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दुख-सुख

15 वर्षों तक बिना नहाये-धोये एक जगह पड़े पड़े जीवन गुजार रहे श्किजोफ्रेनिया के मरीज की हालत देख मैं दहल गया

: इलाज को आगे आये ‘मदद’ के संजीव भोजराज : ताज हेयर सैलून के महेंद्र सिंह और जीजीयू के रोताहश ने उनका हाथ बंटाया : हिसार : सभी लोगों के द्वारा समस्त प्रयोजनों से भुला दिये गये श्किजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रस्त एक व्यक्ति के लिए मदद नामक संस्था के संजीव भोजराज खुदाई खिदमतगार बनकर आये। उन्होंने पहल करते हुए 18 मार्च शुक्रवार को दोपहर में ताज हेयर सैलून के मालिक महेंद्र सिंह और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में क्लर्क काम करने वाले रोताहश की मदद से 15 वर्षों से एक ही जगह के इर्दगिर्द जीवन गुजार देने वाले रामकुमार नामक शख्स को पास के ही एक निजी मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करवाया, जहाँ पर उसे कम से कम एक हफ्ते तक रखा जाएगा। इसके बाद उसका नियमित इलाज तो शायद ताजिंदगी चले। श्री महेंद्र सिंह ने अस्पताल में उसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी ली है। वे उसके लिए भोजन आदि का प्रबंध करेंगे।

: इलाज को आगे आये ‘मदद’ के संजीव भोजराज : ताज हेयर सैलून के महेंद्र सिंह और जीजीयू के रोताहश ने उनका हाथ बंटाया : हिसार : सभी लोगों के द्वारा समस्त प्रयोजनों से भुला दिये गये श्किजोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से ग्रस्त एक व्यक्ति के लिए मदद नामक संस्था के संजीव भोजराज खुदाई खिदमतगार बनकर आये। उन्होंने पहल करते हुए 18 मार्च शुक्रवार को दोपहर में ताज हेयर सैलून के मालिक महेंद्र सिंह और गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में क्लर्क काम करने वाले रोताहश की मदद से 15 वर्षों से एक ही जगह के इर्दगिर्द जीवन गुजार देने वाले रामकुमार नामक शख्स को पास के ही एक निजी मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करवाया, जहाँ पर उसे कम से कम एक हफ्ते तक रखा जाएगा। इसके बाद उसका नियमित इलाज तो शायद ताजिंदगी चले। श्री महेंद्र सिंह ने अस्पताल में उसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी ली है। वे उसके लिए भोजन आदि का प्रबंध करेंगे।

यहाँ स्थित पुष्पा कांप्लेक्स के पास छाबड़ा मेडिकल स्टोर के सामने के चबूतरे को इसने अपने जीवन का केंद्र बना लिया था। आसपास के दुकानदार नियमित भोजन तो नहीं देते थे पर अपनी दुकान की खाद्य-सामग्री जरूर उसे दे दिया करते थे। श्री भोजराज बताते हैं कि मानसिक रोगियों के मामले में किस्से सुनाने वाले निर्दयी-संवेदनहीन लोग तो बहुतेरे मिलेंगे, लेकिन उनमें से कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आएगा। अगर आप किसी भी रूप में सहयोग करना चाहते हैं तो मरीज के गाँव के महेंद्र सिंह से 91+9466475263 पर संपर्क कर सकते हैं। उनके पास से आपको अस्पताल का भी ब्यौरा प्राप्त हो जाएगा।

इन पंक्तियों का लेखक भी उस समय वहाँ मौजूद था और उसने देखा कि इलाज शुरू होने माने ड्रिप लगाए जाने से पहले किस तरह से डिटाल और साबुन-शैंपू से उसे नहला-धुलाकर नये कपड़े पहनाये गये। क्योंकि इसके बिना भंयकर दुर्गंध के चलते अस्पताल का स्टाफ उसके पास जाने को तैयार नहीं था। यह सोचकर भी मन सिहर उठता है कि कोई शख्स कैसे 15 वर्षों तक बिना नहाये-धोये और सामान्य भोजन किये जीवन गुजारता रहा है। जब अस्पताल ले जाने की कोशिश की जा रही थी तो यह शख्स शुरू-शुरू में चबूतरे के पास से हिलने को तैयार नहीं था पर जैसे ही श्री भोजराज ने कहा कि कल तूने के कांड किया था वैसे ही उसको गुस्सा आ गया और उनके साथ आवेश में चल पड़ा। वह गुस्से में बड़बड़ा रहा था मुझको पता मैंने कौन सा कांड किया है। आखिर अस्पताल पहुँचने पर खुदा-खुदा करके उसे इंजेक्शन लगा दिया गया और इसके बाद ही वह काबू में आया।

आसपास के दुकानदार बताते हैं कि उसकी दो बहने हैं। एक तो जींद में रहती है, जो कि उससे कभी-कभार उससे मिलने आया करती थी पर जो दूसरी है और पास में ही आजाद नगर की कॉलोनी में रहती है, उसे उसके पास आते कभी नहीं देखा गया। लोग बता रहे थे कि इसका एक सगा भाई भी है, जो फौज में है। अपुष्ट जानकारी के अनुसार मरीज के पास अच्छी-खासी जमीन है और पत्नी का शायद स्वर्गवास हो चुका है। वहाँ बैठे चाय पी रहे अखबार विक्रेता तिवारी ने कहा कि कलयुग में संपत्ति के लिए कुछ भी हो सकता है। पर इस बाबत हमारे पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

हिसार से वीरेंद्र सिंह की रिपोर्ट.

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