चैनलों पर क्या चलेगा और क्या नहीं, यह टीआरपी के आधार पर तय होता है

भोपाल: टेलीविजन रेटिंग पॉइंट यानि टीआरपी बाज़ारवाद और उसकी लोकप्रियता का प्रतीक है। सारे टीवी चैनल टीआरपी के दबाव में रहते हैं। इसी टीआरपी के आधार पर तय होता है कि टीवी चैनल में क्या चलेगा और क्या नहीं। यह कहना है देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मुकेश कुमार का। फ्रेन्ड्स ऑफ मीडिया भोपाल द्वारा आयोजि राष्ट्रीय परिचर्चा में डॉ.मुकेश कुमार की पुस्तक टीआरपी, टीवी न्यूज़ और बाज़ार पर पत्रकारों और लेखकों ने चर्चा की।

भोपाल के स्वराज भवन में आयोजित इस राष्ट्रीय परिचर्चा में कई पत्रकारों ने डॉ.मुकेश कुमार की पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त किए. टीवी जर्नलिज्म में टीआरपी को लेकर मची होड और बाज़ारवाद पर इसके प्रभाव को इस पुस्तक में इंगित किया गया है. पुस्तक में न्यूज़ चैनलों में चमी टीआरपी की होड को लेकर जिस तरह डॉ.मुकेश कुमार ने लिखा है उससे टीवी मीडिया पर आने वाले दिनों में क्या प्रभाव होगा और इसके चलते पत्रकारिता के पेशे में हो रहे बदलावों को लेकर भी उन्होनें लिखा है.

इस परिचर्चा में वरिष्ठ अतिथि के रूप में पहुँचे स्तंभकार और टीवी जर्नलिज्म से जुड़े रहे पत्रकार राजकुमार केसवानी जी ने टीवी टीआरपी को बजार के लिए जरुरी बताते हुए इसके बाजार पर प्रभाव को बताया साथ ही डॉ मुकेश कुमार जी की पुस्तक को टीआरपी के बाज़ारवाद को समझने के लिए अच्छी किताब बताया. तो वही वरिष्ठ पत्रकार शरद द्विवेदी जी ने कहा कि चैनलों में विकृत अभिरुचि टीआरपी बढाती है जबकि पत्रकार दीपक तिवारी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि टीआरपी विज्ञापन का खेल है. इस परिचर्चा में फ़िल्म लेखक पंकज जी ने कहा कि फ़िल्मो के बाजार को भी टीआरपी कण्ट्रोल कर लिया है. टीआरपी, टीवी न्यूज़ और बाज़ार पुस्तक की परिचर्चा का संचालन एबीपी न्यूज़ के मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ हेड ब्रजेश राजपूत जी ने किया, वही आईबीएन 7 के एमपी सीजी हेड मनोज शर्मा जी ने परिचर्चा में शामिल होने वाले सभी पत्रकारो का धन्यवाद ज्ञापित किया.

नीरज चौधरी की रिपोर्ट. संपर्क: njsh532@gmail.com