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एनआरएचएम घोटाले में फंस सकते हैं कई सीएमओ और डिप्‍टी सीएमओ

: कई बाबुओं ने रखी सरकारी गवाह बनने की पेशकश : देवरिया। एनआरएचएम घोटाले में बाहुबली ठेकेदार गुडडू खां के सीबीआई के शिकंजे में आने से कई डिप्टी सीएमओ सहित पूर्व तीन पूर्व सीएमओ का गला देवरिया में फंस सकता है। इसी डर की वजह से डा. वाईके सिलोईयो, जो यहां पूर्व में सीएमओ थे, बीते एक हफ्ते से लगातार चुपके से रात में आते हैं और बाबुओं से घण्टों वार्ता कर फिर गुपचुप तरीके से गोरखपुर निकल जाते हैं। जिन बाबुओं से मिलते हैं उनकी हालत सांप छुछुदंर वाली हो गई है। इसी तरह से डिप्टी सीएमओ एवं कई पीएचसी एवं सीएचसी के प्रभारी डा. डीबी शाही की हालत भी खराब बताई जा रही है। बताया जाता है कि रामपुर कारखाना में जब वे प्रभारी थे तो वहां पर सम्बधित बाबुओं के बिना हस्ताक्षर के ही लाखों रुपयों का भुगतान करा लिया गया था। एक बाबू ने तो डा. शाही के खिलाफ सीबीआई के अधिकारियों को बयान भी दे दिया है।

: कई बाबुओं ने रखी सरकारी गवाह बनने की पेशकश : देवरिया। एनआरएचएम घोटाले में बाहुबली ठेकेदार गुडडू खां के सीबीआई के शिकंजे में आने से कई डिप्टी सीएमओ सहित पूर्व तीन पूर्व सीएमओ का गला देवरिया में फंस सकता है। इसी डर की वजह से डा. वाईके सिलोईयो, जो यहां पूर्व में सीएमओ थे, बीते एक हफ्ते से लगातार चुपके से रात में आते हैं और बाबुओं से घण्टों वार्ता कर फिर गुपचुप तरीके से गोरखपुर निकल जाते हैं। जिन बाबुओं से मिलते हैं उनकी हालत सांप छुछुदंर वाली हो गई है। इसी तरह से डिप्टी सीएमओ एवं कई पीएचसी एवं सीएचसी के प्रभारी डा. डीबी शाही की हालत भी खराब बताई जा रही है। बताया जाता है कि रामपुर कारखाना में जब वे प्रभारी थे तो वहां पर सम्बधित बाबुओं के बिना हस्ताक्षर के ही लाखों रुपयों का भुगतान करा लिया गया था। एक बाबू ने तो डा. शाही के खिलाफ सीबीआई के अधिकारियों को बयान भी दे दिया है।

बताया जा रहा है कि सीबीआई की जांच में अनियमितता और मनमाने तरीके से किए गए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का मामला पकड़ में आया है। एनआरएचएम में की गई धांधली व धन के बंदरबांट का मामला धीरे-धीरे उजागर होने लगा है। कहा जा रहा है कि अपनी गर्दन फंसते देख कई डिप्टी सीएमओ एवं बाबुओं ने सीबीआई के सामने सरकारी गवाह बनने की पेशकश कर रखी है। जानकारी के अनुसार सीबीआई की जांच और उसकी ओर से कई बार प्रोफार्मा पर मांगी गई सूचनाओं के आंकलन तथा बिल वाउचर की पड़ताल से घोटाले सामने आते जा रहे हैं। इसमें किस सीएमओ के कार्यकाल के दौरान किन-किन योजनाओं में मनमाने तरीके से भुगतान किये गए हैं यह भी पकड़ में आ गया है।

कहा जाता है कि बीते पांच वर्षों में तीन ऐसे सीएमओ का नाम सामने आया है, जिनके द्वारा नियमों को ताक पर रखकर एनआरएचएम के करोड़ों रुपये के धन की लूट की गई। सूत्रों के अनुसार वाहन चलाने से लेकर नियमित टीकाकरण के भुगतान में जमकर मनमानी की गई है। कई ब्लाकों में आशाओं, एएनएम और मोबेलाइजर को भुगतान ही नहीं किया गया है। संविदा पर तैनाती और भुगतान करने में भी कमियां पकड़ में आई हैं। सीबीआई घोटाले में शामिल रहे अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सबूत जुटाने में लगी है। वह बार-बार पांच वर्षों में मिले धन और खर्च का ब्यौरा मांग रही है। कहा जाता है कि बसपा विधायक राम प्रसाद जायसवाल सहित स्वास्थ्य विभाग के दबंग ठेकेदार कहे जाने वाले गुडडू खां के सीबीआई के हत्थे चढ़ जाने से कई बाबू और डिप्टी सीएमओ भी अपनी गर्दन नपती देख सरकारी गवाह बनने की पेशकश सीबीआई के सामने कर चुके हैं।

देवरिया से ओपी श्रीवास्‍तव की रिपोर्ट.

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