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एक साल में बड़ा निवेश कराने में असफल रही मोदी सरकार : सीआईआई

नई दिल्लीः इंडस्ट्री संस्था सीआईआई ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले एक साल के दौरान कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं हुआ और बिजनस करने को आसान बनाने के क्षेत्र में काम किए जाने की जरूरत है।सीआईआई के प्रेजिडेंट सुमित मजूमदार ने आसानी से बिजनस करने के वर्ल्ड बैंक की देशों की रैंकिंग में भारत को टॉप-50 में पहुंचाने की सरकार की योजना को महत्वाकांक्षी करार दिया। मोदी सरकार के एक साल पूरा होने के अवसर पर मजूमदार ने कहा, ‘जो नहीं दिखाया गया है, वह है कि देश में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ है। लेकिन इसमें समय लगेगा।’

नई दिल्लीः इंडस्ट्री संस्था सीआईआई ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले एक साल के दौरान कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं हुआ और बिजनस करने को आसान बनाने के क्षेत्र में काम किए जाने की जरूरत है।सीआईआई के प्रेजिडेंट सुमित मजूमदार ने आसानी से बिजनस करने के वर्ल्ड बैंक की देशों की रैंकिंग में भारत को टॉप-50 में पहुंचाने की सरकार की योजना को महत्वाकांक्षी करार दिया। मोदी सरकार के एक साल पूरा होने के अवसर पर मजूमदार ने कहा, ‘जो नहीं दिखाया गया है, वह है कि देश में कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ है। लेकिन इसमें समय लगेगा।’

उन्होंने कहा, ‘मैं सरकार को धीमे और निरंतर विकास करते हए देखना चाहूंगा। इसमें कितना समय लगेगा यह कह पाना मुश्किल है। लेकिन विभिन्न लोगों से मेरी चर्चा के मुताबिक हमें इस साल की तीसरी या चौथी तिमाही से निश्चित तौर पर इसके परिणाम दिखने चाहिए।’ सीआईआई प्रेजिडेंट ने कहा है कि वह बिजनस आसान बनाने के लिए लालफीताशाही पर नियंत्रण लगते हुए देखना चाहेंगे।

यह पूछे जाने पर कि जमीनी स्तर पर बिजनस करना आसान बनाना जमीनी स्तर पर कब दिखने शुरू होगा। मजूमदार ने कहा, ‘यह बहुत जल्द ही जमीनी स्तर पर दिखना शुरू हो जाएगा। लेकिन इसके पूरे होने में एक-दो साल का समय लगेगा।’

देश में बड़े निवेश के न आने के बारे में उन्होंने कहा, जब तक बिजनस करने को आसान बनाने के लिए कदम नहीं उठाए जाते तब तक निवेश के मामले में अनिच्छा ही दिखेगा क्योंकि अगर हम देखें तो जो विदेशी निवेशक यहां आए, 3-4 साल तक कोशिश की और मोहभंग के कारण वापस लौट गए। उन्होंने कहा कि पिछले 4-5 साल में देश में बमुश्किल कोई बड़ा निवेश हुआ है और यह भारतीय निवेशकों के बीच भी चिंता का कारण है। उन्होंने कहा, ‘इसका कारण उच्च ब्याज दर को बताया जाता है लेकिन निवेश न आने का सिर्फ यही एक कारण नहीं हो सकता। इसका कारण है कि निवेशकों को पिछली सरकार के प्रति विश्वास का अभाव था।’

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