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सूचना आयोग ने मेघालय के उच्च शिक्षा संयुक्त-निदेशक पर ठोका जुर्माना

मेघालय: मेघालय के सूचना आयोग ने चंडीगढ़ के एक्टिविस्ट डॉ. राजिंदर के सिंगला की सूचना के अधिकार कानून के तहत दायर द्वितीय अपील पर फैसला सुनाते हुए मेघालय के उच्च शिक्षा संयुक्त-निदेशक को 5500 रूपये जुर्माना ठोका है। यह जुर्माना उन्हें मांगी गयी सूचना को देरी से देने के लिए लगाया गया है। आयोग के इस निर्णय के अनुसार सूचना देने में 22 दिन की देरी के लिए 250 रूपये प्रति दिन के हिसाब से उच्च शिक्षा संयुक्त-निदेशक को 30 दिन के भीतर 5500 रूपये जुर्माना जमा करने के आदेश दिए गए हैं।

मेघालय: मेघालय के सूचना आयोग ने चंडीगढ़ के एक्टिविस्ट डॉ. राजिंदर के सिंगला की सूचना के अधिकार कानून के तहत दायर द्वितीय अपील पर फैसला सुनाते हुए मेघालय के उच्च शिक्षा संयुक्त-निदेशक को 5500 रूपये जुर्माना ठोका है। यह जुर्माना उन्हें मांगी गयी सूचना को देरी से देने के लिए लगाया गया है। आयोग के इस निर्णय के अनुसार सूचना देने में 22 दिन की देरी के लिए 250 रूपये प्रति दिन के हिसाब से उच्च शिक्षा संयुक्त-निदेशक को 30 दिन के भीतर 5500 रूपये जुर्माना जमा करने के आदेश दिए गए हैं।

मामला चंडीगढ़ के डीएवी कालेज के प्रिंसिपल डा.बी.सी. जोसन की बेटी मंदीप जोसन से संबंधित है। जिसे नकली पीएचडी के आधार पर इसी कालेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस) नियुक्त किया गया था। सिंगला ने 19 नवम्बर 2014 को एक आरटीआई आवेदन के तहत मेघालय सरकार से पूछा था कि सीएम्जे यूनिवर्सिटी की डिग्रियों की वैधता पर सरकार ने क्या निर्णय लिया है। क्या मंदीप ने सरकार को अपनी डिग्री की वैधता जानने के लिए कोई आवेदन दिया था?  क्या इन डिग्रियों की वैधता पर सरकार द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम निर्णय है? मेघालय के संयुक्त सचिव ने सिंगला का आरटीआई आवेदन उच्च-शिक्षा एवं तकनीकी विभाग को भेज दिया। संबंधित सूचना अधिकारी ने जानकारी देने की बजाये इसे अंग्रेजी भाषा में रूपांतरण के लिए जन-संपर्क विभाग को भेज दिया। जबकि आवेदन पहले से ही अंग्रेजी भाषा में टाइप किया गया था। इससे भी अधिक हैरानी तब हुई, जब सूचना अधिकारी ने सिंगला द्वारा पूछे गये सवालों का जवाब देने की बजाये खुद ही नए सवाल गढ़ लिए और तदानुसार उनका उत्तर दे दिया। मेघालय सरकार द्वारा पारदर्शिता और जवाबदेही के इस तरह उड़ाये गये मजाक से पीड़ित सिंगला ने आखिर शिलोंग स्थित राज्य सूचना आयोग से इसकी शिकायत की।
मुख्य सूचना आयुक्त सी डी क्य्न्जिंग ने अपने फैसले में सूचना अधिकारी तथा अपीलीय अधिकारी दोनों को गलत ठहराया है। उनका कहना है की अपीलीय अधिकारी ने उचित फैसला लेने की बजाये सूचना अधिकारी द्वारा की गयी गलतियों को ही ठीक करने की कोशिश की है। जबकि उन्हें उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों तथा सुनवाई के आधार पर अपने प्रशासनिक अधिकार के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी। सूचना अधिकारी को संयुक्त सचिव से 11 दिसम्बर 2014 को आवेदन प्राप्त हुआ था। जिसके अनुसार उन्हें 10 जनवरी 2015 तक सूचना देनी थी। लेकिन इसे 22 दिन देरी से यानि 2 फरवरी को भेजा गया।

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