उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकारी भर्तिर्यों से सम्बंधित कुछ रोचक तथ्य…

1• सरकारी नौकरी के प्रश्न-पत्र से पहले यहाँ उत्तर-कुंजी छप जाती है।

2• अभ्यर्थी आवेदन करने से पहले यह सोचते है कि भर्ती क्लियर होगी भी या नही।

3• आवेदन की वेबसाइट खोलने से पहले अभ्यर्थी नेट पर ये पता करते है कि इस भर्ती के ख़िलाफ़ किस वक़ील को केस लड़वाना है।

4• आवेदन का शुल्क जमा करने से पहले अभ्यर्थी हायर किये जाने वाले वक़ील की फ़ीस में अंशदान करने के लिए रूपए जुटाता है।

5• आवदेन इतने अभ्यर्थी करते है कि इनकी संख्या से एक अलग प्रदेश बसाया जा सकता है।

6• आवेदन करने के बाद अभ्यर्थी के सुबह-शाम मिलाकर मंदिर/मस्जिद के 4 फ़ेरे सिर्फ़ भर्ती रुकवाने के लिए कोई याचिका न डाल दे, इसलिए बढ़ जाते है।

7• आवेदन करने के बाद अभ्यर्थी सिलेबस पता करने की जगह ये पता करने में जुट जाता है कि इस भर्ती के लिए कितना पैसा चलेगा।

8• आवेदन करने के बाद अभ्यर्थी विषय-सामग्री की जगह जुगाड़ खोजने की तैयारी में लग जाते है।

9• आवेदन करने के बाद पढाकू अभ्यर्थी इस आश में और पढ़ने लगते है कि एक सीट पर तो फ्रेश भर्ती ज़्यादा से ज़्यादा होगी ही।

10• भर्ती के विज्ञापन के बाद नेता और ब्यूरोक्रेट को एक अतिरिक्त सचिव सिर्फ़ पैसे लेने के लिए नियुक्त करना पड़ता है।

11• आवेदन के बाद अभ्यर्थी सपने में बड़बड़ाता हुआ पाया जाता है कि “पढ़ने से क्या फ़ायदा जब भर्ती पैसे देकर ही होनी है।”

12• परीक्षा की तिथि घोषित होने पर सम्पूर्ण राज्य उसे सम्मान दिवस के रूप में मनाता है।

13• परीक्षा तिथि आने के बाद सभी अभ्यर्थी एक दूसरे को ये कहते हुए बधाई देते है कि “चलो कम से कम परीक्षा तो होगी।”

14• तिथि आने के बाद whatsapp उस दिन के लिए अपने पर पड़ने वाली जिम्मेदारियां को लेकर दुःखी हो जाता है।

15• भर्ती के लिए छपने वाले प्रश्न-पत्र पर चिपकने वाले सील के स्टीकर ये सोचकर पार्टी मनाने लगते है कि कितना भी चिपका लो मुझको तो लीक होना ही होना है।

16• अभ्यर्थी का परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड ही नही आता सरकार को उम्मीद रहती है कि जब लोग अपना जुगाड़ बना लेते है, तो एक एडमिट कार्ड क्यों नही बना सकता।

17• एडमिट कार्ड न आने की वज़ह से अभ्यर्थी खुश होकर कहता है चलो आने-जाने का किराया तो बचा और समय भी।

18• परीक्षा स्थल पर पहुँचने के बाद अभ्यर्थी सबसे पहले ये सुनिश्चित करता है कि यहाँ सच में कोई पेपर है या बेरोजगारी भत्ता बंट रहा है या लंगर चल रहा है।

19• श्यामपट पर अभ्यर्थी अपने अनुक्रमांक में अंकित इतने अंक देखकर एक बारगी सोचने में पड जाता है कि ये सच में मेरा रोल नंबर है या किसी के स्विस बैंक का अकाउंट नंबर।

20• जैसे-तैसे अपनी परीक्षा कक्ष में पहुँचने के बाद वो पहले से मौजूद अभ्यर्थी से सबसे पहले पूछता है कि भाई पंखा तो चलता है न यहाँ का।

21• अभ्यर्थी के सामने पेपर आने के बाद खुद ही कहता है, क्या करेगा हल करके मैं तो पहले ही लीक हो चूका हूँ।

22• उत्तर-पुस्तिका मिलने के बाद से जुगाड़ वाले लोग उत्तर-पुस्तिका खाली छोड़ देते है, क्योंकि उन्हें जुगाड़ वाले अंकल पहले बता देते है कि प्रश्न के चारों विकल्प सही हो सकते है, इसलिए तुम वहां छोड़ देना हम यहाँ भर लेंगे।

23• परीक्षा समाप्ति के बाद अभ्यर्थी ईश्वर पर कुछ न छोड़कर सबकुछ जुगाड़ वाले अंकल/ अफ़सर/नेता पर छोड़ देते हैं।

24• अभ्यर्थी घर पहुंचकर अपने उत्तरों के मिलान के लिए किताबें न खोलकर टीवी ये पता करने के लिए खोलता है कि पेपर लीक कहाँ-कहाँ हुआ है।

25• जैसे-जैसे परिणाम पास आने लगता है, अभिवावक अभ्यर्थी सहित मंदिर/मस्ज़िद पास होने के लिए की जगह पैसे न डूबने की विनती के साथ 24 घंटे में 25 बार जाते है।

26• जब देनदार घर के बाहर 5 मुस्टंडों के साथ आता है तो पता चलता है कि आज परिणाम आ गया है।

27• परिणाम देखने के बाद पता चलता है कि दूर के मामा के फूफा के चाचा के बेटे के ससुर की साली के देवर का सिर्फ़ भौकाल मेन्टेन है।

28• परिणाम के बाद अभ्यर्थी एकता संघ बनाकर इंसाफ़ के लिए एकजुट हो जाते है।

29• भर्ती में धांधली पाये जाने के बाद भर्ती निरस्त हो जाती है और सारा सरकारी खज़ाना और नेताओं/अफसरों की जेब में मलाई जम जाती है।

30• और इस बीच फिर से एक और सरकारी भर्ती निकल आती है औ अभ्यर्थियों का मेला आवेदन डालते-डालते सर्वर ही बैठा देता है।

जय समाजवाद, जय भर्तीवाद|

(यह पोस्ट इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है. वहीं से साभार लेकर प्रकाशित किया गया है.)

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