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दारू खरीदती इस महिला को प्रणाम बोलिए

: यहां नशे की गिरफ्त में हैं महिलाएं और बच्‍चे : राजस्थान के ग्रामीण अंचल में इन दिनों शराब का काफी प्रचलन बढ़ने लगा है। कई घर उजाड़ चुके तथा बड़े कांड करवाने वाला यह नशा अब महिला व बच्चों पर भी अपना रंग चढ़ाता नजर आ रहा है। आने वाली युवा पीढ़ी जो देश का भविष्य है का आकर्षण इसकी और बढ़ रहा है, वही सबसे ज्यादा इसका शिकार हो रही है। सरकारी आबकारी नीति के चलते गांव-गांव ढाणी-ढाणी में खुली शराब की दुकानों ने इसकी खरीद खरीद आसान करने के साथ युवा वर्ग को इस और आकर्षित कर लिया है। शराब की दुकानों पर खरीद के लिए कम उम्र के बच्चे भी बेझिझक पहुंच रहे है। वहीं शराब पीने के मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं रही है।

शराब

: यहां नशे की गिरफ्त में हैं महिलाएं और बच्‍चे : राजस्थान के ग्रामीण अंचल में इन दिनों शराब का काफी प्रचलन बढ़ने लगा है। कई घर उजाड़ चुके तथा बड़े कांड करवाने वाला यह नशा अब महिला व बच्चों पर भी अपना रंग चढ़ाता नजर आ रहा है। आने वाली युवा पीढ़ी जो देश का भविष्य है का आकर्षण इसकी और बढ़ रहा है, वही सबसे ज्यादा इसका शिकार हो रही है। सरकारी आबकारी नीति के चलते गांव-गांव ढाणी-ढाणी में खुली शराब की दुकानों ने इसकी खरीद खरीद आसान करने के साथ युवा वर्ग को इस और आकर्षित कर लिया है। शराब की दुकानों पर खरीद के लिए कम उम्र के बच्चे भी बेझिझक पहुंच रहे है। वहीं शराब पीने के मामले में महिलाएं भी पीछे नहीं रही है।

शराबमहिलाओं द्वारा भी बड़ी संख्या में शराब का सेवन किया जा रहा है, इसमें ज्यादातर संख्या मजदूर वर्ग के तहत आने वाली महिलाओं की है, जो दिन भर खून पसीना बहाकर अपनी मेहनत के पैसे से शराब का सेवन कर अपने परिवार को आर्थिक रूप से पीछे धकेल रही है और साथ ही अपने बच्चों में गलत संस्कारों का समावेश भी कर रही है। एक दिन ग्रामीण क्षेत्र के प्रवास के दौरान बारां जिले के मांगरोल उपखंड में स्थित बमोरीकलां तिराहे पर स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान पर देखने को मिला, जब दो महिलाएं शराब की दुकान पर बेखौफ खड़ी शराब लेती नजर आईं। सरकार को चाहिए की शराब की दुकानों को पांबद किया जाये कि कम उम्र के बच्चों को शराब नहीं बेची जाए तथा शराब की लत से दूर रखने के लिए महिलाओं को प्रेरित करने का प्रचार अभियान शुरू किया जाए।

लेखक रघुवीर शर्मा कोटा के रहने वाले हैं. बचपन अभावों और संघर्षों के बीच गुजरा. ऑपरेटर के रूप में दैनिक नवज्‍योति से काम शुरू किया. मेहनत के बल पर संपादकीय विभाग में पहुंचे. लेखन और चिंतन करने का शौक है. वैचारिक स्‍वतंत्रता के समर्थक रघुवीर ब्‍लागर भी हैं. अपनी भावनाओं को अपने ब्‍लाग पर उकेरते रहते हैं.

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