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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में होगा पीएम का शक्ति परीक्षण

नई दिल्‍ली : चार साल बाद होने जा रहे जेएनयू छात्र संघ के चुनाव में इस बार अस्मिता आधारित राजनीति का एक नया रंग दिख रहा है। ऑल इंडिया बैकवर्ड स्‍टूडेंट फोरम (एआईबीएसएफ) ने जेएनयू में मुसलमान छात्रों के संगठन कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ गंठबंधन में अपना उम्‍मीदवार उतारा है। ये छात्र संगठन लालू प्रसाद और मुलायम सिंह यादव के एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण की तर्ज पर ‘पीएम’ (पिछडा व मुसलमान) के नारे तहत चुनाव मैदान में उतरे हैं। जेएनयू छात्र संघ पर अब तक काबिज रहे लाल रंग को फीका करने की इस कोशिश से एक आरे आईसा और एसएफआई जैसे कम्‍युनिस्‍ट संगठनों में, तो दूसरी ओर सवर्ण हिंदू जातियों की राजनीति करने वाले संगठन यूथ फार इक्विलिटी में नाराजगी है।   नामांकन के समय इस मुददे पर एआईबीएसएफ और आईसा के पदाधिकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई।

नई दिल्‍ली : चार साल बाद होने जा रहे जेएनयू छात्र संघ के चुनाव में इस बार अस्मिता आधारित राजनीति का एक नया रंग दिख रहा है। ऑल इंडिया बैकवर्ड स्‍टूडेंट फोरम (एआईबीएसएफ) ने जेएनयू में मुसलमान छात्रों के संगठन कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ गंठबंधन में अपना उम्‍मीदवार उतारा है। ये छात्र संगठन लालू प्रसाद और मुलायम सिंह यादव के एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण की तर्ज पर ‘पीएम’ (पिछडा व मुसलमान) के नारे तहत चुनाव मैदान में उतरे हैं। जेएनयू छात्र संघ पर अब तक काबिज रहे लाल रंग को फीका करने की इस कोशिश से एक आरे आईसा और एसएफआई जैसे कम्‍युनिस्‍ट संगठनों में, तो दूसरी ओर सवर्ण हिंदू जातियों की राजनीति करने वाले संगठन यूथ फार इक्विलिटी में नाराजगी है।   नामांकन के समय इस मुददे पर एआईबीएसएफ और आईसा के पदाधिकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई।

कम्‍युनिस्‍ट संगठनों का कहना है कि जेएनयू में जाति आधारित राजनीति का कोई इतिहास नहीं रहा है। ऑल इंडिया बैकवर्ड स्‍टूडेंस फोरम और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया जैसे संगठन जाति का इस्‍तेमाल कम्‍युनिस्‍ट ताकतों को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं। दूसरी ओर, बैकवर्ड स्‍टूडेंट फोरम और कैंपस फ्रंट ऑ‍फ इंडिया के पदाधिकारियों का कहना है कि कम्‍युनिस्‍ट संगठन कैंपस में वर्षों से ए‍लीट हिंदुओं की राजनीति करते रहे हैं। यही कारण है कि कैंपस में आज तक ओबीसी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इन संगठनों ने हमेशा सवर्ण हिंदुओं के हितों की रक्षा की है और यूथ फॉर इक्विलिटी जैसे संगठनों को कैंपस में पैर जमाने के लिए जगह दी है।

ऑल इंडिया स्‍टूडेट फोरम से अध्‍यक्ष पद के उम्‍मीदवार जितेंद्र यादव और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के उपाध्‍यक्ष पद के उम्‍मीदवार मोहममद उबैदुर रहमान ने यहां जारी एक प्रेस बयान में कहा कि हमारी कोशिशों के कारण ही पिछले साल जेएनयू और दिल्‍ली यूनिवर्सिटी में नामांकनों में ओबीसी कोटा लागू हो सका है। आरक्षण ठीक ढंग से लागू होने के कारण पिछले वर्ष जेएनयू में प्रवेश करने वाले छात्रों में 60 फीसदी से अधिक ओबीसी, एससी, एसटी व अल्‍पसंख्‍यक हैं। मुसलमान और ओबीसी छात्र के एकजुट हो कर अपने हकों की लडाई लडेंगे। इन संगठनों ने कैंपस मे ज्‍योतिबा फूले की आदमकद मूर्ति लगाने तथा सावित्री बाई फूले के नाम पर ओबीसी छात्रों के लिए स्‍कॉलरशिप शुरू करने की मांग की है। इसके अलावा से संगठन हॉस्‍टल के आवंटन में अनुसूचित जाति और जनजाति के समांतर ओबीसी और अल्‍पसंख्‍यक विद्यार्थियों को प्राथमिकता देने की मांग की है।

जेएनयू के एक छात्र द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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