लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सीबीआई को लोग सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन कहने के बजाय ‘सियासी बंदोबस्त ऑफ इंडिया’ कहने लगे हैं। चुनाव समाप्त हो जाने के बाद यूपी के पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार किए जाने के बाद लोगों का यह कहना और मजबूती से होने लगा। सूबे के राजनीतिक हलके में सीबीआई माने यही सुनाई पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की दुदुंभि बजते ही मायावती सरकार के कथित भ्रष्टïाचार को लेकर शोर मचाने पर सीबीआई का उपयोग किस तरह राजनीतिक फायदे के लिए हो सकता है? इसका सबसे बड़ा नमूना उत्तर प्रदेश में हाल-फिलहाल की घटनाओं को देख कर लगा। पांच साल तक प्रदेश में केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली करोड़ों रुपए की धनराशि का किस कदर उपयोग हो रहा है, इसको लेकर सो रही कांग्रेस पार्टी की निद्रा टूटने के बाद सूबे में घोटाले पर घोटाले सामने आने लगे।
करोड़ों के एनआरएचएम घोटाले में कई सीएमओ की जान जाने के बाद तत्कालीन परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को मंत्री पद से हटा दिया गया। बाद में अदालत ने इस ह्त्या और परिवार कल्याण विभाग में कथित घोटालों की जांच सीबीआई को सौंप दी। विपक्ष का आरोप था कि इन घोटालों के तार मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े हैं, क्योंकि रिश्वत का पैसा ऊपर तक जाता था। खैर, कालिदास मार्ग में मुख्यमंत्री निवास के बगल में बंगला पाए बाबू सिंह कुशवाहा ने राज्यपाल, राष्ट्रपति एवं अन्य लोगों को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह और गृह सचिव कुंअर फतह बहादुर से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की। केंद्र सरकार को पूर्व मंत्री की ओर से भेजे गए इस खत के बाद माया सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया और कुशवाहा को मिली सुरक्षा कम कर दी गई। बीएसपी प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया कि कुशवाहा सीबीआई जांच से अपने को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी से लगातार सम्पर्क में हैं।
इन आरोपों के बीच अज्ञातवास पर चले गए पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा अचानक चार जनवरी को भाजपा के झंडे के नीचे प्रकट हुए। कुशवाहा के बीजेपी में शामिल होने के अगले दिन उनके घर समेत 50 ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की। सीबीआई की छापेमारी लखनऊ में बाबू सिंह कुशवाहा के घर के अलावा गाजियाबाद, आगरा, मेरठ, अमेठी, मुरादाबाद और पश्चिम उत्तर प्रदेश में कई और जगहों पर हुई। बीजेपी में शामिल होने के बाद सीबीआई की अचानक तेजी को लेकर भाजपा ने आरोप लगाया कि सीबीआई को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है। बाबू सिंह कुशवाहा को लेकर भाजपा में विवाद शुरू हो गया। इस विवाद के एक सप्ताह के भीतर उनकी भाजपा की सदस्यता स्थगित करके मामला किसी तरह शांत करने में बीजेपी लगी रही। बीजेपी से सदस्यता स्थगित होने के बाद उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की संख्या जिन सीटों पर ज्यादा है, वहां कुशवाहा के प्रचार के लिए जाने के लिए चुनाव में जो समीकरण बने-बिगड़े, उससे दूसरे दलों राजनीतिक योद्घा भी परेशान हो गए। सातवें और आखिरी चरण का चुनाव ज्यों ही खत्म हुआ त्योंही बाबू सिंह कुशवाहा की गिरफ्तारी ने राजनीतिक हलके में सीबीआई की भूमिका पर और भी सवाल खड़ा कर दिया। उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी सवाल खड़ा करते हैं कि कुशवाहा अगर दोषी हैं तो इतनी देर से क्यों गिरफ्तार किया गया? कुशवाहा ने केंद्र सरकार को खत लिखकर अपनी जान को खतरा बताया था।
सबसे बड़ा सवाल है इतना बड़ा घोटाला हुआ तो क्यों नहीं इससे जुड़े अफसरों को गिरफ्तार किया गया? पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा को क्यों नहीं पकड़ा गया? केशरीनाथ त्रिपाठी बाबू सिंह कुशवाहा की गिरफ्तारी को सियासी इशारे पर हुई कार्रवाई बताते हैं। उनका कहना है कि कुशवाहा के बहाने कांग्रेस छह मार्च के बाद सरकार बनाने की जोड़तोड़ में लग गई है। बाबू सिंह कुशवाहा की गिरफ्तारी के बाद चुनाव परिणाम आने पर अगर किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो कांग्रेस सीबीआई के नाम पर क्या खेल खेलेगी? इसको अभी से समझा जा सकता है। भाजपा के राष्टï्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद का कहना है कि ठीक चुनाव समाप्त होते ही कुशवाहा की गिरफ्तारी बताती है कि सीबीआई का किस तरह से दुरुपयोग किया जा रहा है। कुशवाहा अगर गुनाहगार हैं तो फि र उन्हें सजा दी जाए लेकिन सिर्फ उन्हें ही निशाना बनाया जाना गलत है। भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय सेन सिंह का कहना है कि सीबीआई आज की तारीख में सियासी बंदोबस्त का काम कर रही है। कांग्रेस की सरकार बनाने और नेताओं को बचाने के लिए सीबीआई का राजनीतिक उपयोग जिस तरह हुआ शर्मनाक है।
लखनऊ के अखबार कैनविज टाइम्स में वरिष्ठ पत्रकार दिनेश चंद्र मिश्र की प्रकाशित रिपोर्ट.


