Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

मनोरंजन

खेलेंगे हम होली : ये जितने भी लोग पानी बचाने का आह्वान करते हैं, सब के सब टब में नहाते हैं!

होली है. पर्यावरण पर बहस छिड़ेगी ही. मीडिया सूखे की तस्वीरें दिखायेगा. बताएगा कि महाराष्ट्र में किसान पानी की कमी वजह से सुसाइड कर रहे हैं. हमको पानी बचाना है. इस बार जो हमने पानी से होली खेली तो धरती पर २/३ की जगह १/१० जगह भाग ही पानी रह जायेगा. फिर “तिलक होली” टाइप कोई नया जुमला उछाला जायेगा. ये भी बताएंगे कि ग्रीन हाउस इफेक्ट भी होली पर पानी बर्बाद करने के कारण हुआ हैय ओजोन में छेद भी होली के ही कारण हुआ है. फिर अपन सब “सूखी होली” खेलेंगे और शाम को थम्स अप, पेप्सी, चढ़ाएंगे बिना ये जाने कि कितना पानी इन्हें बनाने में बर्बाद होता है. मटन चिकन का प्रोग्राम भी बनेगा क्योंकि इनको धोने में भी पानी बर्बाद नहीं होता.

होली है. पर्यावरण पर बहस छिड़ेगी ही. मीडिया सूखे की तस्वीरें दिखायेगा. बताएगा कि महाराष्ट्र में किसान पानी की कमी वजह से सुसाइड कर रहे हैं. हमको पानी बचाना है. इस बार जो हमने पानी से होली खेली तो धरती पर २/३ की जगह १/१० जगह भाग ही पानी रह जायेगा. फिर “तिलक होली” टाइप कोई नया जुमला उछाला जायेगा. ये भी बताएंगे कि ग्रीन हाउस इफेक्ट भी होली पर पानी बर्बाद करने के कारण हुआ हैय ओजोन में छेद भी होली के ही कारण हुआ है. फिर अपन सब “सूखी होली” खेलेंगे और शाम को थम्स अप, पेप्सी, चढ़ाएंगे बिना ये जाने कि कितना पानी इन्हें बनाने में बर्बाद होता है. मटन चिकन का प्रोग्राम भी बनेगा क्योंकि इनको धोने में भी पानी बर्बाद नहीं होता.

दोस्तों, पानी बचाने के हजार तरीके हैं और हजारों मौके. चाहे वो आपकी डे टू डे लाइफ में शावर से नहाना हो या आपका टैप खोलकर टूथ पेस्ट करना हो या बेमौके पर अपनी गाडी पानी से धोना हो या चाहे आपका आर. ओ. का पानी शुद्ध करना हो. क्या इन सभी मौकों पर पानी बर्बाद नहीं होता? फिर होली पर ही पानी बचाने का नाटक क्यों? ये जितने भी लोग होली पर पानी बचाने का आह्वान करते हैं सब के सब टब में नहाते हैं. १ बार नहाने में ही लगभग २०० से ३०० लीटर पानी बर्बाद करते हैं. टूथ पेस्ट भी करते है तो टैप खोलकर. रोज ऑफिस जाते हैं तो चमचमाती धुली हुई गाड़ी में. तो फिर ये हिपोक्रेसी क्यों?

ये तमाशा सिर्फ होली पर ही नहीं किया जाता है दीपावली पर भी होता है क्योंकि साल में सिर्फ और सिर्फ उसी दिन पर्यावरण की ऐसी की तैसी होती है. बाकी जब न्यू इयर सेलिब्रेशन होता है तब कहाँ आतिशबाजी धुआं करती है? जब ओलंपिक की ओपनिंग सेरेमनी होती है तब क्या आतिशबाजी आपको ओजोन का छेद भरती हुई नज़र आती है? क्यों करवाचौथ महिला विरोधी हो जाता है, क्यों महिषासुर वध दलित विरोधी हो जाता है? आखिर क्यों?

पर इस बार अपन ऐसा नहीं करेंगे. पिछले कई दिनों से १५ की जगह लगभग १२ लीटर पानी से नहाते हैं. आजकल कपडे ३ की जगह ४ दिन पहन कर धो रहे हैं. क्यों? क्युंकि हम तो जमके होली मनाएंगे क्युंकि हम तो जम कर रंग लगायेंगे और जम कर पानी बहायेंगे 🙂 करते रहो तुम विधवा प्रलाप, लगे रहे तुम्हे इसी तरह जुलाब. 

अनुज अग्रवाल
[email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs

You May Also Like

ये दुनिया

रामकृष्ण परमहंस को मरने के पहले गले का कैंसर हो गया। तो बड़ा कष्ट था। और बड़ा कष्ट था भोजन करने में, पानी भी...

सोशल मीडिया

यहां लड़की पैदा होने पर बजती है थाली. गर्भ में मारे जाते हैं लड़के. राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्र में बाड़मेर के समदड़ी क्षेत्र...

दुख-सुख

: बस में अश्लीलता के लाइव टेलीकास्ट को एन्जॉय कर रहे यात्रियों को यूं नसीहत दी उस पीड़ित लड़की ने : Sanjna Gupta :...

ये दुनिया

बुद्ध ने कहा है, कि न कोई परमात्मा है, न कोई आकाश में बैठा हुआ नियंता है। तो साधक क्या करें? तो बुद्ध ने...