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आरजी पर भारी पीके : पुराने कांग्रेसी घुटन में… बड़ी साज़िश का अंदेशा…!

नई दिल्ली : क्या देश की सबसे पुरानी सियासी पार्टी इन दिनों किसी बड़ी साज़िश का शिकार हो रही है? क्या कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी पर प्रशांत किशोर हावी होते जा रहे हैं?  क्या जिस प्रशांत किशोर को कांग्रेस ने अपनी नय्या पार लगाने के लिए मोटी रकम अदा की है, वो बीजेपी द्वारा कांग्रेस में फिट गये मोहरे तो नहीं ? क्या बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के प्लान पर  पीके आज भी  काम तो नहीं कर रहे ? क्या कई साल से हाशिये पर पड़ी कांग्रेस का सच्चा समर्थक और कार्यकर्ता वर्तमान में उपेक्षा और घुटन महसूस कर रहा है? क्या कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने के नाम पर कोई बड़ी साज़िश तो नहीं रची जा रही है?

नई दिल्ली : क्या देश की सबसे पुरानी सियासी पार्टी इन दिनों किसी बड़ी साज़िश का शिकार हो रही है? क्या कांग्रेस के अंदर ही राहुल गांधी पर प्रशांत किशोर हावी होते जा रहे हैं?  क्या जिस प्रशांत किशोर को कांग्रेस ने अपनी नय्या पार लगाने के लिए मोटी रकम अदा की है, वो बीजेपी द्वारा कांग्रेस में फिट गये मोहरे तो नहीं ? क्या बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत के प्लान पर  पीके आज भी  काम तो नहीं कर रहे ? क्या कई साल से हाशिये पर पड़ी कांग्रेस का सच्चा समर्थक और कार्यकर्ता वर्तमान में उपेक्षा और घुटन महसूस कर रहा है? क्या कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने के नाम पर कोई बड़ी साज़िश तो नहीं रची जा रही है?

इसी तरह के कई सवाल इन दिनों सियासत के जानकारों और कुछ कांग्रेसियों के मन में उठ तो रहे हैं ? लेकिन अनुशासन और हाइकमान के डर से कांग्रेसियों की हिम्मत कुछ बोलने की नहीं हो रही है!  दरअसल कई साल से लगातार नाकमियों का मुंह देख रही कांग्रेस के कई समर्पित और वफादार कार्यकर्ता इन दिनों नई तरह की उलझन में फंसे हैं! चाहे बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव हों या फिर वर्तमान में बिहार विधानसभा में कांग्रेस के युवराज की नाकामी, चाहे उत्तर प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव हों… या फिर इस बार टीम अखिलेश के हाथों करारी शिकस्त..!  चाहे राजस्थान विधानसभा में बीजेपी के हाथों करारी मात हो या फिर लोकसभा में सफाए के बाद हरियाणा, महाराष्ट्र समेत अब आसाम विधानसभा तक से कांग्रेस का विलुप्त होना! इस सबके बावजूद कांग्रेस का सच्चा समर्थक न तो कांग्रेस से मायूस हुआ न ही उसने कांग्रेस का दामन छोड़ा।

लेकिन वर्तमान में अपनी कथित उपेक्षा को लेकर उसके मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। हांलाकि कांग्रेस की तरफ से उम्मीद जताई जा रही है कि सियासत के अखाड़े में कांग्रेस जल्द ही दोबारा खड़ी हो जाएगी। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस को पुनर्जन्म देने के लिए बहुत मोटे खर्चे के बाद पीके नाम का सहारा लिया जा रहा है!  लेकिन इसको लेकर भी कांग्रेस का सच्चा समर्थक पसोपेश में है! कांग्रेस के पुराने समर्थको का मानना है कि क्या अब ऐसे दिन आ गये हैं कि वो जनता के भरोसे के बजाए उसी ग्रुप के सहारे खुद को खड़ा करने में लगी है जिसने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कबर खोदते हुए बीजेपी को स्थापित किया था! साथ ही कुछ कांग्रेसियों को आशंका है कि कहीं कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली बीजेपी ने ही तो पीके नाम के इस ग्रुप को कांग्रेस के भीतर तो लांच नहीं कर दिया है?  साथ ही जिस तरह से कांग्रेस को खड़ा करने का सपना दिखाने के बावजूद ऊपर से लेकर नीचे तक कथिततौर पर पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को न सिर्फ उपेक्षित किया जा रहा है, बल्कि उनको किनारे लगाकर नये चेहरों को स्थापित किया जा रहा है, उससे भी कई सवाल उठ रहे हैं? कई पुराने कार्यकर्ताओं का अंदेशा है कि कांग्रेस में कथिततौर पर पुरानों को ठिकाने लगाकर लाए जा रहे नये नये चेहरे तमाम वही लोग हैं जो कुछ समय पहले तक बीजेपी की मार्किटिंग और बीजेपी के लिए ही काम कर रहे थे!(हालांकि बाद में यही पीके यानि प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनावों में मोटी फीस के एवज़ नितीश कुमार के लिए काम करते सुने गये थे।)

इतना ही नहीं कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस को खड़ा करने के नाम पर जिस ढंग से पीके की मार्केटिंग की जा रही है और आर.जी को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, उससे तो यही लगता है कि आने वाले समय में कांग्रेस के अंदर ही पीके राहूल गांधी तक पर भारी न पड़ जाएं! कहा तो ये भी जा रहा है कि पूर्व में आर.जी को पप्पू और कई तरह के जोक्स से बदनाम करने और उनके रुतबे को कम करने वाले लोग ही अब कांग्रेस को खड़ा करने के नाम पर कांग्रेस से  मोटी रकम वसूल कर रहे हैं!

चर्चा तो यहां तक है कि राहुल गांधी पर कई तरह के जोक बनाने वाले लोगों ने ही हाल ही में राहुल गांधी के फोटो के साथ किसी घरेलु नौकर के वेरिफिकेशन वाली खबर के लिए भी मीडिया के कुछ लोगों को मोटी रकम अदा कर चुके हैं!  ताकि ये साबित किया जा सके कि राहुल गांधी की पहचान इतनी कमजोर है कि पुलिस उनका फोटो लगा होने के बावजूद उनको पहचान तक नहीं सकती!
बहरहाल संकट से जूझ रही कांग्रेस के लिए इससे बड़ा संकट क्या होगा, कि खुद को खड़ा करने के नाम पर वो उन लोगों की शरण में जा गिरी, जिनके हाथों ही उसको लोकसभा चुनाव में लोकसभा में विपक्ष तक की भूमिका को गंवाना पड़ गया था! साथ ही पुराने गढ़ असम में कांग्रेस की करारी हार के बाद यह शक और भी गहरा गया है कि कहीं कांग्रेस मुक्त भारत के प्लान पर काम करने वाली बीजेपी ने कांग्रेस के अंदर तक अपने मोहरे फिट तो नहीं कर दिये हैं??? क्योंकि सियासत और जंग में सब कुछ जायज़ होने के नाम पर कुछ भी हो जाना कोई नई बात नहीं…!!!

लेखक आज़ाद ख़ालिद टीवी पत्रकार हैं, डीडी आंखों देखीं, सहारा समय, इंडिया टीवी, वॉयस ऑफ इंडिया, इंडिया न्यूज़ समेत कई राष्ट्रीय चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में  www.oppositionnews.com  और हिंदी साप्ताहिक दि मैन इन अपोज़िशन में कार्यरत हैं.

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