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वाशिंगटन: पाँचवें झिलमिल कवि सम्मेलन ने सियैटल में जमाया कविताओं का रंग

अमेरिका के पर्यटन नगर सियैटल क्षेत्र में स्थित ‘बैलव्यू यूथ थियेटर’ मेँ हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 20 सितम्बर को ‘प्रतिध्वनि’  द्वारा पाँचवें ‘झिलमिल कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग सोलह स्थानीय कवियोँ तथा 3 आमंत्रित कवियोँ ने काव्य पाठ किए। कवि सम्मेलन का प्रारंभ करते हुए अंकुर गुप्त ने प्रतिध्वनि संस्था की ओर से उपस्थित श्रोताओं का स्वागत किया। कार्यक्रम दो सत्रों मेँ आयोजित किया गया।

अमेरिका के पर्यटन नगर सियैटल क्षेत्र में स्थित ‘बैलव्यू यूथ थियेटर’ मेँ हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 20 सितम्बर को ‘प्रतिध्वनि’  द्वारा पाँचवें ‘झिलमिल कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग सोलह स्थानीय कवियोँ तथा 3 आमंत्रित कवियोँ ने काव्य पाठ किए। कवि सम्मेलन का प्रारंभ करते हुए अंकुर गुप्त ने प्रतिध्वनि संस्था की ओर से उपस्थित श्रोताओं का स्वागत किया। कार्यक्रम दो सत्रों मेँ आयोजित किया गया।

लगभग डेढ़ घंटे चले प्रथम सत्र मेँ पाँच स्थानीय कवियोँ तथा आमंत्रित कवियोँ ने विशेष काव्य पाठ किए। मंच की बागडोर संभाल रहे अभिनव ने तीनों आमन्त्रित कवियों डॉ गीतांजलि गेरा (पोर्टलैण्ड), जनार्दन पाण्डेय ‘प्रचण्ड’ (वैंकूवर) तथा डॉ कविता वाचक्नवी (ह्यूस्टन) को अपनी काव्य पंक्तियाँ समर्पित करते हुए मंच पर आमंत्रित किया।  इसके पश्चात कार्यक्रम के सूत्रधार कवि अभिनव शुक्ल की तीसरी काव्य कृति ‘हम भी वापस जाएँगे’ का अमेरिका की धरती पर लोकार्पण माननीय अतिथियोँ तथा नगर के कुछ गण्यमान्य अतिथियों द्वारा किया गया। शिवना प्रकाशन (सीहोर, मध्य प्रदेश) द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक मेँ अभिनव के गीतों, ग़ज़लों सहित कुछ अन्य गम्भीर रचनाओं को भी स्थान मिला है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र मेँ शेष स्थानीय कवियोँ के पश्चात पुनः तीनो आमंत्रित कवियोँ का काव्य पाठ संपन्न हुआ। अधिकांश कवियों ने सामाजिक विसंगतियोँ पर चुटीले प्रहार किए। जिसमें कवियत्री डॉ गीतांजली गेरा ने नारी मन की उलझनों पर लिखी रचना के साथ निर्भया को समर्पित कविता भी पढ़ी। वहीं वैंकूवर से पधारे वीर रसवतार जनार्दन पांडे ‘प्रचण्ड’ नें मंगल पाण्डेय तथा भगत सिंह पर अपनी रचनाओं से श्रोताओं में जोश का संचार किया। उनके काव्य पाठ के बाद श्रोताओं नें कविता के सम्मान मेँ खड़े होकर तालियाँ बजाईं तथा सभागार राष्ट्रभक्ति के नारों से गूँज उठा। वरिष्ठ कवयित्री डॉ कविता वाचक्नवी की गहन, वैचारिक एवं भावपूर्ण रचनाओं ने श्रोताओं को मानो झकझोरा और विभोर कर दिया। उनका सुप्रसिद्ध गीत ‘काल जल्लाद है’ कवि सम्मलेन की अन्तिम मनोहर प्रस्तुति रही। 
इस कार्यक्रम का पूरा प्रसारण अमेरिका स्थित टीवी एशिया पर 26 सितम्बर को प्रसारित किया गया। सम्मेलन में अंकुर गुप्ता, दीप्ति व्यास, अनु गर्ग, आलोक प्रकाश ‘खुशफ़हम’,  धीरज मेहता, युविका शर्मा, राहुल उपाध्याय, दिव्या रूसिया, मनीष कुमार गुप्त, संतोष खरे, फराह सय्यद, श्वेता श्रीवास्तव, अभिनव शुक्ल, गीतांजली गेरा, जनार्दन पाण्डेय ‘प्रचण्ड’ एवं डॉ कविता वाचक्नवी नें काव्य पाठ किया। अगस्त्य कोहली, अंकुर गुप्त, संतोष खरे, नंदा तिवारी तथा दिनेश कोर्डे एवं दीप्ति शुक्ला सहित प्रतिध्वनि संस्था से जुड़े अनेक स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया।

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