Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सोशल मीडिया

एक दुखियारी भैंस का प्रधानमंत्री जी को ‘मन की बात’ में भेजा गया पत्र

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं ना आज़म खां की भैंस हूं और ना लालू यादव की! ना मैं कभी रामपुर गयी ना पटना! मेरा उनकी भैंसों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। यह सब मैं इसलिये बता रही हूं कि कहीं आप मुझे विरोधी पक्ष की भैंस ना समझे लें।

प्रिय प्रधानमंत्री जी,

सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मैं ना आज़म खां की भैंस हूं और ना लालू यादव की! ना मैं कभी रामपुर गयी ना पटना! मेरा उनकी भैंसों से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। यह सब मैं इसलिये बता रही हूं कि कहीं आप मुझे विरोधी पक्ष की भैंस ना समझे लें।

मैं तो भारत के करोड़ों इंसानों की तरह आपकी बहुत बड़ी फ़ैन हूं। मेरे साथ की सारी भैंसें मुझे ‘भक्त भैंस-भक्त भैंस’ कहकर चिढ़ाती रहती हैं, लेकिन मुझे इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। मैं आपकी फ़ैन थी, हूं और सदा रहूंगी! चाहे कोई कुछ भी कहता रहे!

जब आपकी सरकार बनी तो जानवरों में सबसे ज़्यादा ख़ुशी हम भैंसों को ही हुई थी। हमें लगा कि ‘अच्छे दिन’ सबसे पहले हमारे ही आयेंगे। लेकिन हुआ एकदम उल्टा! आपके राज में तो हमारी और भी दुर्दशा हो गयी। अब तो जिसे देखो वही गाय की तारीफ़ करने में लगा हुआ है। कोई उसे माता बता रहा है तो कोई बहन! अगर गाय माता है तो हम भी तो आपकी चाची, ताई, मौसी, बुआ कुछ लगती ही होंगी!

हम सब समझती हैं। हम अभागनों का रंग काला है ना! इसीलिये आप इंसान लोग हमेशा हमें ज़लील करते रहते हो और गाय को सर पे चढ़ाते रहते हो! आप किस-किस तरह से हम भैंसों का अपमान करते हो, उसकी मिसाल देखियेः

आपका काम बिगड़ता है अपनी गलती से और टारगेट करते हो हमें कि देखो गयी भैंस पानी में! गाय को क्यूं नहीं भेजते पानी में! वो महारानी क्या पानी में गल जायेगी?

आप लोगों में जितने भी लालू लल्लू हैं, उन सबको भी हमेशा हमारे नाम पे ही गाली दी जाती है- काला अक्षर भैंस बराबर! माना कि हम अनपढ़ हैं, लेकिन गाय ने क्या पीएचडी की हुई है?

जब आपमें से कोई किसी की बात नहीं सुनता, तब भी हमेशा यही बोलते हो कि भैंस के आगे बीन बजाने से क्या फ़ायदा! आपसे कोई कह के मर गया था कि हमारे आगे बीन बजाओ? बजा लो अपनी उसी प्यारी गाय के आगे!

अगर आपकी कोई औरत फैलकर बेडौल हो जाये तो उसे भी हमेशा हमसे ही कंपेयर करोगे कि भैंस की तरह मोटी हो गयी हो! करीना और कैटरीना गाय और डॉली बिंद्रा भैंस! वाह जी वाह!

गाली-गलौच करो आप और नाम बदनाम करो हमारा कि भैंस पूंछ उठायेगी तो गोबर ही करेगी! हम गोबर करती हैं तो गाय क्या हलवा हगती है?

अपनी चहेती गाय के ऊपर तो आज तक आपसे बस एक ही कहावत बन पायी है और वो भी ऐसी कि जिसे सुनकर हमारी रोम रोम सुलग जाये! गाय की मिसाल आप सिर्फ़ तब देते हो, जब आपको किसी की तारीफ़ करनी होती है- वो तो बेचारा गाय की तरह सीधा है, या- अजी, वो तो राम जी की गाय है! तो गाय तो हो गयी राम जी की और हम हो गये लालू जी के! वाह रे इंसान!

ये हाल तो तब है, जब आप में से ज़्यादातर लोग हम भैंसों का दूध पीकर ही सांड बने घूम रहे हैं। उस दूध का क़र्ज़ चुकाना तो दूर, उल्टे हमें बेइज़्ज़त करते हैं! एक बात बताओ! आपने कभी किसी भैंस को गायों की तरह सड़कों पर आवारा घूमते और पन्नी खाते देखा है क्या? बताओ! असल में, सच्चाई ये है कि आप हमें ऐसे फालतू समझकर छोड़ ही नहीं सकते। हम हैं ही इतने काम की चीज़!

आपकी चहेती गायों की संख्या तो हमारे मुक़ाबले कुछ भी नहीं हैं। फिर भी, मेजोरिटी में होते हुए भी हमारे साथ ऐसा सलूक हो रहा है! प्रधानमंत्री जी, आप तो मेजोरिटी के हिमायती हो, फिर हमारे साथ ऐसा अन्याय क्यूं होने दे रहे हो? प्लीज़ कुछ करो!

आपके ‘कुछ’ करने के इंतज़ार में

आपकी एक तुच्छ प्रशंसक

भैंस


 

सोशल मीडिया और मोबाइल पर खूब शेयर किए जा रहे इस व्यंग्य पोस्ट को ह्वाट्सअप से लेकर यहां प्रकाशित किया गया है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...