29 फरवरी की सायं हरियाणा विजिलेंस द्वारा नगर में विख्यात शिक्षण संस्थान पर छापा मार दलितों को हरियाणा सरकार द्वारा दी जा रही सरकारी सहायता के चेक देने की एवज में छात्र विनोद कुमार से कालेज के चेयरमैन महेन्द्र रुपेला और बाबू द्वारा 6300 रुपए की नकदी लेते दोनों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। उसके बाद एक मार्च को दोनों आरोपियों को विजिलेंस ने अदालत में पेश किया जहां उसे एक दिन के रिमांड पर भेजा गया। उम्मीद है कि यह मामला हरियाणा के शिक्षण जगत का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है, जिसके लिए विजिलेंस रिकार्ड खंगालने में लगी हुई है और ऐसा हुआ तो चेयरमैन व बाबू कई माह जेल की हवा सकते है।
दुर्भाग्य की बात यह है कि पता नहीं चल पाया कि जिला रेवाड़ी में स्वयं को ईमानदार तथा भ्रष्टाचार का चिट्ठा खोलने का दावा करने वाली मीडिया के अधिकत्तर लोग क्यों इस खबर को छिपा गए, जो पत्रकार व समाचार पत्रों के सम्पादक व मालिक छह बोतल अवैध शराब पकड़े जाने पर, कुत्ता-बिल्ली के मरने तथा मामूली से झगड़े को सुर्खियां बना देते है। इतने बड़े समाचार को क्यों दबा दिया गया। यह बात जिला रेवाड़ी के दलित समाज एवं आम जनता के जेहन में आ चुकी है कि रेवाड़ी जिला की मीडिया तथा दूसरे पत्रकारों से स्वयं को वरिष्ठ बताने वाले अधिकत्तर समाचार पत्रों में इस समाचार को जानबूझ कर दबाया गया है। वहीं सभी जाने-माने समाचारों के पत्रकार 29 फरवरी को देर रात्रि तक तथा 1 मार्च को अदालत में आरोपियों को पेश करते हुए खड़े देखे गए। अगर उन्होंने समाचार प्रकाशित ही नहीं करना था तो फिर क्या वह अदालत में अपनी शक्ल दिखा कर अपनी कीमत में इजाफा करने गए थे।
रेवाड़ी से महेंद्र भारती की रिपोर्ट.


