी-छोटी घटनाओं को बड़ी-बड़ी बनाकर न केवल पाठकों को दिगभ्रमित किया जा रहा है बल्कि अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिये वे घटनाओं को उल्टा बताते हुए उसे छापने से भी नहीं कतरा रहे हैं। शहर में एक प्रमुख स्थान से इस प्रकार के समाचार बनाए जाते हैं और पूरे जिले में ईमेल के जरिये भेजकर इसे छपवाने में कामयाब भी हो जाते हैं। मजे की बात यह है कि इन पेशेवर पत्रकारों द्वारा जारी समाचारों को कुछ समाचार पत्र बिना कोई हेडिंग बदले और बिना कांट-छांट किए प्रकाशित करते हैं और बाद में वे बताते हैं कि समाचार ईमेल के जरिये आया था, इसलिये हमने उसकी जानकारी लेना आवश्यक नहीं समझा।

रायगढ़। रायगढ़ जिले में इन दिनों कुछ पेशेवर पत्रकारों द्वारा छोटी-छोटी घटनाओं को बड़ी-बड़ी बनाकर न केवल पाठकों को दिगभ्रमित किया जा रहा है बल्कि अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिये वे घटनाओं को उल्टा बताते हुए उसे छापने से भी नहीं कतरा रहे हैं। शहर में एक प्रमुख स्थान से इस प्रकार के समाचार बनाए जाते हैं और पूरे जिले में ईमेल के जरिये भेजकर इसे छपवाने में कामयाब भी हो जाते हैं। मजे की बात यह है कि इन पेशेवर पत्रकारों द्वारा जारी समाचारों को कुछ समाचार पत्र बिना कोई हेडिंग बदले और बिना कांट-छांट किए प्रकाशित करते हैं और बाद में वे बताते हैं कि समाचार ईमेल के जरिये आया था, इसलिये हमने उसकी जानकारी लेना आवश्यक नहीं समझा।

इसका एक ताजा उदाहरण रायगढ़ के एक आरटीओ एजेंट काकू घई की मौत का मामला है, जो काकू घई की स्वाभाविक मौत को आत्महत्या एवं संदिग्ध मौत बताते हुए उलूल-जुलूल समाचार प्रकाशित कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में सत्यता यह है कि जिस मृतक काकू घई का नाम गाड़ी चोरी करने के मामले में सेंट्रल जेल रायपुर में निरूद्ध होना बता कर एक कांग्रेसी नेता को निशाना बनाते हुए पूरे माहौल को खराब किया जा रहा है, जबकि उसमें सच्चाई यह है कि दिनांक 24 सितंबर 2011 को क्राईम ब्रांच रायपुर की टीम ने काकू घई को धारा 420, 467, 468 के तहत निरूद्ध किया था और इन धाराओं में कहीं भी काकू घई के उपर गाड़ी चोरी की धारा नहीं लगाई गई थी। चूंकि मामला कागजातों को फर्जी रूप देकर गुमराह करने का था, इसलिये क्राइम ब्रांच ने इस पूरे केश में जांच करते हुए धोखाधड़ी एवं अन्य धारा लगाकर काकू घई को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। पर पेशेवर पत्रकार काकू घई के मौत के बाद उनका नाम गाड़ी चोरी से जोड़ने के साथ-साथ उसकी मौत को रहस्यमय मौत, तो कभी आत्महत्या का नाम देकर समाचार प्रकाशित कर रहे हैं।

इतना नहीं (सहारा समय के मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़) के रायगढ़ संवाददाता विनय पाण्डेय ने बकायदा काकू घई की मौत को फांसी लगा कर आत्महत्या संबंधी समाचार प्रसारित करवा दिया और बकायदा इस मामले को गाड़ी चोरी से जोड़ते हुए काकू घई को आरोपी तक बता दिया। महाशय संवाददाता ने अपनी पत्रकारिता को तार-तार करते हुए लाइव फोनों भी चैनल में चला दिया, जबकि यह मामला पुलिस ने अभी तक आत्महत्या का नहीं बताया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है। ऐसे में एक आरटीओ एजेंट की मौत पर अपनी पत्रकारिता को दागदार करने वाले पत्रकारों को शर्म आनी चाहिए कि जब मामला न तो आत्महत्या का है और न ही काकू घई गाड़ी चोरी के मामले में कभी पकड़ा गया था, तो फिर किस आधार पर इस प्रकार के घटिया समाचार प्रकाशित करके प्रेस संबंधी कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ऐसे लोगों पर तत्काल कड़ी से कड़ी कार्रवाई करके इस तरह की पत्रकारिता करने वाले इन पत्रकारों के उपर कानून संबंधी धाराएं लगाकर रोक लगाई जानी चाहिए।

प्रेस कौसिंल ऑफ इंडिया और भड़ास4मीडिया के माध्यम से मैं यह चाहता हूं कि रायगढ में इस प्रकार की पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों का चेहरा बेनकाब हो सके और साथ ही साथ मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ प्रसारित होने वाले सहारा समय के संवाददाता विनय पाण्डेय को तत्काल उसके पद से हटा कर उनके प्रमुखों को यह उदाहरण देना चाहिए कि इस प्रकार के झूठे व तथ्‍यहीन समाचार प्रसारित करके वाले पाठकों को गुमराह न करे।

राजेश चौहान

रायगढ़

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