27 फरवरी 2012 को बिल्ली-मारकुण्डी क्षेत्र में हुए अवैध खनन हादसे को लेकर की गयी भूख हड़ताल 16 मार्च की देर शाम जिलाधिकारी के प्रतिनिधि से हुई सार्थक वार्ता के बाद समाप्त कर दी गयी। इस भूख हड़ताल को समर्थन दे रहे अन्य संगठनों जन संघर्ष मोर्चा, सोनांचल संघर्ष वाहिनी, जनहित मंच, राष्ट्रीय वन जन श्रमजीवी मंच, कैमूर क्षेत्र महिला मजदूर किसान संघर्ष समिति, एन.टी.यू.आई. के लोगों से भूख हड़ताल समाप्त करने से पहले वार्ता हुयी। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जा रहा है। कुछ लोगों ने न्यायालय से स्थगन आदेश हासिल कर लिया है। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकती। मजिस्ट्रेटी जांच में सब दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।
विजय विनीत ने बताया कि 19 मार्च को इसी मामले को लेकर प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांण्डेय द्वारा लखनऊ में एक कार्यक्रम आयोजित किया
गया है। इस में अवैध खनन हादसे के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए रणनीति तय की जायेगी। 5 व 6 अप्रैल को प्रसिद्ध भू-वैज्ञानिक श्रीधर की अगुवायी में एक उच्चस्तरीय जांच दल खनन क्षेत्र की जांच करने आयेगा। विजय विनीत ने बताया कि सबसे दुखद स्थिति जनपद में कुछ मिडीया कर्मियों की है, जो स्वयं इस धंधे में लिप्त हैं और मजदूरों की लाशों पर अपनी तिजोरियां भर रहे हैं। जिला प्रशासन से यह मांग की गयी है कि वह ऐसे पत्रकारों के नामों का खुलासा करे। यदि जिला प्रशासन यह खुलासा नहीं करता तो यह खुलासा अदालत के माध्यम से कराया जायेगा।
उन्होंने कहा कि यह यहां का बच्चा-बच्चा जानता है कि बिल्ली-मारकुण्डी में रेलवे लाइन के किनारे रासपहरी में हिन्दुस्तान कंट्रक्सन कंपनी की बंद हो चुकी खदान पर शारदा मंदिर के पीछे समेत कई स्थानों पर पत्थर व खैरटिया आदि स्थानों पर कौन-कौन से पत्रकार पत्थर व बालू का अवैध खनन करा रहे हैं। विजय विनीत ने निष्पक्ष व जिम्मेदारी पूर्वक खनन हादसे कि बेबाकी से खबरें देने वाले समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों का धन्यवाद ज्ञापित किया है। उन्होंने बताया कि जन संगठनों से ऐसे पत्रकारों को सम्मानित करने के लिए पहल की जा रही है।


