देवरिया। देश की आजादी के बाद जिले की यह पहली घटना है, जिसमें खाकी वर्दी पहन कर बदमाशों ने चालीस लाख रुपये की लूट-पाट की घटना को अंजाम देने के बाद आराम से फरार हो गए। दूसरी तरफ मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित पुलिस को घटना की भनक तक नहीं लग पाई और वह आराम से सोती रही। बाद में जब आक्रोशित जनता पुलिस चौकी में आग लगाने गई तो जाबांज उप्र के सिपाही वहां से जान बचा कर भागे। अंग्रेजी हुकुमत के समय की पुलिस की तरह से यूपी पुलिस ने आम जनता पर गुस्सा एवं अपनी विफलता छिपाते को छिपाने के लिए 70 लोगों के खिलाफ आगजनी का मुकदमा दर्ज कर दिया है। जिसमें कई उन निरीह एवं निर्दोष लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो गुजरात एवं विदेश में रहते हैं।
हांलाकि डकैती की इस घटना के पर्दाफाश के सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक डीके चौधरी के द्वारा बीस हजार रुपये का ईनाम घोषित करने के बाद अब पूरे जिले की पुलिस भेंगारी बाजार की डकैती के खुलासे में लग गई है। यहां बताते चलें कि बीते रविवार को खामपार थाना क्षेत्र के भेंगारी बाजार में करीब तीन बजे सुबह एक दर्जन से अधिक वर्दीधारी डकैतों ने, जिनके पास अत्याधुनिक कार्बाइन एवं नाइन एम एम के पिस्टल भी थे, शिव नाथ शर्मा के घर धावा बोला। इस दौरान राजू वर्मा पुत्र सच्चिदानन्द वर्मा, शिवनाथ के पुत्र एवं भाई की सर्राफा की दुकानों से लाखों का जेवर समेटने के बाद घर का कोना-कोना डकैतों ने खंगाल लिया। डकैतों ने करीब चालीस लाख रुपये के जेवर व नगदी पर हाथ साफ किया। बाद में घटना से आक्रोशित लोगों ने पुलिस चौकी व चेक पोस्ट को आग के हवाले कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सर्किलों के सीओ व प्रभारी एसपी मौके पर पहुंचे एवं कई थानों की पुलिस लगाई गई।
खामपार थाने पुलिस ने पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डकैती का मुकदमा दर्ज करने के साथ ही 70 लोगों के खिलाफ आगजनी का मुकदमा भी दर्ज कर दिया है। जिसमें से उन लोगों के नाम भी शामिल है जो गुजरात, मुम्बई, दिल्ली एवं विदेश में रहते है। बतौर उदाहरण सुनील पुत्र जय प्रकाश काफी दिनों से सपरिवार सूरत में रहते है एवं कुन्दन पुत्र लक्षमन खाड़ी देश में नौकरी करते हैं। जबकि शेष पुत्र हीरा दिल्ली में नौकरी करते हैं। इन लोगों को पुलिस ने एक कथित सीडी के आधार पर मुल्जिम बनाया है। यह सीडी किसने और कब बनाई यह पुलिस को पता नहीं है। इस लिए इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि हर बार की तरह इस बार भी जल्दबाजी में कई निर्दोष लोगों को पुलिस मुल्जिम बना सकती हैं। जबकि असली मुल्जिम पुलिस की पकड़ से दूर रहेंगे।
इस बात का प्रत्यक्ष उदाहरण दो सप्ताह पूर्व भलुअनी थाने की पुलिस द्वारा 15 मोटर सायकिलों की बरामदी की घटना में मिला। जिसमें पुलिस ने मास्टर माइन्ड एवं मुख्य सरगना को, जिसके संरक्षण में मोटर सायकिल चोरी की घटनाएं होती थीं, पर हाथ ही नहीं डाला। हांलाकि इस बात की जानकारी पकड़े गए एक अभियुक्त ने प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस अधीक्षक को पत्रकारों के सामने दी थी। लेकिन पता नहीं क्यों खुद पुलिस अधीक्षक डीके चौधरी ने भी इस बात पर गौर नहीं किया। बहरहाल भेंगारी बाजार में वर्दी धारी डकैतों द्वारा चालीस लाख रुपये की डकैती की घटना ने जिले की पुलिस को एक बड़ी चुनौती तो दे ही दिया है और पुलिस अधीक्षक द्वारा घोषित बीस हजार रुपये की ईनाम की राशि भी अभी तक कोई कमाल नहीं दिखा पाई है। इस प्रकरण के सम्बन्ध में कई बार पुलिस अधीक्षक से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने बात नहीं की।
देवरिया से ओपी श्रीवास्तव की रिपोर्ट.


