काम हुए सब रॉंग आज फिर होली में
सजी-धजी मुर्गी की देख अदाओं को
दी मुर्गे ने बांग आज फिर होली में
करे भांगड़ा भांग उछल कर भेजे में
नहीं जमीं पर टांग आज फिर होली में
फटी-फटाई पेंट के आगे ये साड़ी
कौन गया है टांग आज फिर होली में
करने लगे धमाल नींद के आंगन में
सपने ऊटपटांग आज फिर होली में
बोलचाल थी बंद हमारी धन्नों से
भरी उसी की मांग आज फिर होली में
सजधज उनकी देख गधे भी हंसते हैं
रचा है ऐसा स्वांग आज फिर होली में
साडेनाल कुड़ी सोनिए आ जाओ
सुनो इश्क दा सांग आज फिर होली में।
मध्यप्रदेश ग्वालियर में जन्मे बहुमुखी रचनाकार पंडित सुरेश नीरव की गीत-गजल, हास्य-व्यंग्य और मुक्त छंद विभिन्न विधाओं
में सोलह पुस्तकें प्रकाशित हैं। अंग्रेजी, फ्रेंच, उर्दू में अनूदित कवि ने छब्बीस से अधिक देशों में हिंदी कविता का प्रतिनिधित्व किया है। हिंदुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह की मासिक पत्रिका कादम्बिनी के संपादन मंडल से तीस वर्षों तक संबद्ध और सात टीवी सीरियल लिखनेवाले सृजनकार को भारत के दो राष्ट्रपतियों और नेपाल की धर्म संसद के अलावा इजिप्ट दूतावास में सम्मानित किया जा चुका है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा आपको मीडिया इंटरनेशनल एवार्ड से भी नवाजा गया है। आजकल आप देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के राष्ट्रीय महासचिव हैं.

