धान की सरकारी खरीद न होने से उत्तर प्रदेश के किसानों में आक्रोश

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अब तक धान की सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों में आक्रोश व्याप्त है. यह बात पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी (राष्ट्रीय प्रवक्ता, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है. उन्होंने कहा है कि मैंने खीरी जिले के मैगलगंज, सिकंदराबाद, मितौली, मोहमदी, गोला, औरंगाबाद  क्षेत्र के किसानों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उन स्थानों पर कहीं भी सरकारी धान खरीद केन्द्रों की स्थापना नहीं हुयी है. एक दो जगह पर धान क्रय केंद्र का बोर्ड तो लगा है परन्तु वहां पर न तो कोई कर्मचारी है और न ही धान की कोई खरीद ही की जा रही है.

धान की सरकारी खरीद न होने के कारण किसान अपना धान मंडी तथा चावल मिलों को मनचाहे दाम पर बेचने के लिए मजबूर है. यह उल्लेखनीय है सरकार ने पहली अक्तूबर से धान क्रय केन्द्रों की स्थापना की घोषणा कर रखी है. एक ओर जहाँ सरकार ने धान का सरकारी रेट 1410 रुपए घोषित कर रखा है वहीँ मंडियों तथा चावल मिलों पर धान 700 से लेकर 900 रुपए तक बिक रहा है. इस प्रकार सरकार की उदासीनता के कारण किसान को बहुत बड़ा नुक्सान उठाना पड़ रहा है. यह भी ज्ञात हुआ है कि पंजाब और हरियाणा में धान का खरीद मूल्य 1450 रुपए चल रहा है.

एक और जहाँ कम वर्षा होने के कारण धान की पैदवार में बहुत गिरावट आई है वहीँ दूसरी ओर सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को धान का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. इस में सरकार और अधिकारियों की मिलीभगत प्रतीत होती है क्योंकि धान की सरकारी खरीद न करके व्यापारियों और चावल मिल मालिकों को मनचाहे रेट पर धान खरीदने की छूट दी गयी है. श्री दारापुरी ने आगे कहा है कि किसानों ने उन्हें  बताया कि खीरी जिले का कोई भी उच्च अधिकारी धान की सरकारी खरीद न होने के बारे में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं हो रहा है. इस से किसानों में बहुत आक्रोश व्याप्त है और वे इस सम्बन्ध में जल्दी ही जिला मुख्यालय पर बड़ा धरना देने वाले हैं.

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