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नक्सलियों व पुलिस के बीच फंसे बस्तर के पत्रकार, दोनों पक्षों की तरफ से एक पक्षीय पत्रकारिता करने का दबाव

जगदलपुर : बस्तर में पत्रकारों पर हो रहे कथित पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वाले पत्रकार कमल शुक्ल ने सभी पत्रकारों से इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है। श्री शुक्ल ने कहा कि बस्तर में पत्रकारिता करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। पत्रकारों को झूठे मामलों में फंसा कर जेल भेजा जा रहा है और इस बात का विरोध करने वालों को प्रलोभन दिया जा रहा है। श्री शुक्ला ने कहा कि इस आंदोलन से अलग हो जाने उन पर चौतरफा दबाव डाला जा रहा है। बस्तर में पदस्थ एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने उन्हें एक करोड़ रूपये के साथ यू.एस. में छ: महीने रहने की व्यवस्था करने की बात कही है। प्रलोभन को अस्वीकार करने पर उन्हें धमकी भी मिल रही है।

श्री शुक्ल ने कहा कि पहली बार ऐसी स्थिति निर्मित हुई है कि पत्रकारों को जेल भरने की नौबत आन पड़ी है। बस्तर के दो पत्रकार सोमारू नाग और संतोष यादव को छग जन सुरक्षा कानून के सहारे जेल में बंद कर दिया गया है जबकि हाल ही के वर्षों में बस्तर के दो पत्रकार साई रेड्डी और नेमीचंद जैन नक्सलियों के हाथों मारे जा चुके हैं। दोनों तरफ के लोग यहां के पत्रकारों से एक पक्षीय पत्रकारिता करवाना चाहते हैं जो कि संभव नहीं है। एक पक्ष धमकी देकर झूठे मामलों में फंसा रहा है दूसरा पक्ष सरे राह पत्रकारों की हत्या कर रहा है। हमारी मांग है कि इन विसंगतियों को दूर करने के लिए अतिशीघ्र एक आयोग का गठन कर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में सार्थक पहल की जाये।

वर्तमान में जेल में बंद दोनों पत्रकारों को मुखबिर बनाने की कोशिश की गई। प्रलोभन दिया गया और ना मानने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया गया। संतोष के मामले में पुलिस के पास कोई ठोस आधार नहीं है जिसकी वजह से पांच माह पुराने एक मामले में चश्मदीद द्वारा संतोष का नाम लिया जा रहा है। इससे पुलिस की मानसिकता फिर एक बार उजागर हुई है। इसी प्रकार सोमारू के खिलाफ भी पुलिस कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है। श्री शुक्ल ने कहा है कि यदि समय रहते पत्रकार इस दमन के खिलाफ खड़े नहीं होते तो आने वाले समय में बस्तर में पत्रकारिता करना एक बहुत बड़ी चुनौती बन जायेगी।

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