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एनजीओ और नौकरशाही के गठजोड़ में हुआ लाखों का खेल, जांच शुरु

जगदलपुरः बस्तर में विभिन्न विभागों के कार्य कर रही स्वयं सेवी संस्थायें ग्रामीणों के विकास की जगह अपना विकास करने में लगी हुई हैं। आंकड़ों के खेल में शासन को उलझाकर करोड़ों की इस हेराफेरी में लगे इन एनजीओ को सरकारी विभागों का पूरा संरक्षण और सहयोग प्राप्त हो रहा है। केन्द्र की विभिन्न योजनाओं के साथ राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं के संचालन में एनजीओ की मदद लेने का उच्च स्तरीय षड़यंत्र बड़े ही सुनियोजित ढंग से रचा जा रहा है। करोड़ों रूपये खर्च करने के बावजूद भी बस्तर के आदिवासियों की स्थिति यथावत बनी हुई है, लेकिन विभिन्न विभागों के सरकारी आंकड़ों में ग्रामीण विकास के नये-नये कृतिमान गढ़े जा रहे हैं और अब सरकारी अधिकारियों के साथ स्वयं सेवी संस्थायें भी भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ चूकी हैं। रायपुर की चार स्वयं सेवी संस्थाओं के द्वारा किये गये कार्यों की जांच के आदेश हो चुके हैं। साथ ही इन सभी संस्थाओं के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

जगदलपुरः बस्तर में विभिन्न विभागों के कार्य कर रही स्वयं सेवी संस्थायें ग्रामीणों के विकास की जगह अपना विकास करने में लगी हुई हैं। आंकड़ों के खेल में शासन को उलझाकर करोड़ों की इस हेराफेरी में लगे इन एनजीओ को सरकारी विभागों का पूरा संरक्षण और सहयोग प्राप्त हो रहा है। केन्द्र की विभिन्न योजनाओं के साथ राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं के संचालन में एनजीओ की मदद लेने का उच्च स्तरीय षड़यंत्र बड़े ही सुनियोजित ढंग से रचा जा रहा है। करोड़ों रूपये खर्च करने के बावजूद भी बस्तर के आदिवासियों की स्थिति यथावत बनी हुई है, लेकिन विभिन्न विभागों के सरकारी आंकड़ों में ग्रामीण विकास के नये-नये कृतिमान गढ़े जा रहे हैं और अब सरकारी अधिकारियों के साथ स्वयं सेवी संस्थायें भी भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ चूकी हैं। रायपुर की चार स्वयं सेवी संस्थाओं के द्वारा किये गये कार्यों की जांच के आदेश हो चुके हैं। साथ ही इन सभी संस्थाओं के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

पीसीसीएफ ने इन संस्थाओं द्वारा की जा रही हेराफेरी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की है। इन चारों संस्थाओं में से स्पीड नामक संस्था के घोटोलों की खबर देशबंधु ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। रायपुर की स्वयं सेवी संस्था स्पीड द्वारा बस्तर वनमंडल में किये गये लाखों के घोटालों का पर्दाफाश हो चुका है। प्रतिभा एलएस नामक इस एनजीओ की कर्ताधर्ता ने प्रदेश के एक आईएएस अधिकारी के प्रभाव का इस्तेमाल कर कई विभागों में करोड़ों के काम हासिल किये और दबाव बनाकर काम किये बगैर ही लाखों रूपये का भुगतान प्राप्त करा लिया। कागजों में तैयार किये गये फर्जी आंकड़ों के आधारपर इस संस्था को भुगतान किया जाता रहा, जबकि इस संस्था के कार्य स्थलों पर किसी भी कार्य का ना होना पाया गया। राजीव गांधी शिक्षा मिशन के सामुदायिक सहभागिता के कार्यक्रमों का फर्जी संचालन कर इस संस्था ने शासन को छला है साथ ही वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर लाखों की हेराफेरी की है। बस्तर वनमंडल में इस संस्था द्वारा सर्वाधिक हेराफेरी की गई है क्योंकि बस्तर के वनमंडलाधिकारी की इस संस्था पर आरंभ से ही विशेष कृपादृष्टि रही है। बिना वास्तविकता का परीक्षण किये डीएफओ द्वारा इस संस्था को चालीस लाख से भी अधिक का भुगतान किया जा चुका है। बकावंड क्षेत्र के जूनावनी, इरिकपाल, धोबीगुड़ा, मालगांव और उलनार मेंप्लांटेशन, ट्यूबवेल खुदाई और स्वयं सहायता समूह के नाम पर किये गये इस संस्था के भ्रष्टाचार की कहानी को पिछले दिनों अखबारों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। अखबारों में हुए मामले के खुलासे के बाद और विभिन्न संगठनों द्वारा की गई शिकायत के बाद प्रदेश के पीसीसीएफ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस संस्था को आगे भुगतान करने पर रोक लगा दी है। साथ ही इस संस्था के फर्जीवाड़े की जांच करने हेतु एक समिति का गठन कर दिया गया है। इस समिति के सदस्य प्रदेश भर में किये गये इस संस्था के कार्यों की जांच करेंगे। उल्लेखनीय है कि 13वें वित्त आयोग से स्पीड नामक इस संस्था को वन विभाग के माध्यम से 95 लाख रूपये के कार्य दिये गये हैं।

इंट्रीग्रेटेड लाईवलीहुड प्रोजेक्ट हेतु किये जा रहे कार्यों में दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल में 49 लाख रूपये और बस्तर वन मंडल में 46 लाख रूपये के कार्य इस वित्तीय वर्ष मेंइस संस्था के माध्यम से करवाये गये हैं। गत 7 फरवरी 2011 को तत्कालीन अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. अनूप भल्ला द्वारा जारी आदेश क्रमांक सं.व.प्र./112 के माध्यम से स्पीड समेत कुल चार एनजीओ को पांच करोड़ सात लाख रूपये के कार्य दिये गये हैं। प्रदान, ग्रामीण विकास ट्रस्ट, स्पीड और हरितिमा पर्यावरण संरक्षण सेवा समिति इन चारों को कांकेर, धमतरी, कोण्डागांव, बस्तर और रायपुर वन मंडल में कार्य दिये गये हैं। इसमें से स्पीड और प्रदान के द्वारा कार्य बस्तर और कोण्डागांव वन मंडलों में किये गये है। स्पीड की ही तरह प्रदान द्वारा किये गये कार्यों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किये जाने की शिकायतें मिल रही हैं। वन मंडलाधिकारी बस्तर वन मंडल को अखबारों के माध्यम से तथा जन प्रतिनिधियों की शिकायतों के माध्यम से स्पीड संस्था की कारगुजारियों से पिछले दो महीनों से अवगत कराया जाता रहा है परंतु डीएफओ द्वारा इस सप्ताह भी 10 लाख रूपये का भुगतान इस संस्था को कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि बकावंड ब्लाक के पांच गांवों में बीस हजार पौधे रोपने और करीब आधा दर्जन ग्रामीणों के खेतोंमें नलकूप खनन करने के झूठे दावे इस संस्था द्वारा किये गये हैं। साथ ही पहले से बने दर्जन भर स्वसहायता समूहों को स्वयं द्वारा निर्मित बताकर प्रशिक्षण आदि के नाम पर बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। इस पूरे घटना क्रम में उपयोगिता का झूठा प्रमाण पत्र देने वाले वन विभाग के अधिकारी भी उतने ही दोषी है जितनी दोषी यह स्वयं सेवी संस्था है।

लेखक- देवशरण तिवारी बस्तर (छत्तीसगढ़) में दैनिक देशबन्धु के ब्यूरो प्रमुख हैं

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