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नेपाल में हस्तक्षेप बंद करो…

भारत के 100 से अधिक लोगों जिनमें बुद्धिजीवियों के अलावा अनेक वामपंथी, जनतांत्रिक और क्रांतिकारी धारा के प्रमुखों ने एक वक्तव्य जारी कर नेपाल के आंतरिक मामलों में भारत सरकार के हस्तक्षेप का विरोध किया है। वक्तव्य में इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की गयी है कि 20 सितंबर को नेपाल के नये संविधान की घोषणा हो गयी। संविधान की घोषणा पर भारत सरकार की नाखुशी भरी प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा गया है कि ‘अतीत में भारत की विभिन्न सरकारों द्वारा अपनाये गये ‘बड़े भाई’ वाली प्रवृत्ति की वजह से दोनों देशों के बीच संबंधों में कटुता आती रही है जिसे नेपालियों ने भारत की विस्तारवादी नीति के रूप में चिन्हित किया है।’ वक्तव्य में कहा गया है कि ‘यह नेपाली जनता का सार्वभौम अधिकार है कि वह अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करे, यह तय करे कि वहां किस तरह की शासन प्रणाली चाहिए, अपने संविधान की रचना करे और उसमें जिस तरह का परिवर्तन चाहे करे।’ सरकार की मौजूदा नीति पर टिप्पणी करते हुए इसमें कहा गया है कि ‘भारत सरकार ने पड़ोसी देशों के बीच शांतिपूर्ण अस्तित्व के इस सिद्धांत का उल्लंघन किया है।’

भारत के 100 से अधिक लोगों जिनमें बुद्धिजीवियों के अलावा अनेक वामपंथी, जनतांत्रिक और क्रांतिकारी धारा के प्रमुखों ने एक वक्तव्य जारी कर नेपाल के आंतरिक मामलों में भारत सरकार के हस्तक्षेप का विरोध किया है। वक्तव्य में इस बात पर प्रसन्नता जाहिर की गयी है कि 20 सितंबर को नेपाल के नये संविधान की घोषणा हो गयी। संविधान की घोषणा पर भारत सरकार की नाखुशी भरी प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा गया है कि ‘अतीत में भारत की विभिन्न सरकारों द्वारा अपनाये गये ‘बड़े भाई’ वाली प्रवृत्ति की वजह से दोनों देशों के बीच संबंधों में कटुता आती रही है जिसे नेपालियों ने भारत की विस्तारवादी नीति के रूप में चिन्हित किया है।’ वक्तव्य में कहा गया है कि ‘यह नेपाली जनता का सार्वभौम अधिकार है कि वह अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करे, यह तय करे कि वहां किस तरह की शासन प्रणाली चाहिए, अपने संविधान की रचना करे और उसमें जिस तरह का परिवर्तन चाहे करे।’ सरकार की मौजूदा नीति पर टिप्पणी करते हुए इसमें कहा गया है कि ‘भारत सरकार ने पड़ोसी देशों के बीच शांतिपूर्ण अस्तित्व के इस सिद्धांत का उल्लंघन किया है।’

वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख बुद्धिजीवियों के अलावा अनेक वामपंथी, जनतांत्रिक और क्रांतिकारी धारा के प्रमुख नेता शामिल हैं। इनमें एस. सुधाकर रेड्डी, महासचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी/अमरजीत कौर, राष्ट्रीय सचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी/स्वपन मुखर्जी, पोलिट ब्यूरो सदस्य, सीपीआई (एमएल-लिबरेशन)/के. एन. रामचंद्रन, महासचिव सीपीआई (एमएल-रेड स्टार)/देवब्रत विश्वास, महासचिव, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक/अखिलेंद्र प्रताप सिंह, संयोजक, ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट/शिवमंगल सिद्धांतकर, महासचिव, सीपीआई (एमएल-न्यू प्रोलिटेरियन)/रघु ठाकुर, अध्यक्ष, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी/अर्जुन प्रसाद सिंह, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया आदि प्रमुख हैं।
अनेक लेखकों, पत्रकारों, शिक्षाविदों, फिल्मकारों आदि ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किये हैं। इनमें प्रमुख हैं आनंद पटवर्द्धन (फिल्मकार), अनिल सद्गोपाल (शिक्षाविद्), अमित भादुड़ी और निर्मलांगशु मुखर्जी (एकेडमीशिन) मनोरंजन मोहंती (राजनीति विज्ञानी), कमल नयन काबरा और गिरीश मिश्र (अर्थशास्त्री) और असद जैदी, मंगलेश डबराल, पंकज बिष्ट, विष्णु नागर, नीलाभ, पंकज सिंह, विष्णु खरे, रंजीत वर्मा, उज्जवल भट्टाचार्य, मदन मोहन जैसे कवि-कथाकार, शमशुल इस्लाम (रंगकर्मी), गौतम नवलखा, आनंद स्वरूप वर्मा, राहुल पंडिता, अभिषेक श्रीवास्तव, पलाश बिश्वास, जावेद नकवी, अमलेंदु उपाध्याय जैसे पत्रकार आदि।

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