‘सर्विस फॉर सोसायटी’ के नाम से जलजोगिनी द्वारा शुरू किया जाएगा ऑनलाइन पोर्टल

: झारखण्ड सूचना आयुक्त ने इस कार्य के लिए बढाया मदद का हाथ : सूचना के अधिकार पर संगोष्ठी का आयोजन :  नई दिल्ली : सूचना का अधिकार कानून के 10 साल पूरा होने पर जलजोगिनी (गैर-सरकारी संस्था) की ओर से हिंदी भवन में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था ‘सूचना का अधिकार, पूरे हुए दस साल। कहां से चले और कहां पहुंच गए ?’ संगोष्ठी के मुख्य अतिथि झारखण्ड के सूचना आयुक्त श्री हिमांशु शेखर चौधरी, विशिष्ट अतिथि श्री सुभाष अग्रवाल (आरटीआई एक्टिविस्ट), श्री मुकेश केजरीवाल (आरटीआई पत्रकार), सुश्री सीजून चंद्रन (आरटीआई स्कॉलर, शोधकर्ता) एवम् विशाल सहाय अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

संगोष्ठी में विभिन्न वक्ताओं की ओर से आरटीआई के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। जलजोगिनी के संस्थापक सचिव आलोक कुमार ने ऐलान किया कि आरटीआई के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जलजोगिनी जल्द ही एक नई वेब पोर्टल ‘ सर्विस फॉर सोसायटी’ के नाम से शुरू करेगी। इसके माध्यम से आरटीआई आवेदनकर्ता को आम सुलभ जानकारी और ऑनलाइन सहयोग प्रदान किया जाएगा।

संगोष्ठी में मुख्य अतिथि झारखंड के सूचना आयुक्त श्री हिमांशु शेखर चौधरी ने सुनवाई के दौरान मिले अनुभव को हैरत पूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कई सरकारी मुलाजिमों को आरटीआई आवेदन का जवाब देना तक नहीं आता है। दस साल में सरकारी मुलाजिमों को प्रशिक्षित करने का काम अधूरा है। इस बारे में सरकार के स्तर पर प्रयास में तेजी लाने की जरूरत है।

सूचना आयुक्त ने बताया कि कई चालाक अधिकारी गोलमोल जवाब से आवेदन के मकसद को भटकाने का काम करते हैं। उन्होने आम भारतीयों को आरटीआई के बारे में जागरूक बनाने और आवेदनकर्ता को मदद के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल होना चाहिए जिससे आवेदनकर्ता को यह जानकारी मिल सके कि उन्हें आरटीआई किस तरह से और किस विभाग में दायर करनी चाहिए। इससे आवेदनकर्ता को तय समय के भीतर आसानी से जानकारी प्राप्त हो सके।

सुप्रीम कोर्ट से लेकर एमसीडी तक छह हजार से ज्यादा आरटीआई आवेदन दायर कर समाज की दशा और दिशा बदलने वाले श्री सुभाष अग्रवाल ने निजी अनुभवों के जरिए बताया कि किस तरह से जनसरोकार की समस्याओं को दूर किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें बहुत बार भद्दे फोन कॉल आते है और बहुत बार उनको धमकी भी मिल चुकी है। लेकिन श्री अग्रवाल अपने इरादों पर डटे रहकर इन परिस्थितिओं का सामना किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब लोग उनकी लोकप्रियता देखकर लोग उनके नाम का दुरूपयोग करने लगे हैं। सरकारी दफ्तरों को भयभीत करने के लिए उनके नाम से फर्जी आवेदन दायर किए जा रहे हैं। इसकी जानकारी उनको बाद में पता लगती है। इस दोष को दूर करने का इंतजाम होना चाहिए।

आरटीआई पर पीएचडी कर रही सुश्री सीजून चंद्रन ने संगोष्ठी में व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। सोमालिया के पाइरेट से भारतीयों को मुक्ति दिलाने के लिए आवेदन दायर करने से लेकर स्कूल भवन और मोहल्ले की सड़कों की दशा में सुधार लाने का काम किया है।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश केजरीवाल ने अपना पत्रकारिता का अनुभव साझा किया और आरटीआई के माध्यम से जनसरोकार की सच्चाईओं को पाठक तक पहुंचाया। उन्होंने यह भी बताया कि आरटीआई को लेकर सभी राजनैतिक दलों का समानभाव है। यूपीए शासनकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह बात एक सभा में कही थी कि आरटीआई की वजह से सरकारी काम में बाधा पहुंचती है , तो मौजूदा प्रधानमंत्री ने भी दस साल पूरा होने पर आरटीआई सम्मेलन में कोई उत्साहवर्धक बयान नहीं दिया।

भारतीय विद्या भवन में पत्रकारिता के प्राध्यापक  विशाल सहाय ने संगोष्ठी में कहा कि वह आरटीआई को मजबूत बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। वह संस्थान में प्रत्येक वर्ष पत्रकारिता की पढ़ाई करने आने वाले 250 युवाओं में आरटीआई दाखिल करने का जोश भरते हैं। वह पत्रकारों की एक ऐसी फौज भी तैयार कर रहे हैं जो भविष्य में आरटीआई को मजबूती देने के काम में लगेंगे। कार्यक्रम में शुक्लपक्ष मैग्जीन के संपादक निशिकांत ठाकुर, विवेक गर्ग (आरटीआई एक्टिविस्ट), जलजोगिनी की तरफ से वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी आलोक कुमार, एन. सत्यनारायण, आशुतोष झा, अभय त्रिपाठी एवं राहुल कुमार सिंह सहित विभिन्न मीडिया संस्थानों के छात्र-छात्रा व समाजसेवी लोग उपस्थित थे।

संपर्क-
आलोक कुमार
संस्थापक सचिव
जलजोगिनी
SAVE WATER
SAVE LIFE
मोबाइल 9873417449
मेल jaljogini@gmail.com

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia