: पुलिसकर्मी काली पट्टी बांधकर करेंगे विरोध : बंगलुरू : सिटी सिविल कोर्ट परिसर में दो मार्च को राज्य के पूर्व मंत्री जी रेड्डी की पेशी के दौरान मीडियाकर्मियों एवं पुलिसवालों पर वकीलों के हमले के मामले ने तूल पकड़ लिया है. इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है. वहीं वकीलों द्वारा झूठे मामले में फंसाए जाने की कोशिशों के विरोध में पुलिसकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है.
गौरतलब है कि वकीलों ने मीडियाकर्मियों को बचाने के लिए गए पुलिस वालों पर भी पथराव किया था. पथराव में पांच दर्जन के आसपास पुलिस वाले घायल हो गए थे. इसके बाद पुलिस वालों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए वकीलों पर लाठीचार्ज किया. अब वकील पुलिसवालों पर कोर्ट के माध्यम से झूठा मुकदमा कराने की कोशिश में लगे हुए हैं इसी के मद्देनजर पुलिस वालों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करने का फैसला किया है. यह पहला मौका होगा जब पुलिसकर्मी किसी विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे. इस विवाद के चलते सरकार पूरी तरह दबाव में है.
इस मामले में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हुए बंगलुरू हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है. एडवोकेट एसोसिएशन बंगलुरू ने पीआईएल दायर करते हुए मीडिया में उस फुटेज के दिखाये जाने पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसमें पुलिस द्वारा वकीलों को पीटे जाते दिखाया जा रहा है. इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस विक्रमजीत सेन और जस्टिस बीवी नागरथन की दो सदस्यीय खंड पीठ ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है.
दूसरी तरफ राज्य सरकार पर भी वकील-मीडिया तथा पुलिस का मामला होने के चलते काफी दबाव बना हुआ है. सरकार ने इस मामले की जांच के लिए डीजीपी (सीआईडी) रुपक कुमार दत्ता को सौंपी है. सरकार ने घटना में पुलिस की भूमिका की जांच करने का आदेश दिया है तथा रिपोर्ट एक महीने के भीतर सरकार को सौंपने का निर्देश दिया है. इन्हीं कोशिशों का विरोध पुलिसकर्मी भी कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि घोटाले में फंसे राज्य के पूर्व मंत्री जी रेड्डी की पेशी के दौरान उनके समर्थक वकीलों ने मीडियाकर्मियों को कवरेज से रोका तथा विवाद बढ़ने पर उन पर हमला कर दिया था. उन्होंने कई पत्रकारों को पीटकर घायल कर दिया था. पुलिस ने जब मीडियाकर्मियों को बचाने की कार्रवाई शुरू की तो वकीलों ने पुलिसवालों पर भी पत्थर से हमला किया, जिसके बाद पुलिस ने भी हिंसा पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज किया था. इस मामले में चार वकीलों को गिरफ्तार भी किया गया था.


