नई दिल्ली। पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी की रिहाई और उन पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए विभिन्न संगठनों के लोगों ने शुक्रवार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। इसमें पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी की पत्नी, बेटे और अन्य रिश्तेदार भी शामिल थे। काजमी की पत्नी जहांआरा ने कहा कि मेरे पति को एक साजिश के तहत फंसाया गया है, वे आतंकवादी नहीं हैं। नेशनल काउंसिल ऑफ शिया उलेमा के तत्वावधान में आयोजित प्रदर्शन को संबोधित करते हुए शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहसिन तकवी ने कहा कि हम मोहम्मद अहमद काजमी को जानते हैं। वे 5000 हजार डॉलर तो क्या एक लाख डॉलर में भी ऐसा काम अंजाम नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि यह गिरफ्तारी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार अमेरिका और इस्रइल के इशारे पर काम कर रही है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य डॉ. कासिम रसूल इल्यास ने कहा कि पत्रकार मोहम्मद अहमद काजमी की रिहाई के लिए एकजुट होकर आंदोलन चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के इस्राइल से बढ़ रहे संबंद्ध और देश के आंतरिक मामलों में इस्राइल की बढ़ती दखलंदाजी बेहद खतरनाक है। पत्रकार काजमी के पुत्र शोहजब काजमी ने कहा कि मेरे पिता पिछले 25 साल से पीआईबी के मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। उन्होंने सदा सचाई को उजागर किया। आईसा के अनमोल ने कहा कि वरिष्ठ पत्रकार काजमी की गिरफ्तारी लोकतंत्र पर हमले के समान है। उन्होंने कहा कि जो काजमी पर आरोप लगाए गए हैं उनकी निष्पक्ष जांच हो। मजलिस उलेमा के मौलाना जलाल हैदर ने कहा कि यह एक निर्देश के लिए लड़ाई है। साभार : सहारा


