उत्तर प्रदेश की निवर्तमान मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती अब राज्य की राजनीति नहीं करेंगी. माया ने मंगलवार को राज्यसभा के चुनाव के लिये अपना नामांकन दाखिल किया. उनके साथ उनके करीबी राज्यसभा सांसद मुनकाद अली ने भी नामांकन दाखिल किया. अली का मौजूदा कार्यकाल शीघ्र ही समाप्त होने जा रहा है. इसके साथ ही शशांक शेखर को राज्यसभा सदस्य बनाए जाने की अटकलें भी खतम हो गईं. विधानसभा में करारी हार के बाद ही मायावती के राज्यसभा जाने की चर्चाएं हो रही थीं. राज्यसभा जाने के मुद्दे पर उन्होंने पार्टी के सहयोगियों से भी विचार-विमर्श किया था.
सूत्रों के अनुसार प्रदेश के पूर्व कैबिनेट सचिव एवं मायावती के खास शशांक शेखर को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ पार्टी विधायकों तथा पदाधिकारियों की नाराजगी को देखते हुए पार्टी ने किसी मुस्लिम चेहरे को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया था, बताया जा रहा है कि उसी के तहत मुनकाद अली को एक बार फिर से राज्यसभा भेजने का फैसला लिया गया है. मायावती ने यूपी की सरकार विधान परिषद सदस्य के रूप में चलाया था. वह राज्य सभा में जाने के लिए विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे देंगी.
मायावती ने नामांकन के बाद कहा कि लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और यूपी में सपा को बहुमत मिलते ही गुंडागर्दी तथा सर्वसमाज पर अत्याचार बढ़ गया है, ऐसे में पार्टी ने फैसला किया है कि इन मुद्दों को संसद में जोरदार तरीके से उठाया जाए. इसी लिए उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला लिया है. माया ने कहा कि बसपा के लोग महसूस करते हैं कि वो मेरे निर्देश पर यूपी के विधानसभा तथा विधान परिषद में सपा के कृत्यों का विरोध करेंगे और मैं संसद में जाउंगी तो वहां इन मामलों को उठा सकती हूं.
मायावती ने कहा कि पार्टी के लोगों का मत है कि अब मुझे केवल यूपी में ही नहीं बल्कि पूरे देश में बसपा का जनाधार बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए. अपना पूरा समय उत्तर प्रदेश की बजाय अन्य प्रदेशों को भी देना चाहिए, इसलिए मेरा राज्यसभा जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि दो साल बाद लोकसभा चुनाव होने हैं, इस स्थिति में वो यूपी के साथ पूरे देश में समय देने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी भविष्य में अच्छे नतीजे देगी.


