मंडी सर्किट पर आए मुख्य सूचना आयुक्त भीम सेन ने आरटीआई की अपील की सुनवाई करते हुए एक मामले में अधूरी व देरी से दी गई सूचना का संज्ञान लेते हुए तहसीलदार सदर को 15 हजार रुपए का जुर्माना ठोंका। यह मामला एक वृद्ध व विधवा औरत काला देवी बल्ह क्षेत्र के गांव नौरू मांडल, भंगरोटू से जुड़ा हुआ है। काला देवी ने 26 नवंबर 2010 को आवेदन किया था और यह जानना चाहा था कि भूमि खरीदने के बारे में परमिशन ली गई थी या नहीं और भूमि के तबादले के बारे में भी सूचना मांगी थी। उसके बाद जनसूचना अधिकारी तहसीलदार सदर श्री गोकुल चंद ने 25 मार्च 2011 को सूचना दी वह अधूरी दी। इसको लेकर काला देवी ने जिलाधीश मंडी के पास प्रथम अपील की गई, लेकिन प्रार्थी को यहां भी संपूर्ण न्याय नहीं मिला और अंत में काला देवी ने सूचना आयुक्त के पास अपील दायर की।
अत: 23 फरवरी को सूचना आयुक्त ने मामले की सुनवाई करते हुए तहसीलदार कार्यालय को दोषी माना और फैसले में यह कहा गया कि तात्कालिक तहसीलदार गोकुल चंद को 5000 रुपए, सुप्रीडेंट इंदिरा भारद्वाज (सेवा निवृत) और कानून गो तहसील सदर को 5000-5000 रुपए जुर्माना किया। गौरतलब है कि यह मामला भ्रष्टाचार का है कि कैसे राजस्व कर्मचारी मिली भगत से हेरा-फेरी करते हैं और सरकार को चूना लगाते हैं। इस मामले में एक पटवारी बंसी लाल ने बिना विभागीय अनुमति से एक बेकार जमीन खरीदी और फिर मिली भगत से और बिना अनुमति से उसका तबादला दूसरे माहौल में कर दिया, जो जमीन अच्छी और बड़ी महंगी थी। जिसकी चजह से सरकार को लाखों रुपए का चुना लग चुका है। इस बाबत उपायुक्त मंडी को शिकायत की जा चुकी है। इस पटवारी के खिलाफ आरोप पत्र दायर हो चुका है। इस सारे मामले की शिकायत सचिव राजस्व को दी जा चुकी है। श्रीमती काला देवी ने इस लंबी लड़ाई को लड़ा और इस लड़ाई में आरटीआई ब्यूरो ने इन्हें समय-समय पर अपने सहायता व सलाह देते रहे।
मंडी से लवन ठाकुर की रिपोर्ट.


