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आज का दिन कांग्रेस की लानत मलामत का है, बिना किन्तु परंतु के

कांग्रेसी अब भी न सुधरे तो 2019 में आंसू पोंछने को भी नाम लेवा न मिलेगा

पांच सूबों के नतीजे सन् 2016 के केलेंडर पर कांग्रेस के लिए कट्टस लगा रहे हैं।दो साल से बदहाल और बेहाल बैठी कांग्रेस का हाल उस दुल्हन की तरह हो गया जिसके लिए कहते हैं- ” कछू तौ पहलैई रुआंसी बैठीं थीं तापै भैया और आय गए”। जनता ने “हाथ का पंजा” मरोड़ कर धर दिया है।पांच राज्यों से पांचों उंगलियां गाल पर छप गयीं हैं।ऐसा ‘चनकट्टा’ लगा है कि बिलबिलाहट बहुत देर तक रहेगी। आज जिन पांच राज्यों के नतीजे आये हैं उनमें से तीन में कांग्रेस की सरकारें थी। असम और केरल ‘हाथ’ से फिसल गए हैं।पुडुचेरी में गिरते पड़ते सरकार बन रही है।तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में दूसरे का पल्ला पकड़ना भी काम नहीं आया।

कांग्रेसी अब भी न सुधरे तो 2019 में आंसू पोंछने को भी नाम लेवा न मिलेगा

पांच सूबों के नतीजे सन् 2016 के केलेंडर पर कांग्रेस के लिए कट्टस लगा रहे हैं।दो साल से बदहाल और बेहाल बैठी कांग्रेस का हाल उस दुल्हन की तरह हो गया जिसके लिए कहते हैं- ” कछू तौ पहलैई रुआंसी बैठीं थीं तापै भैया और आय गए”। जनता ने “हाथ का पंजा” मरोड़ कर धर दिया है।पांच राज्यों से पांचों उंगलियां गाल पर छप गयीं हैं।ऐसा ‘चनकट्टा’ लगा है कि बिलबिलाहट बहुत देर तक रहेगी। आज जिन पांच राज्यों के नतीजे आये हैं उनमें से तीन में कांग्रेस की सरकारें थी। असम और केरल ‘हाथ’ से फिसल गए हैं।पुडुचेरी में गिरते पड़ते सरकार बन रही है।तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में दूसरे का पल्ला पकड़ना भी काम नहीं आया।

भारतीय जनता पार्टी के लिए दिल्ली और बिहार का ग़म दूर करने की खबर आज गुवाहाटी से आई है। पंद्रह साल से राज कर रही कांग्रेस को हरा कर असम में “कमल” खिला है। देश के पूर्व-उत्तर में एक तरह से यह बीजेपी का सूर्योदय है। पार्टी को आज “बिहू” शैली में नाचने गाने का हक़ है। इन पांच राज्यों में असम से ही उम्मीद थी जो सर चढ़ कर परवान चढ़ी है। अच्छी खबर बंगाल से भी है। वहां आधा दर्जन सीटों के साथ कमल दल ने आमद दर्ज़ करायी है। केरल और तमिलनाडु में भी हाज़िरी दे दी है।

केरल में राज कर रहे “हाथ” को कम्युनिस्ट “हथिया हथौड़ा” ने लहूलुहान कर दिया है। लेकिन बंगाल में हाथ और हंसिया हथौड़ा मिल कर भी ममता के मैदान की घास (तृणमूल) को नहीं उखाड़ सके। बंगाल, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी और केरल में क्षेत्रीय पार्टियों की जीत के अपने मायने हैं। केरल का वाम मोर्चा भी क्षेत्रीय ही समझिये। लेकिन आज का दिन कांग्रेस की लानत मलामत का दिन है। बिना किन्तु परंतु के।

पार्टी के चारण-भाटों से पूछने का दिन है कि दिल्ली में टूइंयां से चार पार्षदों की जीत का सेहरा जिस “राजकुमार” के सिर बाँध रहे थे अब तीन राज्यों में धुल चाटने का ठीकरा भी उसी के सिर पर रखा जायेगा कि नहीं…? यहाँ से आगे रास्ता और कठिन होने वाला है। सन् 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले शायद ही किसी राज्य का चुनाव हो जहाँ से दम तोड़ रही कांग्रेस को साँसे मिलती लग रही हों। पार्टी के नेतृत्व को आज, अभी, इसी पल माथा जोड़ कर बैठना होगा ताकि आगे की कुछ राह सूझे वरना आगे ढलान ही ढलान है। अगर अब भी न सुधरे तो 2019 में आंसू पोंछने को भी नाम लेवा नहीं मिलेगा।

डॉ राकेश पाठक
प्रधान संपादक, डेटलाइन इंडिया

मूल खबर….

असम में भाजपा, केरल में लेफ्ट, तमिलनाडु में अम्मा और बंगाल में दीदी की जीत

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