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जागरण कर्मचारियों को मिली बड़ी सफलता, दिल्ली श्रम विभाग ने बर्खास्तगी पर लगाई रोक

नई दिल्ली/नोएडा। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर दो साल से संघर्ष कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों को बड़ी सफलता मिली है। नई दिल्ली जिले के श्रम न्यायालय ने जागरण कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए दैनिक जागरण द्वारा कर्मचारियों के लगातार किये जा रहे टर्मिनेशन पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि गत 4 मार्च को कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए नई दिल्ली स्थित जिला श्रम कार्यालय के अधिकारियों ने कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर रोक लगाने का आदेश दैनिक जागरण प्रबंधन को दिया था। लेकिन जागरण प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए कर्मचारियों को बर्खास्तगी के पत्र देने जारी रखे थे। मंगलवार को नई दिल्ली जिले में एक बार फिर श्रम विभाग ने जागरण प्रबंधन और कर्मचारियों के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। माननीय श्रम अधिकारी ने जागरण प्रबंधन से श्रम न्यायालय के आदेश की अवमानना करने पर 31 मार्च को जवाब देने को कहा है।

नई दिल्ली/नोएडा। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर दो साल से संघर्ष कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों को बड़ी सफलता मिली है। नई दिल्ली जिले के श्रम न्यायालय ने जागरण कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए दैनिक जागरण द्वारा कर्मचारियों के लगातार किये जा रहे टर्मिनेशन पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि गत 4 मार्च को कर्मचारियों के पक्ष में फैसला देते हुए नई दिल्ली स्थित जिला श्रम कार्यालय के अधिकारियों ने कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर रोक लगाने का आदेश दैनिक जागरण प्रबंधन को दिया था। लेकिन जागरण प्रबंधन ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए कर्मचारियों को बर्खास्तगी के पत्र देने जारी रखे थे। मंगलवार को नई दिल्ली जिले में एक बार फिर श्रम विभाग ने जागरण प्रबंधन और कर्मचारियों के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। माननीय श्रम अधिकारी ने जागरण प्रबंधन से श्रम न्यायालय के आदेश की अवमानना करने पर 31 मार्च को जवाब देने को कहा है।

साथ ही कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर भी रोक लगाने को कहा है। इसे इन्साफ की लड़ाई लड़ रहे जागरण कर्मचारियों के पक्ष में बड़ी जीत माना जा रहा है। माननीय श्रम अधिकारी के समक्ष जागरण कर्मचारियों के अधिवक्ता श्री विनोद पाण्डेय द्वारा दिए गए अकाट्य तर्कों का जागरण के वकील कोई जवाब नहीं दे सके। श्री पाण्डेय ने वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में अखबार के कर्मचारियों को दिए गए अधिकारों को प्रमुखता से माननीय श्रम अधिकारी के सामने रखा और कर्मचारियों के पक्ष में जीत का मार्ग प्रशस्त किया। इस दौरान कई बार जागरण प्रबंधन के वकील बगलें झांकते नजर आये। माननीय श्रम न्यायालय के फैसले से जागरण कर्मचारियों में जहाँ ख़ुशी का माहौल है वहीँ प्रबंधन को मुंह की खानी पड़ी है। गौरतलब है कि जागरण प्रबंधन अपनी लाख कोशिशों के बाद भी कर्मचारियों की एकता को तोड़ने में नाकाम रहा है।

निर्णायक मोड़ पर मजीठिया आंदोलन, सतर्क रहें आंदोलनकारी

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर दो साल से चला आ रहा संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर आ गया है। अब तक माननीय सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई में देश के सभी राज्यों से वेज बोर्ड की सिफारिशों के लागू होने के सम्बन्ध में रिपोर्ट आ चुकी है और कर्मचारियों के उत्पीड़न पर माननीय अदालत में शपथ पत्र दिए जा चुके हैं। यह भी स्पष्ट है कि अब तक हुई सुनवाइयों में माननीय न्यायालय का रुख अखबार मालिकों के प्रति बेहद सख्त रहा है और 14 मार्च जो सुनवाई हुई उसके बाद मालिकों के होश उड़े हुए हैं। गौरतलब है कि 7 फरवरी 2014 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि अखबार संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए मजीठिया वेज बोर्ड द्वारा दी गयी सिफारिशें पूरी तरह उचित हैं और कर्मचारियों को अप्रैल 2014 से इसका लाभ दिया जाना चाहिए।

माननीय अदालत द्वारा कर्मचारियों को निश्चित अवधि का एरियर देने का भी आदेश अखबार मालिकों को दिया गया था। लड़ाई की शुरुआत से ही अपनी हार सुनिश्चित देख अखबार मालिकों ने कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने से लेकर उन्हें धमकाने और बरगलाने तक कई हथकंडे अपनाये लेकिन दैनिक जागरण व अन्य अखबार समूहों में कार्यरत कर्मचारियों ने इन्साफ की इस लड़ाई में उनकी हर कुटिल चाल को विफल कर दिया। अब कर्मचारियों को बेहद सतर्क रहने की जरुरत है क्योंकि इस निर्णायक समय में अखबार मालिकान दबाव बनाकर या अन्य कोई धूर्त हरकत कर आंदोलित कर्मचारियों को उनके हक़ से वंचित कर सकते हैं। इसलिए आंदोलित कर्मचारियों को श्रम कार्यालयों से लेकर माननीय हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक चल रही इस लड़ाई को बेहद सावधानी से लड़ने की जरुरत है क्योंकि दिल्ली-एनसीआर के पत्रकार संगठनों और विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि आंदोलित कर्मचारी अपने हक़ की लड़ाई जीतने जा रहे हैं। चर्चा यह भी है कि अदालत में होने वाली अगली सुनवाई से पहले ही अखबार मालिकान आंदोलित कर्मचारियों के समक्ष सरेंडर कर सकते हैं।

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