Samarendra Singh : एक बात तो है. समाजवादियों जितना उदार और बड़े दिल वाला कोई नहीं. देश-दुनिया के तमाम अपराधियों के लिए इनका दिल धड़कता है. भ्रष्टाचारी हों, बलात्कारी हों, कातिल हों, लोगों को जिंदा जलाने वाले हों, दंगाई हों, नरपिशाच हों… इनके दिल में सबके लिए करुणा है. ये परेशान हो जाते हैं जब किसी बेकसूर को जिंदा जलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठती है. ये परेशान हो जाते हैं जब बच्चों को काट कर खाने वालों के खिलाफ कोई मुहिम चलाई जाती है. ये परेशान हो जाते हैं जब बलात्कार के आरोपियों को पकड़ने की मांग की जाती है. न्याय की गुहार लगाना इनकी नजर में अमानवीय बात है. कानून की नजर में ये भले ही संगीन और क्रूरतम अपराध हों, लेकिन इनकी नजर में ये मामूली बाते हैं. गांधी, लोहिया और जयप्रकाश नारायण की विचारधारा का ये पतनकाल है. ये अपराध और भ्रष्टाचार का स्वर्णिम युग है. यहां अपराधी और भ्रष्टाचारी सुरक्षित हैं. अगर कोई सुरक्षित नहीं है तो वह है आम आदमी.
लेकिन ये भूल कर रहे हैं. देर सबेर इन्हें भी भोगना होगा. भले ही ये जाति और धर्म के कितने भी किले बना कर खुद को सुरक्षित करने की कोशिश क्यों न कर लें… इतिहास को पढ़ने वाले और अतीत को जानने वाले यह जानते हैं कि जो पौध इन्होंने लगाई है उसका फल इन्हें भी मिलेगा. ताकतवर से ताकतवर साम्राज्य का पतन हुआ है. निरंकुश शासकों के वंशज भी आम लोगों के इसी समंदर में मर-खप गए हैं. इनके वारिस भी इनकी बनाई व्यवस्था का दंश भोगेंगे. अगर किस्मत और उम्र ने साथ दिया तो हम देखेंगे कि इन तानाशाहों और अमानवीय लोगों का पतन कैसे होता है. हम देखेंगे कि इनके वारिस किस तरह इनकी जहरीली बेलों में लिपट कर दम तोड़ते हैं. कोई कितनी पीढ़ियां सुरक्षित कर लेगा. दो-तीन या फिर चार-पांच … उसके बाद? उसके बाद न्याय जरुर होगा. यहां न्याय वो न्याय नहीं है जो होना चाहिए. यहां न्याय वो न्याय है जो ये कर रहे हैं. हमारे इन हुक्मरानों के वंशज भी उसी न्याय के कुचक्र से पिसेंगे जिस न्याय कुचक्र में इन्होंने हम तमाम आम आदमियों को पिसने के लिए छोड़ दिया है. इनके वंशज भी उसी आग में झुलसेंगे जिस आग में जगेंद्र सिंह जैसे एक आम आदमी को झुलसाया गया है. समय की बात है… ये बचेंगे नहीं. ये बचे तो न ये राज्य बचेगा, ना ये देश बचेगा और ना ही ये धरा बचेगी. हिसाब तो देना ही होगा. आज नहीं तो कल इंसाफ जरुर होगा.
Saleem Akhter Siddiqui : अखिलेश सरकार के लिए कानून व्यवस्था अभिशाप भी बन सकती है, इसका शायद एहसास उसे नहीं है। स्वतंत्र पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाए आने और उसकी मौत के बाद अखिलेश सरकार कठघरे में है। चंद पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज इसका सबूत है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने यह तो माना है कि जगेंद्र के साथ ऐसा कुछ हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था। पत्रकार की हत्या में सरकार के एक मंत्री की संलिप्तता भी सामने आ रही है। हत्या में मंत्री की क्या भूमिका है, इसकी जांच होनी चाहिए। लेकिन क्या इससे पहले सरकार का यह कर्तव्य नहीं बनता था कि जांच होने तक उन्हें मंत्री पद से मुक्त कर दिया जाता? वैसे भी पत्रकार का मृत्यु बयान दिया गया बयान बहुत कुछ कह देता है। क्या पत्रकार का मृत्यु पूर्व दिया गया बयान मंत्री की गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त आधार नहीं है?
पत्रकार द्वय समरेंद्र सिंह और सलीम अख्तर सिद्दीकी के फेसबुक वॉल से.


