लानत हो उन ईमानदार पत्रकारों पर जो बेईमानों से मिलकर खामोश हो गए

लखनऊ : पत्रकारों को ब्लैक मेलर कौन कहता है? पत्रकारो को दलाल कौन कहता है? पत्रकारों की बेइज़्ज़ती कौन करता है? पत्रकारों की पिटाई कौन करता है? पत्रकारों को जान से कौन मार डालता है? ये सब पुलिस वाले और नेता करते कराते हैं. पत्रकार रात दिन जिनकी हनक धमक बनाते हैं वही नेता और पुलिस लुटेरे हो जाते हैं, समाज के ब्लैकमेलर बन जाते हैं. नेता बनने के बाद वोटरों की बेइज़्ज़ती करने से नहीं चूकते… दलाली से बाज़ नहीं आते… पूरी निधि पी जाते हैं..

जब उनकी हक़ीक़त एक पत्रकार जान जाता है तो थाने में बुलाकर मार दिया जाता है। नेता खामोश। सरकार ख़ामोश। मरने वाले पर इलज़ाम लगाकर ईमानदारी का तमगे में बेईमान पत्रकारों की टीम भी खामोश। सब मैनेज। लानत हो पत्रकारों को बेईमान कहने वाले बेईमानों पर। लानत हो उन ईमानदार पत्रकारों पर जो बेईमानों से मिलकर खामोश हो गए। उठो, जुटो हक़ के लिए… लड़ने वालों का साथ दो… नहीं तो तुमको मार दिया जायगा या तुम्हें ब्लैकमेलर कहकर ज़लील किया जाएगा…

रिजवान मुस्तफा
पत्रकार
बाराबंकी