कई चुनौतियों से जूझते हुए पांचवी बार तमिलनाडु में सत्ता की बागडोर संभालने वाली अन्नाद्रमुक नेता जे जयललिता ने यह साबित कर दिया है कि राज्य की राजनीति में वह एक करिश्मा है, जिसका उनके विरोधी भी लोहा मानते हैं। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विशेष अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद उनके विरोधी यह मानकर चल रहे थे कि जयललिता का राजनीतिक जीवन अब पूरी तरह खत्म हो चुका है पर उनकी जीवटता और संघर्ष करने के हौसले ने उन्हें इस संकट से भी बाहर निकाल दिया और आखिरकार वह कर्नाटक उच्च न्यायालय से बरी कर दी गयीं और आज पांचवी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हो गयीं।
अपने जीवन के 67 वर्ष पूरी कर चुकी जयललिता को उनके राजनीतिक विरोधियों ने जब भी घेरना चाहा है, वह अपने राजनीतिक कौशल से उन्हें मात देती आयी हैं। यह उनकी किस्मत कह लीजिये या करिश्मा कि वह आज राजनीति के जिस मुकाम पर हैं, वहां तक का लंबा सफर उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अपनी लगन और प्रतिभा से हासिल किया है न की किसी राजनेता के परिवार से जुड़कर। अपने तीस दशक से ज्यादा के लंबे राजनीतिक जीवन में कई उतार चढ़ाव देख चुकी जयललिता ने अपने सख्त फैसलों की वजह से तमिलनाडु की आयरन लेडी के रुप में अपनी पहचान बनाई है।
राज्यसभा का सदस्य बनने के उपरांत वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद देश में चली सहानुभूति की लहर का फायदा उठाते हुए वह पहली बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री चुनी गईं। दूसरी बार उन्हें यह अवसर वर्ष 2001 में मिला, लेकिन महज पांच महीने बाद ही उच्चतम न्यायालय द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी पाए जाने के कारण उन्हें पद छोडना पडा। हालांकि मार्च 2002 में वह फिर मुख्यमंत्री बन गईं।
इसके बाद वर्ष 2011 में हुए विधानसभा चुनावों में अन्नाद्रमुक पार्टी को मिली भारी विजय के दम पर वह चौथी बार मुख्यमंत्री के पद पर काबिज हुईं लेकिन संकट ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोडा और गत वर्ष सितंबर में एक विशेष अदालत द्वारा आय से अधिक की संपत्ति अर्जित करने के मामले में दोषी ठहराए जाने पर उन्हें अपना पद छोड़ना पडा।
विशेष अदालत के इस फैसले को जयललिता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी और इस कानूनी लड़ाई में जीत का सेहरा एक बार फिर उनके सिर बंधा और 11 मई को न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया। अपने चाहने वालों और और पार्टी के लोगों के बीच ‘पुरत्ची थलईवी’ अर्थात क्रांतिकारी नेता और प्यार से अम्मा के नाम से पहचानी जाने वाली जयललिता अब पांचवी बार तमिलनाडु में सत्ता की बागडोर संभालने जा रही हैं।
तमिल फिल्मों में एक स्थापित अभिनेत्री रह चुकी जयललिता को राजनीति में आने की प्रेरणा कई फिल्मों में उनके सह अभिनेता रहे एम जी रामचंद्रन से मिली थी। वह उन्हें ही अपना राजनीतिक गुरु मानती हैं। उनके कहने पर ही वह 1982 में उनकी पार्टी अन्नाद्रमुक में शामिल हुयी थीं। उस समय उन्हें पार्टी का प्रचार सचिव बनाया गया था। अपनी इस जिम्मेदारी को उन्होंने जिस खूबी से निभाया, उसे देखकर पार्टी के बड़े बड़े नेता आश्चर्य चकित रह गए थे। इसी दौरान पार्टी की ओर से उन्हे राज्यसभा के लिए नामित किया गया।
रामचंद्रन जब बीमार पड़े और इलाज के लिए अमेरिका गये थे, तब जयललिता आम चुनाव में खडी हुईं और 1984 का राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ा। इन चुनावों में जयललिता को भारी सफलता हासिल हुई। रामचंद्रन के 1987 में निधन के बाद अन्नाद्रमुक में विभाजन हो गया। रामचंद्रन की पत्नी जानकी रामचंद्रन और सुश्री जयललिता के नेतृत्व में पार्टी के दो फाड हो गए।
अन्नाद्रमुक की महासचिव के पद पर रहते हुए सुश्री जयललिता ने जनवरी 1989 में विधानसभा चुनाव लड़ा और वह बोदिनयाक्क्नूर से विजयी रहीं। इसी के साथ वह तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष की पहली महिला नेता बनीं। फरवरी 1989 में अन्नाद्रमुक के दोनों धड़े एक हो गये और उन्होंने सर्वसम्मति से जयललिता को अपना नेता चुना।
इसके बाद 25 मार्च 1989 में राज्य विधानसभा में एक दुखद घटना घटी, जिसमें जयललिता पर हमला हुआ और उन्हें फटी साड़ी में सदन से बाहर निकलना पड़ा था। उस समय उन्होंने वादा किया था कि वह मुख्यमंत्री के रूप में सदन में वापस लौटेंगी। उनकी यह वादा 1991 में सच साबित हुआ और उनकी पार्टी 234 में से 225 सीटें हासिल करके प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयी और पहली बार मुख्यमंत्री बनीं।
जयललिता को 1996 में हुए विधानसभा चुनावों में शिकस्त मिली और उनके बाद सत्ता में आयी द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज किये।
कर्नाटक के मैसूर में 24 फरवरी 1948 में जन्मीं जयललिता ने तमिल, तेलुगु, मलयालम और अंग्रेजी फिल्मों में काम किया। उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों में भी काम किया। फिल्मों के अलावा जयललिता को पढ़ने का भी शौक है। फिल्मों में काम के दौरान जब भी उन्हें मौका मिलता था, वह किसी कोने में बैठकर किसी न किसी किताब को पढ़ने मे लग जातीं। पढ़ने के जबरदस्त शौक के कारण ही उनके पास बडी संख्या में किताबें और एक निजी लाइब्रेरी भी है


