• BJP यूपी में 17 अति-पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में क्यों शामिल करा रही?

    Category: तेरा-मेरा कोना

    लखनऊ : ''भाजपा का उत्तर प्रदेश की 17 अति-पिछड़ी जातियों को अनुसूचित-जातियों की सूची में शामिल कराने का प्रयास असंवैधानिक है''... यह बात एस आर दारापुरी, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं संयोजक, जन मंच उत्तर प्रदेश ने प्रेस को जारी ब्यान में कही है. उन्होंने कहा है कि आज एक समाचार पत्र के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश की 17 अति पिछड़ी जातियां जिनमें निषाद, बिन्द, मल्लाह, क

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  • नए रूप में महुआ प्लस, अब मिलेगा और ज़्यादा मनोरंजन

    Category: संगीत-सिनेमा

    काफी कम समय में देश विदेश के भोजपुरिया दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने मे कामयाब रहा महुआ प्लस अब दर्शकों को एक नए कलेवर और नये रंग रूप में नज़र आएगा। महुआ प्लस पहले से ही अपने एक से बढ़कर एक  बेहतरीन रिएलिटी शोज के लिए दर्शकों के बीच काफी प्रसिद्द है जिसके वजह से यह चैनल दर्शकों के बीच पहली पसंद के साथ हमेशा सुर्खियों मे रहा है। भौजी नं वन, सुरवीर जैसे रिएलिटी शोज, नए भोजपुरी फिल्म, हिंदी - भोजपुरी फ़िल्मी गाने , भक्ति भजन आरती जैसे उम्दा कार्यक्रम को दर्शकों ने हमेशा अपना प्यार दिया है।

    अब एक बार फिर महुआ प्लस दर्शकों को ध्यान मे र

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  • डॉ आंबेडकर एवं कार्ल मार्क्स - वर्ण बनाम वर्ग

    Category: समाज-सरोकार

    संजीव खुदशाह
    वर्ग बनाम वर्ण की चर्चा इससे पहले भी होती रही है। लेकिन जब हम कार्ल मार्क्स के बरअक्स इस चर्चा को आगे बढ़ाते हैं, तो यहां पर वर्ग के मायने कुछ अलग हो जाते हैं। भारत में वर्ग के मायने होते हैं अमीर वर्ग और गरीब वर्ग। लेकिन कार्ल मार्क्स जिस वर्ग की बात कर रहे हैं। उसमें मालिक वर्ग और मजदूर वर्ग है। इसलिए हमें बहुत ही सावधानी पूर्वक इस अंतर को समझते हुए बात करनी होगी। इसी प्रकार वर्ण की भी विभिन्‍न परिभाषाएं सामने आती है। कई बार वर्ण को रंगों के विभाजन के तौर पर देखा जाता है। तो कई बार वर्णों को जाति व्यवस्था क

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  • सिन्हा का जाना और येचुरी का आना

    Category: मीडिया मंथन

    डॉ. वेदप्रताप वैदिक
    कल दो खबरों ने मेरा ध्यान खींचा। एक यशवंत सिन्हा का भाजपा से इस्तीफा और दूसरा, सीताराम येचूरी का मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का दुबारा महासचिव बनना। ये दोनों खबरें काफी अलग-अलग हैं लेकिन इन दोनों में एक अंदरुनी एकता है। दोनों का लक्ष्य एक ही है। मोदी को सत्ता से हटाना। सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वे अटलजी के साथ वित्त और विदेश मंत्री भी रहे हैं। वे, अरुण शौरी और शत्रुघ्न सिन्हा- ये तीनों पूर्व भाजपाई मंत्री मोदी का विरोध क

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  • मार्क्स की द्विशतवार्षिकी : मानव मुक्ति का लांग मार्च जारी है

    Category: राजनीति-सरकार

    - दीपंकर भट्टाचार्य- "दार्शनिकों ने अब तक केवल विश्व की विभिन्न तरीकों से व्याख्या की है; मगर मसला यह है कि इसे कैसे बदलना है'' - कार्ल मार्क्स (5 मई 1818 - 14 मार्च 1883) अपने जीवन के काफी शुरूआती दिनों में, जब वे केवल 27 साल के थे, इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके थे. अपने जीवन की आखिरी सांस तक वे अनवरत इसी लक्ष्य की प्राप्ति के काम में लगे रहे, और इसके दौरान उन्होंने उस दुनिया को, जिसमें हम रह रहे हैं, समझने और बदलने के मकसद से किये जाने वाले मानवीय प्रयास की सबसे समृद्ध और स

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  • केजरीवाल पर आरोप : सच की सभावनाएं

    Category: मेरी भी सुनो

    कविवर रहीम का कथन है - ''रहिमन अँसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रकट करेइ। जाहि निकासौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ।।''  अर्थात् जिस प्रकार आँसू नयन से बाहर आते ही हृदय की व्यथा को व्यक्त कर देता है उसी प्रकार जिस व्यक्ति को घर से निकाला जाता है, वह घर के भेद बाहर उगल देता है। कुछ ऐसी ही आँसू जैसी स्थिति श्री कपिल मिश्रा की भी है जिन्होंने ‘आप’ के मंत्रिमंडल से बाहर होते ही दो करोड़ की मनोव्यथा जग जाहिर कर दी। रहीमदास के उपर्युक्त दोहे से इस प्रश्न का उत्तर भी मिल जाता है कि श्री कपिल मिश्रा ने दो करोड़ का रहस्य पहले क्यों नहीं प्रकट किया ? आँसू जब तक नेत्र स

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  • गाय से प्रेम, हूरों के सपने और सुसाइड बॉम्बर

    Category: विदेश-ब्रह्मांड

    Tabish Siddiqui : कामसूत्र भारत में लगभग 300 BC में लिखी गयी.. उस समय ये किताब लिखी गयी थी प्रेम और कामवासना को समझने के लिए.. कामसूत्र में सिर्फ बीस प्रतिशत ही भाव भंगिमा कि बातें हैं बाक़ी अस्सी प्रतिशत शुद्ध प्रेम है.. प्रेम के स्वरुप का वर्णन है.. वात्सायन जानते थे कि बिना काम और प्रेम को समझे आत्मिक उंचाईयों को समझा ही नहीं जा सकता है कभी.. ये आज भी दुनिया में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है

    भारत किसलिए अलग था अन्य देशों से? संभवतः इसीलिए.. क्यूंकि भारत जिस मानसिक खुलेपन की बात उस समय कर रहा था वो शायद ही किसी सभ्यता ने की थी.. मगर धीरे धी

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  • देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है और कश्मीर की आग बेकाबू है

    Category: देश-प्रदेश

    कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसे देखकर नहीं लगता कि आग जल्दी बुझेगी। राजनीतिक नेतृत्व की नाकामियों के बीच, सेना के भरोसे बैठे देश से आखिर आप क्या उम्मीद पाल सकते हैं? भारत के साथ रहने की ‘कीमत’ कश्मीर घाटी के नेताओं को चाहिए और मिल भी रही है, पर क्या वे पत्थर उठाए हाथों पर नैतिक नियंत्रण रखते हैं यह एक बड़ा सवाल है। भारतीय सुरक्षाबलों के बंदूक थामे हाथ सहमे से खड़े हैं और पत्थरबाज ज्यादा ताकतवर दिखने लगे हैं।

    यह वक्त ही है कि कश्मीर को ठीक कर देने और इतिहास की गलतियों के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराने वाले आज सत्ता में हैं। प्रदेश और दे

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  • तो 'आधार आधारित पेमेंट' सिस्टम के कारण उंगलीमार डाकुओं की होगी वापसी!

    Category: बातों बातों में

    केंद्र की मोदी सरकार ने भीम एप शुरू कर दिया है| आधार पेमेंट का सिस्टम शुरू हो गया गया है| डिजिटल इंडिया का सपना जल्द ही साकार होगा| हमारा देश भी विकसित हो जाएगा| लेकिन इसी बीच एक और बात ख़ास होगी। वो ये कि अब चोरी और अपराध की वारदातों में कमी आएगी| साथ ही पुलिस को भी अब थोड़ी राहत मिलेगी| लेकिन शायद अब आफत गले पड़ने वाली है| क्यूंकि अब हर पेमेंट एक ऊँगली से हुआ करेगी। तो ऐसे में चोर या ऐसे आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग उँगलियाँ ही काटा करेंगे| फिर ऊँगली या अंगूठा ही उनकी तिजोरी की चाबी हुआ करेगी|

    शायद सुर्खियाँ भी यही बने- पेमेंट देते वक्

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BJP यूपी में 17 अति-पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जातियों की सूची में क्यों शामिल करा रही?

Category: तेरा-मेरा कोना

लखनऊ : ''भाजपा का उत्तर प्रदेश की 17 अति-पिछड़ी जातियों को अनुसूचित-जातियों की सूची में शामिल कराने का प्रयास असंवैधानिक है''... यह बात एस आर दारापुरी, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक एवं संयोजक, जन मंच उत्तर प्रदेश ने प्रेस को जारी ब्यान में कही है. उन्होंने कहा है कि आज एक समाचार पत्र के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने उत्तर प्रदेश की 17 अति पिछड़ी जातियां जिनमें निषाद, बिन्द, मल्लाह, क

नए रूप में महुआ प्लस, अब मिलेगा और ज़्यादा मनोरंजन

Category: संगीत-सिनेमा

काफी कम समय में देश विदेश के भोजपुरिया दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाने मे कामयाब रहा महुआ प्लस अब दर्शकों को एक नए कलेवर और नये रंग रूप में नज़र आएगा। महुआ प्लस पहले से ही अपने एक से बढ़कर एक  बेहतरीन रिएलिटी शोज के लिए दर्शकों के बीच काफी प्रसिद्द है जिसके वजह से यह चैनल दर्शकों के बीच पहली पसंद के साथ हमेशा सुर्खियों मे रहा है। भौजी नं वन, सुरवीर जैसे रिएलिटी शोज, नए भोजपुरी फिल्म, हिंदी - भोजपुरी फ़िल्मी गाने , भक्ति भजन आरती जैसे उम्दा कार्यक्रम को दर्शकों ने हमेशा अपना प्यार दिया है।

अब एक बार फिर महुआ प्लस दर्शकों को ध्यान मे र

डॉ आंबेडकर एवं कार्ल मार्क्स - वर्ण बनाम वर्ग

Category: समाज-सरोकार

संजीव खुदशाह
वर्ग बनाम वर्ण की चर्चा इससे पहले भी होती रही है। लेकिन जब हम कार्ल मार्क्स के बरअक्स इस चर्चा को आगे बढ़ाते हैं, तो यहां पर वर्ग के मायने कुछ अलग हो जाते हैं। भारत में वर्ग के मायने होते हैं अमीर वर्ग और गरीब वर्ग। लेकिन कार्ल मार्क्स जिस वर्ग की बात कर रहे हैं। उसमें मालिक वर्ग और मजदूर वर्ग है। इसलिए हमें बहुत ही सावधानी पूर्वक इस अंतर को समझते हुए बात करनी होगी। इसी प्रकार वर्ण की भी विभिन्‍न परिभाषाएं सामने आती है। कई बार वर्ण को रंगों के विभाजन के तौर पर देखा जाता है। तो कई बार वर्णों को जाति व्यवस्था क

सिन्हा का जाना और येचुरी का आना

Category: मीडिया मंथन

डॉ. वेदप्रताप वैदिक
कल दो खबरों ने मेरा ध्यान खींचा। एक यशवंत सिन्हा का भाजपा से इस्तीफा और दूसरा, सीताराम येचूरी का मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का दुबारा महासचिव बनना। ये दोनों खबरें काफी अलग-अलग हैं लेकिन इन दोनों में एक अंदरुनी एकता है। दोनों का लक्ष्य एक ही है। मोदी को सत्ता से हटाना। सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। वे अटलजी के साथ वित्त और विदेश मंत्री भी रहे हैं। वे, अरुण शौरी और शत्रुघ्न सिन्हा- ये तीनों पूर्व भाजपाई मंत्री मोदी का विरोध क

मार्क्स की द्विशतवार्षिकी : मानव मुक्ति का लांग मार्च जारी है

Category: राजनीति-सरकार

- दीपंकर भट्टाचार्य- "दार्शनिकों ने अब तक केवल विश्व की विभिन्न तरीकों से व्याख्या की है; मगर मसला यह है कि इसे कैसे बदलना है'' - कार्ल मार्क्स (5 मई 1818 - 14 मार्च 1883) अपने जीवन के काफी शुरूआती दिनों में, जब वे केवल 27 साल के थे, इस निष्कर्ष पर पहुंच चुके थे. अपने जीवन की आखिरी सांस तक वे अनवरत इसी लक्ष्य की प्राप्ति के काम में लगे रहे, और इसके दौरान उन्होंने उस दुनिया को, जिसमें हम रह रहे हैं, समझने और बदलने के मकसद से किये जाने वाले मानवीय प्रयास की सबसे समृद्ध और स

केजरीवाल पर आरोप : सच की सभावनाएं

Category: मेरी भी सुनो

कविवर रहीम का कथन है - ''रहिमन अँसुआ नैन ढरि, जिय दुख प्रकट करेइ। जाहि निकासौ गेह ते, कस न भेद कहि देइ।।''  अर्थात् जिस प्रकार आँसू नयन से बाहर आते ही हृदय की व्यथा को व्यक्त कर देता है उसी प्रकार जिस व्यक्ति को घर से निकाला जाता है, वह घर के भेद बाहर उगल देता है। कुछ ऐसी ही आँसू जैसी स्थिति श्री कपिल मिश्रा की भी है जिन्होंने ‘आप’ के मंत्रिमंडल से बाहर होते ही दो करोड़ की मनोव्यथा जग जाहिर कर दी। रहीमदास के उपर्युक्त दोहे से इस प्रश्न का उत्तर भी मिल जाता है कि श्री कपिल मिश्रा ने दो करोड़ का रहस्य पहले क्यों नहीं प्रकट किया ? आँसू जब तक नेत्र स

गाय से प्रेम, हूरों के सपने और सुसाइड बॉम्बर

Category: विदेश-ब्रह्मांड

Tabish Siddiqui : कामसूत्र भारत में लगभग 300 BC में लिखी गयी.. उस समय ये किताब लिखी गयी थी प्रेम और कामवासना को समझने के लिए.. कामसूत्र में सिर्फ बीस प्रतिशत ही भाव भंगिमा कि बातें हैं बाक़ी अस्सी प्रतिशत शुद्ध प्रेम है.. प्रेम के स्वरुप का वर्णन है.. वात्सायन जानते थे कि बिना काम और प्रेम को समझे आत्मिक उंचाईयों को समझा ही नहीं जा सकता है कभी.. ये आज भी दुनिया में सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है

भारत किसलिए अलग था अन्य देशों से? संभवतः इसीलिए.. क्यूंकि भारत जिस मानसिक खुलेपन की बात उस समय कर रहा था वो शायद ही किसी सभ्यता ने की थी.. मगर धीरे धी

देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है और कश्मीर की आग बेकाबू है

Category: देश-प्रदेश

कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसे देखकर नहीं लगता कि आग जल्दी बुझेगी। राजनीतिक नेतृत्व की नाकामियों के बीच, सेना के भरोसे बैठे देश से आखिर आप क्या उम्मीद पाल सकते हैं? भारत के साथ रहने की ‘कीमत’ कश्मीर घाटी के नेताओं को चाहिए और मिल भी रही है, पर क्या वे पत्थर उठाए हाथों पर नैतिक नियंत्रण रखते हैं यह एक बड़ा सवाल है। भारतीय सुरक्षाबलों के बंदूक थामे हाथ सहमे से खड़े हैं और पत्थरबाज ज्यादा ताकतवर दिखने लगे हैं।

यह वक्त ही है कि कश्मीर को ठीक कर देने और इतिहास की गलतियों के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराने वाले आज सत्ता में हैं। प्रदेश और दे

तो 'आधार आधारित पेमेंट' सिस्टम के कारण उंगलीमार डाकुओं की होगी वापसी!

Category: बातों बातों में

केंद्र की मोदी सरकार ने भीम एप शुरू कर दिया है| आधार पेमेंट का सिस्टम शुरू हो गया गया है| डिजिटल इंडिया का सपना जल्द ही साकार होगा| हमारा देश भी विकसित हो जाएगा| लेकिन इसी बीच एक और बात ख़ास होगी। वो ये कि अब चोरी और अपराध की वारदातों में कमी आएगी| साथ ही पुलिस को भी अब थोड़ी राहत मिलेगी| लेकिन शायद अब आफत गले पड़ने वाली है| क्यूंकि अब हर पेमेंट एक ऊँगली से हुआ करेगी। तो ऐसे में चोर या ऐसे आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोग उँगलियाँ ही काटा करेंगे| फिर ऊँगली या अंगूठा ही उनकी तिजोरी की चाबी हुआ करेगी|

शायद सुर्खियाँ भी यही बने- पेमेंट देते वक्