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कान्हा की नगरी में कर्ज के बोझ तले दबे किसान ने आत्महत्या की

कान्हा रे, कान्हा अगले जनम मोहे किसान न बनाना

-प्रवीण कुमार सिंह-

राधे-राधे… ब्रज की होली टीवी पर देखते-देखते हम भी मथुरा पहुंचे, होली देखने के लिए। होली को लेकर मन में बहुत उमंग था क्योंकि होली मेरा सबसे पसन्दीदा त्यौहार है। यहां लोगों ने राधे-राधे बोल के स्वागत किया तो मन बहुत प्रसन्न हुआ। लेकिन हुआ ये कि होली तो बाद में खेली जानी थी, साथियों से पता चला कि यहां के एक युवा किसान ने कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण आत्महत्या कर लिया है। अब साथियों के संग गोबर्धन ब्लाक के बोरपा गांव पहुंचे जहां के 35 साल के युवा किसान गोबिन्द सिंह रहने वाले थे। घरवालों ने ओवरसीज बैंक का नोटिस दिखाया जिस पर किसान क्रेडिट कार्ड का लगभग डेढ़ लाख कर्ज था। कर्ज न देने पर खेत कुर्क-नीलाम करने और जेल भेजने के बारे में लिखा था।

कान्हा रे, कान्हा अगले जनम मोहे किसान न बनाना

-प्रवीण कुमार सिंह-

राधे-राधे… ब्रज की होली टीवी पर देखते-देखते हम भी मथुरा पहुंचे, होली देखने के लिए। होली को लेकर मन में बहुत उमंग था क्योंकि होली मेरा सबसे पसन्दीदा त्यौहार है। यहां लोगों ने राधे-राधे बोल के स्वागत किया तो मन बहुत प्रसन्न हुआ। लेकिन हुआ ये कि होली तो बाद में खेली जानी थी, साथियों से पता चला कि यहां के एक युवा किसान ने कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण आत्महत्या कर लिया है। अब साथियों के संग गोबर्धन ब्लाक के बोरपा गांव पहुंचे जहां के 35 साल के युवा किसान गोबिन्द सिंह रहने वाले थे। घरवालों ने ओवरसीज बैंक का नोटिस दिखाया जिस पर किसान क्रेडिट कार्ड का लगभग डेढ़ लाख कर्ज था। कर्ज न देने पर खेत कुर्क-नीलाम करने और जेल भेजने के बारे में लिखा था।

किसान गोबिन्द सिंह ये बर्दाश्त नहीं कर पाये। बीते 18 मार्च को फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिये। अपने पीछे 2 लड़की, 1 लड़का और पत्नी का भरा-पूरा परिवार छोड़ गये। गांववालों ने बताया कि साहब गांव के 95 प्रतिशत लोग कर्ज में डूबे हुए हैं, का करें? जवाब मेरे पास भी नहीं है। वैसे एक कर्जदार माल्या साहब भी हैं, जिन्हें ऐसी कोई नोटिस मिली की नहीं, ये नहीं मालूम पर 9 हजार करोड़ रूपया लेकर शान से रफूचक्कर हो गये, ये सबको मालूम है। अपने माल्या साहब रईस उद्योगपति हैं और बेचारा गोबिन्द सिंह एक किसान। शायद फर्क ये है?

देश की राजधानी दिल्ली से 150 किमी दूर भगवान कृष्ण और राधा की नगरी का ये हाल है, जो हृदय विदारक है। शायद यहां आने वाले देशी-विदेशी भक्तों को इस घटना का पता न चले। वे भगवान कृष्ण और राधा-रानी के दर्शन से अभिभूत हो कर चले जाय।  यहां से जाने के बाद उन तमाम भक्तों के दिल दिमाग में राधा-कृष्ण की रासलीला और होली की याद रहेंगी। लेकिन एक किसान जो भगवान कृष्ण के पावन भूमि मथुरा में जन्म लेने के बाद भी देश के दूसरे किसानों की तरह आत्महत्या करना पड़ा। …उसकी किस्मत भी दूसरे किसानों जैसी ही रही।  जहां पूरा देश होली के खुशी में सराबोर होगा। हम एक दूसरे को रंग गुलाल-अबीर लगाकर खुश होंगे, बधाई देगें, हैप्पी होली बोलेंगे और हैप्पी होली का मोबाईल से मैसेज भेजेंगे, वहीं देश के एक अन्नदाता का परिवार गम मना रहा होगा। 

लेखक प्रवीण कुमार सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं. संपर्क : 09968599320


(यह आर्टकिल भड़ास के पास मार्च महीने के शुरुआत में ही आ गया था छपने के लिए पर किन्हीं कारणों से यह पेंडिंग में पड़ा रहा. देर से प्रकाशित करने के लिए माफी. -एडिटर, भड़ास4मीडिया)

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